उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर: प्रयागराज-काशी में गंगा खतरे के निशान से ऊपर, जानें कब तक बंद रहेंगे स्कूल?

Up Flood Alert: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ का संकट बना हुआ है। प्रयागराज (Prayagraj) और वाराणसी में गंगा और यमुना समेत अन्य नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। बाढ़ का दायरा दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है और हालात विकराल होते जा रहे हैं।

प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। बीते कुछ दिनों में जलस्तर में प्रतिदिन एक मीटर से अधिक की वृद्धि हो रही थी। हालांकि सोमवार को जलस्तर बढ़ने की रफ्तार थोड़ी धीमी रही, लेकिन बढ़ाव अभी भी जारी है। सोमवार देर रात तक लगभग 5 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हो चुकी थी और 60 हजार से अधिक लोग बेघर हो गए हैं।

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7 अगस्त तक स्कूल बंद

बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने हवाई सर्वेक्षण किया और राहत कार्यों की समीक्षा बैठक कर जरूरी निर्देश जारी किए। जिलाधिकारी प्रयागराज के आदेश पर जिले में प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक के सभी बोर्डों के स्कूल 5 अगस्त से 7 अगस्त तक बंद कर दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी स्कूलों को निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा।

Varanasi flood update: वाराणसी में भी हालात बिगड़े

वहीं वाराणसी में भी बाढ़ की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है। गंगा, वरुणा, गोमती और अन्य सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। रविवार तक जहां 44 गांव प्रभावित थे, वहीं सोमवार तक यह संख्या बढ़कर 54 हो गई। शहरी क्षेत्रों में भी 24 वार्ड और मोहल्ले बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं। कई इलाकों में घाट, सड़कें और मकान पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं।

पिसौर और आराजीलाइन ब्लॉक के मरूई, सिहोरवां और जक्खिनी जैसे गांवों में भी पानी प्रवेश कर चुका है। सबसे दुखद घटना यह रही कि हुकुलगंज इलाके में 30 वर्षीय युवक मोनू चौहान की बाढ़ में डूबकर मौत हो गई। एनडीआरएफ की टीम ने शव बरामद किया। परिवार ने आपदा राहत कोष से मदद की मांग की है।

ganga water level: गंगा खतरे के निशान से ऊपर

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, सोमवार रात 12 बजे तक गंगा का जलस्तर 72.15 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 89 सेमी ऊपर है। हालांकि रविवार की तुलना में जलस्तर बढ़ने की गति धीमी रही - रविवार को यह जहां 2 सेमी प्रतिघंटा थी, वहीं सोमवार को यह घटकर 1 सेमी प्रतिघंटा हो गई।

अस्सी, दशाश्वमेध, शीतला घाट और सामने घाट जैसे प्रमुख इलाके जलमग्न हो गए हैं। पॉश कॉलोनियां भी अब बाढ़ की चपेट में आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई गांवों का संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुका है, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।

प्रदेश के अन्य जिलों में भी अलर्ट

उत्तर प्रदेश में प्रयागराज से बलिया तक गंगा किनारे बसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। मिर्जापुर, भदोही, गाजीपुर, बलिया समेत 17 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 11 मंत्रियों की टीम गठित की है जो अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।

मौसम विभाग का अलर्ट, भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग ने राज्य के तराई और आगरा मंडल के कई जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 31 जिलों में येलो अलर्ट, जबकि 64 जिलों में आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। लगातार हो रही वर्षा और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए आने वाले दिन और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश के कई जिले इस समय बाढ़ के संकट से जूझ रहे हैं।

सबसे गंभीर हालात प्रयागराज और वाराणसी में हैं जहां लाखों की आबादी प्रभावित हो चुकी है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासन राहत कार्य में जुटा हुआ है लेकिन बारिश की संभावना और गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थिति पर नजर बनाए रखना बेहद जरूरी है।

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