मायावती ने अंतिम समय पर चली ऐसी चाल, ढह गया सीएम योगी का किला
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नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी ने यूपी की दोनों लोकसभा सीट, गोरखपुर और फूलपुर पर भारी अंतर के साथ जीत दर्ज की है। सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफा देने की वजह से खाली हुई ये दोनों ही सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न थी। 9 फरवरी को चुनाव आयोग ने जब इन दोनों सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की तो भाजपा अपनी जीत को लेकर काफी आश्वसत थी लेकिन चुनाव से ठीक पहले बसपा सुप्रीमो मायावती की एक चाल ने फूलपुर के साथ साथ गोरखपुर में भी सीएम योगी के किले को ध्वस्त कर दिया।

बसपा के चुनाव में हिस्सा नहीं लेने की थी खबर
गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर सबसे पहले 18 फरवरी को समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतारे। सपा के साथ ही कांग्रेस ने भी अपना अलग उम्मीदवार उतारने की घोषणा की। उस वक्त तक ये चर्चा था कि बसपा इन उपचुनावों में हिस्सा नहीं लेगी। ऐसे में भाजपा ने बसपा फैक्टर को उपचुनाव से दूर समझते हुए 19 फरवरी को अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए लेकिन यहीं भाजपा ने गलती कर दी।

ठीक एक हफ्ते पहले मायवती ने खोल पत्ते
मतदान होने से ठीक एक हफ्ते पहले, 4 मार्च को बसपा सुप्रीमो मायवती ने उपचुनाव में सपा के साथ गठबंधन का ऐलान करते हुए अपने वोटरों को सपा उम्मीदवार को वोट डालने के लिए। मायावती के आदेश के साथ ही इन दोनों संसदीय सीट पर बसपा कार्यकर्ता सपा उम्मीदवार की जीत के लिए प्रचार में जुट गए। भाजपा के पास अब इतने कम समय में अपनी रणनीति या उम्मीदवार बदलने का मौका नहीं था। भाजपा ये उम्मीद करती रही है बसपा का वोट सपा उम्मीदवार को न जाए लेकिन मतदान के दिन ही भाजपा की उम्मीदें और सीएम योगी का किला दोनों ध्वस्त हो गया।

केशव प्रसाद ने माना, सपा-बसपा के गठबंधन ने हराया चुनाव
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी सप-बसपा के साथ आने को भाजपा की हार का कारण बताते हुए कहा, 'हमें उम्मीद नहीं थी बहुजन समाज पार्टी का वोट इतनी आसानी से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को ट्रांसफर हो जाएगा। हम अब अंतिम परिणामों का इंतजार कर रहे हैं। इन परिणामों को देखते हुए ही हम अब सपा, बसपा और कांग्रेस के भविष्य में होने वाले संभावित गठबंधन के खिलाफ लड़ने के लिए खुद को तैयार रखेंगे साथ ही 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी की जीत के लिए रणनीति बनाएंगे।'












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