UP Nikay Chunav 2023 के नतीजे तय करेंगे राजनीतिक दलों के 2024 की रणनीति की दिशा?
यूपी में 2024 से पहले UP Nikay Chunav 2023 के नतीजे अहम साबित होंगे। सभी दलों की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस चुनाव में किसका डंका बजता है।

UP News: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव के दूसरे चरण का मतदान गुरुवार को समाप्त हो गया। अब शनिवार को मतगणना होनी है। 2024 से पहले सभी दलों की निगाहें निकाय चुनाव के परिणाम पर टिकी हुई हैं क्योंकि कई दल इसे 2024 का सेमीफाइनल बता रहे थे। निकाय चुनाव के नतीजे ती तय करेंगे की आने वाले समय में राजनीतिक दलों की रणनीति किस दिशा में जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनाव के नतीजे चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी संभालने वाले नेताओं के लिए भी अहम साबित होंगे।
राजनीतिक मनोदशा का संकेत देंगे नतीजे
जानकारों की माने तो निकाय चुनाव के परिणाम शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक मनोदशा का भी संकेत देंगे और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले नेताओं की स्थिति के बारे में बड़ा संकेत देंगे। बसपा, कांग्रेस, सपा और आप सभी ने आक्रामक अभियान शुरू किया था। भाजपा ने प्रचार के लिए मंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों को तैनात किया, मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी ने भी पूर्व मंत्रियों और पार्टी के दिग्गजों को चुनाव प्रचार का काम सौंपा, जैसा कि बहुजन समाज पार्टी ने किया था।
राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह ने कहा कि,
लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अभियान में बड़े-बड़े लोगों को तैनात किया गया और उन्हें उन विभिन्न केंद्रों में प्रभारी बनाया जहां चुनाव हुए थे। कई मायनों में यह शहरी इलाकों के लोगों के राजनीतिक मिजाज की भी परीक्षा है। ऐसे उम्मीदवार हैं जो सपा और बसपा जैसे कई दलों के मौजूदा सांसदों के रिश्तेदार हैं। इस अर्थ में आप कह सकते हैं कि परिणाम भी नेताओं की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
सपा-बीजेपी के नेताओं ने की ज्यादा रैलियां
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में रिकॉर्ड संख्या में रैलियां कीं। पहली बार समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव भी शहरी स्थानीय निकाय चुनाव प्रचार में शामिल हुए, सहारनपुर और अलीगढ़ में रोड शो किए और मेट्रो ट्रेन से यात्रा की। लखनऊ में रिवर फ्रंट का दौरा कर अखिलेश ने योगी सरकार पर जमकर हमला बोला था।
मायावती और प्रियंका रहे प्रचार से दूर
वहीं दूसरी ओर बसपा प्रमुख मायावती इस बार नई रणनीति के साथ चुनाव में उतरीं। उन्होंने 17 में से 11 जगहों पर मुस्लिम उम्मीदवारों पर दांव लगाया। बसपा जिसने 2022 के यूपी चुनावों में एक सीट जीती थी इसलिए अबकी बार वह 2024 से पहले नई रणनीति का प्रयोग कर रही है। हालांकि कांग्रेस भी इस बार निकाय चुनाव में उतरी थी लेकिन बड़े नेताओं ने इस चुनाव में प्रचार से दूरी बनाए रखी। खासतौर से प्रियंका गांधी एक बार भी निकाय चुनाव में प्रचार करने नहीं आईं।












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