उन्नाव: कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग पर पटरी चटकी, ट्रेन रोकने पर यात्रियों का बवाल
अल्ट्रा-सोनिक मशीन द्वारा लखनऊ-कानपुर रेल मार्ग पर पटरियों का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के बाद खतरनाक पटरी वाले स्थान पर लाल निशान लगाया गया और विभाग को इस बात की जानकारी दे दी गई थी।
उन्नाव। एक बार फिर लखनऊ-कानपुर रेल मार्ग उस समय चर्चा में आ गया जब कानपुर से उन्नाव होते हुए लखनऊ जा रही एलकेएम ट्रेन को सोनिक रेलवे स्टेशन पर पटरी चटकने की खबर के साथ रोक दिया। उन्नाव से गए पीडब्ल्यूआई और गैंगमैनों ने घंटों मशक्कत के बाद पटरी को दुरुस्त किया। वहीं, सोनिक रेल्वे स्टेशन पर यात्रियों ने हंगामा कर दिया। यात्रियों का कहना था कि उन्हें समय से नौकरी पर पहुंचना है और स्टेशन मास्टर उचित जानकारी नहीं दे रहे हैं। इस बीच पत्थरबाजी की भी घटना सामने आई। जिसमें कई यात्रियों को चोटें भी आई। आरपीएफ थानाध्यक्ष ने बताया कि यात्री और रेलवे की तरफ से उन्हें किसी प्रकार की लिखित शिकायत नहीं मिली है और न ही किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की गई है। ये भी पढ़ें:1 अप्रैल से बिना आईडी प्रूफ के नहीं कर पाएंगे ट्रेन में सफर,देना होगा जुर्माना

बीते सप्ताह भी हुआ था यही हादसा
बता दें कि बीते सप्ताह भी सोनिक रेलवे स्टेशन के निकट पटरी चटकने की घटना के बाद डाउन लाइन पर आवागमन बाधित कर दिया गया था। रोज-रोज पटरी चटकने की घटनाओं से रेल विभाग कोई सबक नहीं ले रहा है। सूत्रों के अनुसार अल्ट्रा सोनिक मशीन द्वारा लखनऊ-कानपुर रेल मार्ग पर पटरियों का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के बाद खतरनाक पटरी वाले स्थान पर लाल निशान लगाया गया और विभाग को इस बात की जानकारी दे दी गई थी।

बरती गई बड़ी लापरवाही
लेकिन सूचना के बाद भी लाल स्थानों पर सपोर्ट या गुटखा नहीं लगाया गया और यदि लगाया भी गया तो केवल खानापूर्ती ही की गई। आरपीएफ के थानाध्यक्ष ने बताया कि सोनिक रेलवे स्टेशन पर यात्री और स्टेशन मास्टर के बीच बहस हुई थी। लेकिन उन्हें किसी प्रकार का शिकायती पत्र नहीं मिला और ना ही कोई कानूनी कार्रवाई की गई। वहीं, 100 नंबर पर सूचना मिलने पर मौके पर स्थानीय थाना पुलिस भी पहुंच गई।

हादसों से रेल कर्मचारी नहीं ले रहे सबक
लखनऊ-कानपुर रेल मार्ग पर आए दिन हादसा हो रहे हैं। जिससे सरकारी संपत्ति को करोड़ों का नुकसान भी हो रहा है। विगत दिनों उन्नाव कानपुर के बीच मालगाड़ी के डीरेल होने से कई दिन तक आवागमन बाधित रहा। वहीं, इस ताजा मामले में गैंगमैन द्वारा यदि सतर्कता न बरती जाती तो बड़ा हादसा सामने आता। ऐसे में कहा जा सकता है कि रेलवे विभाग के संबंधित जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी हादसों से कोई सबक नहीं ले रहे हैं। कर्मचारियों का रेलयात्रियों के प्रति व्यवहार भी गैर जिम्मेदाराना होता है। अधिकारीगण यात्रियों को अस्पष्ट नहीं बता पाते हैं कि रेलों का संचालन कितनी देर में शुरू हो जाएगा। जिससे यात्री अन्य यातायात के संसाधनों का प्रयोग कर समय से नौकरी पर पहुंच सके।अंत्योदय और हमसफर: बिना रिजर्वेशन शताब्दी के सफर सा मजा, जानिए खासियतें












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