Exclusive Interview: DDU University के प्रो. रवि कांत विश्व के दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में हुए शामिल
DDU University के प्रो. रवि कांत विश्व के दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में हुए शामिल
Exclusive Interview Professor Ravi Kant Upadhyay: दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रवि कांत उपाध्याय को विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है। यह सिर्फ गोरखपुर ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गौरव की बात है। यह सूची स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, अमेरिका ने जारी की है। वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने प्रोफेसर रवि कांत उपाध्याय से खास बातचीत की।
सूची जारी होने का यह होता है पैमाना
प्रो. रवि कांत उपाध्याय ने बताया कि विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों की जो सूची जारी होती है उसका अपना एक खास पैमाना होता है। इसने सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आपका का शोध कितना पोटेंशियल है। कितना उत्तम श्रेणी का आप शोध कार्य करते हैं और इसकी गुणवत्ता कितनी है यह बहुत महत्वपूर्ण हैं।

दुनिया भर के शोधकर्ता आपके शोध को करते है फॉलो
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प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि दुनिया भर के रिसर्च लैबोरेट्री में रिसर्च करने वाले और अन्य शोधकर्ता भी हमारे शोधों को साइट करते हैं। वो हमारे वर्क को कोट करते हैं। जब तक शोध कोट न हो उसका कोई मतलब नही होता।
एक वर्ष में साइटेशन के आधार पर जारी होती है सूची
प्रो. रवि कांत उपाध्याय ने बताया कि स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी एक वर्ष में साईंटेशन के आधार पर यह सूची जारी करती है। जिसका जितना साईटेशन है वो इंडेक्स में आ जाता है।

दो इंडेक्स होते हैं
प्रो उपाध्याय ने बताया कि साईंटेशन दो इंडेक्स में आता है। एक H इंडेक्स और दूसरी I इंडेक्स है। जिनकी ज्यादा होती है वो रैंकिंग में आ जाते हैं।
दो सौ से अधिक शोध कर चुके हैं प्रकाशित
प्रो. रवि कांत उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने अभी तक कुल 227 शोध प्रकाशित किए हैं। जिसमे 107 रिव्यू आर्टिकल है और शेष शोध पत्र हैं।

दुनिया के 56 देशों से अधिक जगहों पर पढ़े गए शोध
प्रो उपाध्याय ने बताया कि उनके शोध विश्व के 56 से अधिक देशों में पढ़े जा चुके हैं। जिसमे चीन, थाईलैंड, मलेशिया, यूएसए,यूरोप, कोरिया सहित कई देश शामिल हैं। विकसित देशों में इसे ज्यादा पढ़ा गया है।
दुनिया के बड़े जनरल के एडिटोरियल बोर्ड में हैं शामिल
प्रो उपाध्याय ने बताया कि वह विश्व के सौ से अधिक महत्वपूर्ण जनरल के एडिटोरियल बोर्ड में शामिल हैं।
2001 से विश्वविद्यालय में हैं कार्यरत
प्रो उपाध्याय ने बताया कि वह 6 अप्रैल 2001 से गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य कर रहे हैं।

प्रो उपाध्याय मूलरूप से उत्तर प्रदेश के आगरा के एतमापुर तहसील के नागलवारी के रहने वाले है। प्रारंभिक शिक्षा यही से हुई।
युवाओं से की अपील
प्रो उपाध्याय ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि अपना लक्ष्य निर्धारित करते हुए कठिन परिश्रम करें। इसका कोई विकल्प नहीं है। निरंतर प्रयास जारी रखें। सफलता अवश्य मिलेगी।












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