यूपी चुनाव: दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी ने किया बीएसपी को समर्थन देने का ऐलान
दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी ने मायावती की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया है। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।
नई दिल्ली। यूपी विधानसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान से ठीक पहले दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने बहुजन समाज पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया है। अहमद बुखारी ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए उन पर वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है। पिछले विधानसभा चुनाव में इमाम अहमद बुखारी समाजवादी पार्टी के साथ थे, लेकिन इस बार उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के साथ जाने का ऐलान किया है।

मायावती ने यूपी चुनाव में 99 मुस्लिम उम्मीदवारों को दिया है टिकट
यूपी चुनाव मुस्लिम वोटरों पर सभी सियासी दलों की नजरें होती हैं। प्रदेश में करीब 20 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं, इसी आंकड़े को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी ने इस बार रिकॉर्ड 99 मुस्लिम उम्मीदवारों चुनाव मैदान में उतारा है। समाजवादी पार्टी में घमासान के दौरान ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुस्लिम वोटबैंक को अपने खाते में लाने की कवायद शुरू कर दी थी, जिसका असर भी नजर आने लगा है। एक दिन पहले ही राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने बहुजन समाज पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया। अब दिल्ली जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अहमद बुखारी ने मायावती की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया है। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुस्लिम मतदाता समाजवादी पार्टी को छोड़कर नए राजनीतिक विकल्प को तलाश रहे हैं। अहमद बुखारी ने बीएसपी को समर्थन देने का ऐलान करते हुए मुस्लिम वोटरों को चेताया कि सभी सियासी दल उनको अपने फायदे के लिए एक फुटबॉल की तरह इस्तेमाल करेंगे।
दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने पिछले चुनाव में मुस्लिमों के लिए कई वादे किए थे लेकिन उन्होंने कोई भी कदम नहीं उठाया। सपा सरकार में मुस्लिम समुदाय को अन्याय और बेरोजगारी का ही सामना करना पड़ा। बता दें कि साल 2012 के विधानसभा चुनाव में अहमद बुखारी ने समाजवादी पार्टी का समर्थन किया था। उस समय समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में आई लेकिन अहमद बुखारी के दामाद उमर अली खान चुनाव हार गए। बाद में समाजवादी पार्टी ने अपने कोटे से उमर अली खान को एमएलसी भी बनवाया, बावजूद इसके समाजवादी पार्टी और शाही इमाम अहमद बुखारी के बीच दूरियां बढ़ती चली गई। आखिरकार उन्होंने समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर मायावती की पार्टी का समर्थन करने का ऐलान कर दिया।












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