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बृजभूषण शरण सिंह: कुश्ती के अखाड़े से राजनीति के दंगल तक, कुछ ऐसा है इनका सफर

Brij Bhushan Sharan Singh Life Story: उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह इन दिनों काफी चर्चा में हैं। प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में सिर्फ दो ही सीट ऐसी है जिस पर बीजेपी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इन दो सीटों में एक रायबरेली और एक कैसरगंज है। कैसरगंज लोकसभा सीट पर पेंच बृजभूषण शरण सिंह के नाते फंसा है। आखिर इस एक व्यक्ति में ऐसा क्या है जो पार्टी को निर्णय लेने में इतना सोचना पड़ रहा है। आइए एक नजर डालते हैं ब्रजभूषण शरण सिंह के अब तक के सफर पर-

किशोरावस्था से है कुश्ती का शौक उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में सरयू नदी के पार नवाबगंज कस्बे में ब्रजभूषण शरण सिंह की दो मंजिला हवेली मौजूद है। इसी हवेली से यह अपनी राजनीतिक सत्ता को क्रियान्वित करते हैं। वह इस क्षेत्र से 6 बार सांसद रह चुके हैं। 1957 को नवाबगंज में जन्मे, बृजभूषण किशोरावस्था में ही अखाड़े में शामिल हो गए थे और स्थानीय स्तर पर अच्छी कुश्ती लड़ने वालों में जाने जाते थे।

brijbhushan sharan singh

छात्र जीवन से शुरू की राजनीति छात्र जीवन से ही ब्रजभूषण शरण सिंह में नेतृत्व करने की क्षमता थी। इसी वजह से वह कॉलेज टाइम में छात्रों की समस्याओं के लिए आगे आते और उनकी बातों को मजबूती से रखते। यह क्रम जारी रहा और अयोध्या का साकेत कॉलेज इनके राजनीतिक कैरियर की शुरुआत करने वाला बना।

राम मंदिर से जुड़ाव इनका क्षेत्र राम मंदिर से नजदीक है। क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था प्रभु श्रीराम में है। राम मंदिर आंदोलन में इस क्षेत्र के लोगों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। ब्रजभूषण ने भी इस आंदोलन में मजबूती से अपनी भागेदारी दी। इस वजह से लोगों में इनकी लोकप्रियता और बढ़ गयी। फिर क्या था ब्रजभूषण खुद को एक कुशल राजनेता सिद्ध बनने में सफल रहे।

पहला लोकसभा बीजेपी के टिकट पर लड़ा 1991 में ब्रजभूषण शरण सिंह ने अपना पहला लोकसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा। इस चुनाव में जनता ने उन पर विश्वास दिखाया और उन्होंने कांग्रेस के आंनद सिंह को एक लाख से अधिक मतों से पराजित किया। इसी बार बीजेपी ने पहली बार यूपी में अपनी सरकार बनाई थी।

बाबरी विध्वंस में आया नाम सूत्रों के मुताबिक,ब्रजभूषण शरण सिंह का नाम बाबरी विध्वंस में भी आया। ऐसा कहा जाता है कि इस क्षेत्र के वे पहले आदमी थे जिन्हें आंदोलन के लिए मुलायम सिंह सरकार ने गिरफ्तार किया था। 1999 का समय था जब उन्होंने तिहाड़ जेल में कई रातें काटी।

गोण्डा का नहीं बदलने दिया नाम ऐसा कहा जाता है कि जब उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार थी,तब उन्होंने गोंडा का नाम बदलकर लोकनायक जयप्रकाश नारायण नगर रखने की कोशिश की थी। लेकिन ब्रजभूषण की जिद के आगे यह विचार त्याग देना पड़ा था।

सपा का किया रुख बृजभूषण सिंह ने 2009 के आम चुनावों से पहले बीजेपी को छोड़कर समाजवादी पार्टी का रुख़ किया और अपनी सीट पर जीत दर्ज की, लेकिन 2014 के चुनावों से पहले वे फिर से बीजेपी में लौट आए। वर्तमान समय में भी वो कैसरगंज लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद हैं।

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की दो सीटों को छोड़कर सभी सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इन दो सीटों में एक कैसरगंज लोकसभा भी है। बीजेपी इस बार इन्हें यहां से टिकट न देकर इनके परिजनों को देना चाहती है, जबकि ब्रजभूषण शरण सिंह इस बात से संतुष्ट नहीं हैं। इस सीट को लेकर मंथन अभी जारी है।

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