Panchayat Election: कैबिनेट का बड़ा फैसला, पंचायत चुनाव के लिए ओबीसी आयोग का गठन तय, आरक्षण जल्द होगा स्पष्ट
Panchayat Election 2026: राज्य सरकार ने शुक्रवार को पंचायत चुनाव 2025 की तैयारियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने स्थानीय ग्रामीण निकायों के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को हरी झंडी दे दी है। इससे चुनावी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
पिछड़ा वर्ग आयोग अब यह संस्तुति देगा कि पंचायत चुनाव में किस वर्ग को कितने प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत चुनाव में सीटों का आरक्षण तय होगा। इससे आरक्षण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।

इससे पहले पिछली बार नगर निकाय चुनावों में आयोग न होने के कारण चुनावों को टालना पड़ा था। बाद में आयोग का गठन कर प्रक्रिया पूरी की गई थी। इस बार सरकार पहले से ही सतर्क नजर आ रही है।
गांवों में शुरू हुई चुनावी सरगर्मी
चुनाव की आहट के साथ ही गांवों में हलचल बढ़ गई है। संभावित उम्मीदवार मौजूदा ग्राम प्रधानों पर काम न करने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाने लगे हैं। विकास भवनों में रोज़ाना शिकायतों की संख्या बढ़ रही है।
जो लोग इस बार चुनाव में जोर अजमाइश करना चाहते हैं, वो अब सक्रिय नजर आ रहे हैं। गांव में घूमकर लोगों से मिलना और वोटरों को अपने पक्ष में साधने की कवायद भी शुरू हो गई है।
आरक्षण को लेकर असमंजस में हैं दावेदार
हालांकि पंचायत चुनाव में आरक्षण तय न होने से दावेदार असमंजस में हैं। कौन-सी सीट महिला, ओबीसी, एससी या सामान्य के लिए आरक्षित होगी, इसे लेकर उम्मीदवार गुणा-भाग में जुटे हैं। सभी अपनी संभावनाएं तलाशने में लगे हैं।
इसी बीच अब सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग को मंजूरी दिए जाने के बाद आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। इससे संभावित प्रत्याशियों को सीट निर्धारण को लेकर स्पष्टता मिलने की संभावना है।
नई व्यवस्था के तहत आयोग की देखरेख में ही आरक्षण प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसका उद्देश्य है कि किसी वर्ग के साथ भेदभाव न हो और चुनाव निष्पक्ष हों। आयोग की रिपोर्ट को आधार मानकर सीटों का निर्धारण होगा।
इस कदम से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई तकनीकी खामी या विवाद न उत्पन्न हो। आयोग का गठन समय से पहले कर सरकार ने संभावित कानूनी अड़चनों से बचने की रणनीति अपनाई है।
प्रशासन सतर्क, शिकायतों पर होगी कार्रवाई
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, प्रशासन भी शिकायतों को गंभीरता से लेने लगा है। पंचायत विकास कार्यों में गड़बड़ी की शिकायतों पर जांच बैठाई जा रही है। संबंधित अधिकारियों को फाइलों की समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं।
जिला पंचायत राज विभाग में सबसे अधिक शिकायतें पहुंच रही हैं। इससे यह स्पष्ट है कि ग्रामीण स्तर पर पारदर्शिता की मांग बढ़ रही है। प्रशासन इस बार किसी भी गड़बड़ी को लेकर सख्त रवैया अपनाने के मूड में है।













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