सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद तीर्थयात्रा रद्द करने के लिए यूपी सरकार ने कांवड़ संघों से किया संपर्क
लखनऊ, जुलाई 16: उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा की अनुमति को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस मामले सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा है कि वह सांकेतिक 'कांवड़ यात्रा' आयोजित करने पर पुनर्विचार करें। कोर्ट के निर्देशों के बाद अब यूपी सरकार ने लोकप्रिय तीर्थयात्रा को रद्द करने के लिए कांवड़ संघों (यूनियनों) से संपर्क किया है। यूपी सरकार के सूत्रों ने बताया कि तीर्थयात्रा को स्थगित करने की घोषणा कांवड़ संघों के माध्यम से की जाएगी।

महामारी के कारण यात्रा बंद करने के लिए कांवड़ संघों के साथ बातचीत चल रही है। 2020 में भी इन्हीं यूनियनों ने तीर्थयात्रा रद्द करने की घोषणा की थी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार कहा कि देश के नागरिकों के स्वास्थ्य का अधिकार सर्वोपरि है और धार्मिक भावनाओं सहित अन्य सभी भावनाएं इसके अधीन हैं। कोर्ट ने योगी सरकार से कांवड़ यात्रा की अनुमति देने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है।
जस्टिस रोहिंगटन एफ नारिमन की पीठ ने कहा कि महामारी देश के सभी नागरिकों को प्रभावित करती है, शारीरिक यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रथम दृष्टया हमारा विचार है कि यह प्रत्येक नागरिक से संबंधित मामला है और धार्मिक सहित अन्य सभी भावनाएं नागरिकों के जीवन के अधिकार के अधीन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को सोमवार तक अपना विचार रखने का समय दिया है।
बता दें कि इस बीच केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामा में सरकार ने शीर्ष कोर्ट से कहा है कि कोरोना महामारी के मद्देनजर राज्य सरकारों को हरिद्वार से 'गंगा जल' लाने के लिए कांवड़ियों की आवाजाही की अनुमति नहीं देनी चाहिए। इससे पहले कोरोना संकट को देखते हुए इस बार उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी है। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पर रोक नहीं लगाई जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में खुद संज्ञान लिया।












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