कर्जमाफी की शर्त ने यूपी में किसानों की मुश्किल बढ़ाई

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लखनऊ। यूपी में भारतीय जनता पार्टी किसानों के कर्ज को माफ करने के बड़े वायदे के साथ सत्ता में आई थी, प्रधानमंत्री मोदी ने चुनावी रैलियों में कहा था कि सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट की बैठक में किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। सत्ता में आने के बाद योगी सरकार ने पहली कैबिनेट की बैठक में एक लाख तक के कर्ज वाले किसानों का कर्ज माफ करने का भी ऐलान किया, लेकिन इस कर्जमाफी को लेकर सरकार ने जो शर्ते रखी हैं, उनसे किसानों के लिए नई मुश्किल खड़ी कर दी है।

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भविष्य को लेकर किसान चिंतित

भविष्य को लेकर किसान चिंतित

मथुरा के भुर्जतुला गांव में आलू के किसान खड़ग सिंह ने 2007 डेढ़ लाख रुपए का कर्ज लिया था, लेकिन वह इस कर्ज को चुकाने में विफल रहे हैं, उनका कहना है कि मेरी सरकार से एक ही गुजारिश है कि सरकार मेरी जमीन ले ले और मुझे एक स्थाई नौकरी दे दे। लेकिन यह दर्द सिर्फ मथुरा के गांव के किसान का नहीं है, प्रदेशभर में कई ऐसे किसान हैं जो अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं। जिस तरह से पिछले समय में आलू के दामों में कमी आई है उसने यूपी के किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। ऐसे में तमाम किसान इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि योगी सरकार अपने कर्जमाफी के वायदे को पूरा करे।

क्यो होगा आलू के किसानों का

क्यो होगा आलू के किसानों का

लेकिन खड़ग सिंह जैसे किसानों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनका कर्ज सरकार द्वारा घोषित किए गए आदेश में नहीं आता है, क्योंकि सरकार ने एक लाख रुपए तक का ही कर्ज माफ करने की घोषणा की है। योगी सरकार ने किसानों के एक लाख रुपए तक का कर्ज माफ करने की घोषणा की है, जिसके तहत 36359 करोड़ रुपए तक का कर्ज सरकार की ओर से भरा जाएगा, यह देश के किसी भी राज्य में सबसे बड़ी कर्जमाफी है।

लागत का भी पैसा नहीं मिल रहा बाजार से

लागत का भी पैसा नहीं मिल रहा बाजार से

किसानों में इस बात को लेकर भी गुस्सा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की कर्जमाफी की बात कही थी, लेकिन उस वक्त छोटे और मझले किसानों की बात नहीं कही गई थी। यूपी के एक किसान का कहना है कि हम 50 किलो आलू की पैदावार पर 500-600 रुपए खर्च करते हैं, लेकिन हमें इसकी सिर्फ 200-250 रुपए ही कीमत दी जाती है। इसमें अगर मजदूर, कोल्ड स्टोरेज, भाड़ा आदि जोड़ा जाए तो यह खर्च और बढ़ जाता है। सरकार 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की बात कर रही है, लेकिन हमारे सामने अगले 5-6 महीने तक गुजारा करना मुश्किल हो रहा है।

अधिक पैदावार के बीच नोटबंदी घातक साबित हुई

अधिक पैदावार के बीच नोटबंदी घातक साबित हुई

2016-17 के आकंड़ो के अनुसार आलू की पैदावार में इस वर्ष 7 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि अन्य अनाज में 8.7 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। ऐसे में किसान इस बात की उम्मीद कर रहे थे कि वह अपने नुकसान की इस बार भरपाई कर पाएंगे, लेकिन जिस तरह से गत वर्ष नोटबंदी की गई उसने किसानों की कमर को तोड़कर रख दिया। नोटबंदी के चलते किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।

तीन साल में भी पूरा नहीं हुआ वायदा

तीन साल में भी पूरा नहीं हुआ वायदा

किसान भाजपा सरकार से एक और मांग कर रहे हैं कि वह तीन साल पहले किए गए अपने वायदे को पूरा करे, जिसमें भाजपा ने कहा था कि वह किसानों की खेती में लागत से 50 फीसदी अधिक लागत मूल्य देगी। किसानों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि कर्जमाफी के ऐलान के बाद भी उन्हें लगातार बैंक की ओर से इस बात को लेकर मैसेज आ रहे हैं कि आपने अभी तक बैंक की किश्त नहीं भरी है। किसानों का कहना है कि हम चोर नहीं हैं, हम किसान हैं, लोग बैंक को इसलिए पैसा नहीं दे पा रहे हैं क्योंकि उनके पास पैसा नहीं है, ऐसा नहीं है कि हमने बैंक से पैसा लिया है और उसे लौटाना नहीं चाहते हैं।

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English summary
Terms Yogi government for loan waiver in UP troubles farmers. Farmers are still awaiting the promises to be fulfilled.
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