ड्यूटी पर नही जाएंगे ट्रेनी सिपाही, डीजीपी ओपी सिंह ने बताई वजह
लखनऊ। यूपी डीजीपी ओपी सिंह ने सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों और पीएसी के कमांडेंट को एक पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने किसी भी प्रशिक्षु सिपाही की ड्यूटी नहीं लगाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरा होने तक संतरी, मेस और बैरक की ड्यूटी से भी उन्हें मुक्त किया जाए। डीजीपी ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि ट्रेनी सिपाहियों की ड्यूटी लगने से वह सही से अनुशासन नहीं सीख पाते हैं। जिसकी वजह से उनका प्रशिक्षण प्रभावित होता है और इसका अंजाम बाद में आम जनता को भुगतना पड़ता है।

साथ ही उन्होंने प्रशिक्षु सिपाहियों के रहने खाने पर निगरानी करने के लिए भी कहा है। नामित अधिकारी हफ्ते में एक दिन सिपाहियों को खाने और किस तरह से रहने है इसके बारे में भी बताएंगे। डीजीपी ने जोर देकर कहा है कि प्रशिक्षु सिपाहियों को नैतिकता, सामाजिक संवेदना, अपराध पीडि़त, बुद्धिजीवियों, पर्यटकों, असहाय व्यक्तियों की मदद करने तथा थाने में आने वाले आवेदन के निस्तारण और जरूरत पड़ने पर यातायात ड्यूटी करने का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाये। आपदा प्रबंधन, बचाव व राहत कार्य का प्रशिक्षण देने के साथ ही ङ्क्षहसक भीड़ से निपटने और लोगों को समझाने-बुझाने की भी जानकारी दी जाए।
बता दें जहां एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि प्रदेश में अपराध का ग्राफ घटा है तो वहीं दूसरी तरफ हम आपको कुछ ऐसे मामलों से रूबरू कराएंगे जिनकी वजह से न केवल प्रशासन बल्कि शासन में भी हड़कंप मच गया। आपको बता दें इन मामलों में सबसे ज्यादा मामले सिपाहियों के साथ हो रही बदसलूकी के हैं। जी हां इसी बदसलूकी की वजह से कभी किसी अफसर ने तो काफी सिपाही ने आत्महत्या का प्रयास किया। कई मामलों में पुलिस वालों पर ही आरोप लगे तो कइयों में आरोपी अभी भी फरार हैं।
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