उन्नाव गैंगरेप: विधायक की तानाशाही से लेकर पुलिस की लापरवाही तक, जानिए पूरी कहानी
उन्नाव। उन्नाव में हुई गैंगरेप की घटना और उसके बाद पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत ने सबको हिलाकर रख दिया है। ये मामला देखते ही देखते राष्ट्रीय स्तर का बन चुका है। इस घटना के कई पहलू सामने आए और कहानी में नए-नए किरदार जुड़ते ही जा रहे हैं। प्रदेश सरकार इस मामले के सामने आने के बाद बैकफुट में आ गई है। मौत के बाद मामले में सतर्कता दिखाते हुए प्रशासन ने एसआईटी गठित कर दी जो मामले की जांच कर रही है। पीड़िता के परिवार वालों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई है। जैसे जैसे दिन बीत रहा है मामले में नए-नए खुलासे भी हो रहे हैं। इस रिपोर्ट में जानिए वो शुरू से लेकर अंत तक वो सब जो कहीं न कहीं आप जानने से चूक गए।

कहां से हुई शुरुआत
उन्नाव गैंगरेप से चर्चा में आए भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के ऊपर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता के साथ बलात्कार किया और पैरवी कर हहे उसके पिता को रास्ते से हटा दिया। घटनाक्रम की शुरुआत होती है बीते वर्ष 4 जून 2017 से जब पड़ोस की एक महिला कथित तौर पर पीड़िता को बहला-फुसलाकर विधायक आवास ले गई थी। बतौर पीड़िता यहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। उक्त घटना के बाद पीड़िता डरी-सहमी और खामोश रहने लगी। इसके बाद विगत 11 जून को 2017 को पीड़िता अचानक गायब हो गई। जिसे परिजनों ने खोजने का प्रयास किया। परंतु उन्हें सफलता नहीं मिली। इस संबंध में परिजनों ने मांखी थाना में तहरीर देते हुए न्याय की गुहार लगाई। परंतु कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़ित परिवार को थाना से चलता कर दिया।

गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए भी दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी
विगत वर्ष 20 जून को मांखी थाना पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की। इसके साथ ही मांखी थाना पुलिस ने पीड़िता की औरैया जनपद से बरामदगी दिखाते हुए सबके सामने ले आई। जहां उन्होंने 2 दिन बाद 22 जून को पुलिस ने पीड़िता का 161 (पुलिस अभिरक्षा में) का बयान दर्ज किया। परिजनों ने बताया कि इसके बाद भी पीड़िता को उनके परिजनों को नहीं सौंपा गया। जिस पर विगत 30 जून 2017 को पीड़ित परिजन पुलिस अधीक्षक से मिलकर अपनी आपबीती सुनाई और पीड़िता को वापस कराने की गुहार लगाई। पुलिस अधीक्षक से की गई शिकायत के बाद मांखी थाना पुलिस ने पीड़िता को परिजनों के सुपुर्द किया।

पीड़िता ने दिल्ली में आकर अपनी चाची को सारी जानकारी थी
पीड़िता के चाचा महेश सिंह ने बताया कि 2 जुलाई को पीड़िता दिल्ली आई। जहां उसने अपनी चाची से आपबीती सुनाई। इस संबंध में महेश सिंह ने बताया कि घटनाक्रम की जानकारी उन्हें हुई। इसके बाद उन्होंने इंसाफ के लिए पुलिस अधीक्षक से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत की। परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि 24 फरवरी 2018 को उन्होंने अदालत में 156 (3) के तहत वाद डाला और अदालत से न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि विगत 3 अप्रैल को सुरेंद्र सिंह पुत्र मंगल सिंह निवासी मांखी जो दिल्ली में काम करता था, अदालत की पेशी में शामिल होने के लिए आया। पेशी से वापस जाते समय सुरेंद्र सिंह को विधायक के भाई अपने गुर्गे से पिटवाने के बाद पुलिस को सौंप दिया और धमकी दी कि यदि मुकदमा वापस नहीं लिया तो बुरा अंजाम होगा।

विगत 4 अप्रैल को पेशी से लौट रहे सुरेंद्र सिंह को विधायक भाई के गुर्गों ने की जमकर पिटाई
महेश सिंह ने बताया कि पुलिस ने सुरेंद्र सिंह की गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल लेकर आई। जहां से बीमारी की हालत में उसे जिला कारागार भेज दिया गया। परंतु उपचार की जगह उसे उठाकर जेल में निरुद्ध कर दिया गया। इधर स्थानीय प्रशासन द्वारा न्याय की गुहार का असर होता ना देख दुष्कर्म की पीड़िता अपनी दादी को लेकर लखनऊ पहुंच गई। विगत 8 अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह करने का प्रयास किया। भाजपा विधायक की दबंगई से परेशान पीड़ित परिजनों के आत्मदाह के प्रयास की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। बड़ी संख्या में पुलिस पहुंची और पीड़ित परिवार को न्याय का आश्वासन दिया।

पुलिस कस्टडी में हुई थी सुरेंद्र सिंह की मौत
इधर जेल में निरुद्ध सुरेंद्र सिंह की 8 अप्रैल 18 को तबीयत बिगड़ती है। उसके बाद जेलकर्मी गुलफाम और राजेश यादव ने रात 9:50 मिनट पर सुरेंद्र सिंह को जिला अस्पताल लेकर आए। यहां उसकी 9 अप्रैल 18 को देर रात 3:40 पर सुरेंद्र की मौत हो गई। पुलिस अभिरक्षा में सुरेंद्र सिंह की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। पीड़ित परिजन खुले आम भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उसके भाई अतुल सिंह के साथ अन्य लोगों पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। मृतक भाई महेश सिंह ने बताया कि उसके भाई की जिला जेल में हत्या की गई है। वह पुलिस प्रशासन से बार-बार गुहार लगाते रहे कि गंभीर रूप से घायल सुरेंद्र सिंह को उनके हवाले कर दिया जाए। उसका अच्छा इलाज कराएंगे । लेकिन पुलिस प्रशासन ने उनकी एक नहीं सुनी। अंततः उनके भाई सुरेंद्र सिंह की मौत हो गई।
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