...तो क्या MP अवधेश के गढ़ से ही लोकसभा चुनाव का बदला लेने तैयारी! अयोध्या की मिल्कीपुर क्यों बनी हॉट सीट?
UP Vidhan Sabha By Election 2024:17वीं लोकसभा के गठन के साथ रिक्त हुई कई विधानसभा सीटों पर फिर से चुनाव कराए जा रहे हैं। इनमें कुछ ऐसी सीटें हैं, जो भारतीय जनता पार्टी की साख का सवाल बन गई हैं। इस बीच चर्चा मिल्कीपुर निर्वाचन क्षेत्र की सबसे अधिक है, जहां से विधायक रहे दिग्गज सपा नेता व आईएनडीआईए प्रत्याशी अवधेश प्रसाद के हाथों लोकसभा चुनाव में अयोध्या से भाजपा सांसद रहे लल्लू सिंह अपनी सीट नहीं बचा पाए।
लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी का प्रदर्शन 2019 में हुए लोकसभा चुनाव की तुलना में बेहद खराब रहा। भारतीय जनता पार्टी को कुछ ऐसे क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा जहां, सिर्फ यूपी सरकार ही नहीं, केंद्र ने विकास को प्राथमकिता पर रखा। अयोध्या ऐसी ही लोकसभा सीट हैं, केंद्र और प्रदेश सरकार कई प्रोजेक्ट पिछले पांच वर्षों के भीतर पूरे हुए, और कई प्रोजेक्ट्स पर काम भी चल रहा है। लेकिन लोकसभा में फैजाबाद संसदीय सीट पर हार भी बीजेपी यूं ही नहीं पचा पा रही है। ऐसे में मिल्कीपुर सीट पर कड़े मुकाबले की तैयारी है।

पिछले दिनों यूपी दिग्गज नेताओं के दौरे ये साबित करने के लिए काफी हैं, कि सपा सांसद अवधेश प्रसाद का गढ़ माना जाने वाला मिल्कीपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र अयोध्या में एनडीआए और आईएनडीआईए के लिए कितनी अहमियत रखता है। इस बार मिल्कीपुर का उपचुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि ये क्षेत्र 9 बार के विधायक रहे सपा नेता अवधेश प्रसाद का गढ़ माना जाता है। हालांकि 2019 के चुनाव में उन्हें बीजेपी प्रत्याशी रहे बाबा गोरखनाथ के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस बार हौसले बुलंद हैं, क्योंकि अब सांसद बनने के बाद उनकी पकड़ अयोध्या की पांचों विधासभा सीटों है।
मिल्कीपुर सीट हॉट सीट क्यों?
अयोध्या से हार का बदला लेने का बीजेपी के पास उपचुनाव अच्छा मौका है। चुनौती भाजपा अवधेश प्रसाद के गढ़ मिल्कीपुर से ही देने के लिए मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। बीजेपी सूत्रों की मानें तो मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा को जीत दिलाने की जिम्मा सीएम योगी खुद उठा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सपा सांसद अवधेश प्रसाद के सामने पार्टी के जीत के क्रम को बरकरार रखने की चुनौती भी है। ऐसे में यह बात तय है कि अयोध्या में भाजपा और सपा के बीच एक बार फिर से मिल्कीपुर सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
मिल्कीपुर विधानसभा सीट का इतिहास
आजादी से अब तक के इतिहास में मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर में यह तीसरा उपचुनाव है। यह विधानसभा क्षेत्र 2008 में परिसीमन के बाद से ही अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हुआ, जबकि इससे पहले ये सीट सामान्य होती थी। मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र 1967 में वजूद में आया। इससे पहले ये क्षेत्र बीकापुर में शामिल था। इसके बाद यहां कांग्रेस, जनसंघ और सीपीआई, बीजेपी, बसपा और सपा यहां जीत हासिल करने में कामयाब रहीं। इस सीट पर सबसे ज्यादा सपा-लेफ्ट 4-4 बार जीतने में सफल रही। बात विधानसभा चुनावों की करें तो इस सीट पर कांग्रेस तीन बार, बीजेपी दो बार, जनसंघ और बसपा एक-एक बार जीतने में सफल रही है।
मिल्कीपुर में कब-कब उपचुनाव
मिल्कीपुर विधानसभा सीट 1967 में बनने के बाद से लेकर अभी तक दो बार उपचुनाव हुए हैं। अब 2024 में यहां तीसरी बार चुनाव होने जा रहा है। इससे पहले इस क्षेत्र से कद्दावर नेता मित्रसेन यादव विधायक हुआ करते थे,वो लेफ्ट से लेकर सपा तक के टिकट पर विधायक बने। मित्रसेन यादव वर्ष 1989 में सीपीआई से पहली बार लोकसभा पहुंचे थे और दूसरी बार 1998 में सपा से विधायक रहते हुए उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता था।
2008 से मिल्कीपर रिजर्व सीट
साल 2008 के परिसीमन के बाद मिल्कीपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के दिग्गज नेता अवधेश प्रसाद यादव ने इसे अपनी कर्मभूमि बनाया। 2012 में मिल्कीपुर से अवधेश प्रसाद विधायक बने, लेकिन 2017 का चुनाव हार गए। 2022 में दोबारा से मिल्कीपुर सीट से अवधेश प्रसाद विधायक बने, लेकिन अब दो साल के बाद 2024 के चुनाव में फैजाबाद से सांसद चुने जाने के बाद यह सीट रिक्त हो गई ह।
मिल्कीपुर में उपचुनाव का ट्रेंड
मिल्कीपुर सीट से विधायक रहते हुए लोकसभा पहुंचने वाले मित्रसेन यादव पहले और अवधेश प्रसाद दूसरे नेता हैं। मिल्कीपुर में पहली बार वर्ष 1998 में विधानसभा का उपचुनाव हुआ था, जब मित्रसेन यादव सपा से विधायक रहते हुए लोकसभा सांसद बने थे। बाद में उपचुनावहुए तो सपा के रामचंद्र यादव विधायक चुने गए। तब भाजपा के प्रत्याशी डॉ. बृजभूषण मणि त्रिपाठी को 4132 वोटों से हराया था।












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