UP Crime News: 11 साल में शादी, 21 दिन रेप, 22 ठाकुरों को लाइन से भूना, पढ़ें दस्यु सुंदरी से MP तक की दास्तां
UP Crime News Phoolan Devi Story: जब भी भारत के सबसे चर्चित अपराधियों की बात होती है, तो फूलन देवी का नाम जरूर लिया जाता है। एक गरीब परिवार से आई इस महिला ने समाज में अपने साथ हुए अत्याचार का ऐसा बदला लिया कि पूरे देश में सनसनी मच गई। चंबल के बीहड़ों से निकलकर संसद तक पहुंचने वाली इस कहानी में बदला, राजनीति और संघर्ष सबकुछ शामिल है।
लाशों पर पैर रखकर, खून से सनी राह पार कर कैसे फूलन देवी बैंडिट क्वीन बनीं और फिर सांसद तक का सफर तय किया। Oneindia Hindi अपनी स्पेशल क्राइम सीरीज में आपको चंबल की 'डाकू रानी' से रूबरू करा रहे हैं....

Phoolan Devi Become Bandit Queen:कैसे बनीं बैंडिट क्वीन?
फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के गुरहा का पुरवा गांव में हुआ था। वो एक गरीब मल्लाह परिवार से थी। छोटी उम्र से ही उसने अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी थी। 11 साल की उम्र में उसकी शादी 35 साल के पुत्ती लाल मल्लाह से कर दी गई। शादी के बाद उसका शारीरिक और मानसिक शोषण हुआ, छोटी सी उम्र में जहन्नुम सा दर्द झेला। हिम्मत कर पति को छोड़कर वो अपने गांव लौट आईं, लेकिन वहां भी उन्हें न्याय नहीं मिला।
एक नजर में...
- जन्म: 10 अगस्त 1963, गोरहा का पुरवा, उत्तर प्रदेश
- गरीब मल्लाह परिवार में जन्म, बचपन से संघर्षों का सामना
- 11 साल की उम्र में जबरन शादी, पति द्वारा यौन शोषण और अत्याचार सहना पड़ा
डाकू बनने की शुरुआत
16 साल की उम्र में फूलन देवी का अपहरण कर लिया गया और वो चंबल के डाकुओं के गैंग में शामिल हो गईं। डाकू विक्रम मल्लाह से उसे सहारा मिला, लेकिन ठाकुर जाति के डाकू श्रीराम और लाला राम ने विक्रम की हत्या कर दी और फूलन को बंधक बना लिया। 21 दिनों तक फूलन के साथ लगातार गैंगरेप हुआ, जिसने उसकी जिंदगी नर्क में बदल गई।
बेहमई हत्याकांड (1981)
इस अमानवीय अत्याचार के बाद, फूलन ने बदला लेने की ठानी। 14 फरवरी 1981 को फूलन देवी ने अपने गैंग के साथ उत्तर प्रदेश के बेहमई गांव में हमला किया। उसने ठाकुर जाति के 22 लोगों को एक लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून डाला। यह घटना देशभर में 'बेहमई कांड' के नाम से प्रसिद्ध हुई और इसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इसके बाद, फूलन देवी का नाम पूरे देश में गूंजने लगा।
कैसे किया आत्मसमर्पण? गवाह बने 15 हजार लोग
1983 में फूलन देवी ने तत्कालीन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने समर्पण किया। उसने कुछ शर्तें रखीं, जिनमें यूपी पुलिस के हवाले न किए जाने और फांसी न देने की मांग शामिल थी। 15 हजार लोगों की भीड़ ने उसके आत्मसमर्पण को देखा, जिससे वे और भी चर्चित हो गईं।
Phoolan Devi MP Journey: कैसे बनीं सांसद?
11 साल जेल में रहने के बाद 1994 में उन्हें समाजवादी पार्टी की सरकार ने रिहा कर दिया। 1996 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर मिर्जापुर से चुनाव लड़ा और लोकसभा सांसद बनीं। हालांकि, उनके सांसद बनने पर काफी विवाद भी हुआ, क्योंकि लोग एक पूर्व डाकू को राजनीति में देख हैरान थे।
Phoolan Devi Murder: कैसे हुई हत्या?
25 जुलाई 2001 को शेर सिंह राणा नामक व्यक्ति ने दिल्ली में उनके सरकारी बंगले के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी। शेर सिंह राणा ने दावा किया कि उसने ठाकुरों की हत्या का बदला लिया है। उसकी हत्या के बाद पूरे देश में हंगामा मच गया और फूलन देवी का जीवन हमेशा के लिए रहस्यमयी बन गया।
फूलन देवी पर बनी फिल्में
1994 में शेखर कपूर ने 'बैंडिट क्वीन' फिल्म बनाई, जिसमें सीमा बिस्वास ने फूलन देवी की भूमिका निभाई थी। यह फिल्म विवादों में घिरी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब सराही गई।
फूलन देवी की कहानी केवल एक डाकू की नहीं, बल्कि एक औरत के संघर्ष, बदले और राजनीतिक सफर की दास्तान है। समाज ने उनके साथ अन्याय किया, जिसका बदला उन्होंने अपने तरीके से लिया। उसके जीवन पर कई किताबें और फिल्में बनीं, लेकिन उनका सफर आज भी रहस्यमयी बना हुआ है। फूलन देवी डाकू थीं या पीड़िता? यह सवाल आज भी लोगों के मन में बना हुआ है। आपका इस बारे में क्या विचार है?












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