सुल्तानपुर दलित मर्डर: 15 साल से सुलग रही थी आग, 2 की गई जान

यूपी में सुल्तानपुर जिले के रामनाथपुर गांव में बीते 14-15 जुलाई को हुए जातीय वर्चस्व की लड़ाई में दलित समुदाय के 2 लोगों की जान चली गई थी।

सुल्तानपुर। यूपी में सुल्तानपुर जिले के रामनाथपुर गांव में बीते 14-15 जुलाई को हुए जातीय वर्चस्व की लड़ाई में दलित समुदाय के 2 लोगों की जान चली गई थी। सेमरी चौकी के अन्तर्गत आने वाला यह दलित बाहुल्य गांव डेढ़ दशक से जातीय वर्चस्व की आग में सुलग रहा था। इस बीच आपसी झड़प और मारपीट की अंजाम पाती कई घटनाओं के बाद बीते हफ्ते 2 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है हालांकि मामला गर्म होने के बाद एसपी ने एसएचओ पर निलम्बन की कार्यवाई करते हुए आरोपियों पर गैंगेस्टर लगाने के निर्देश देकर एक बहुत बड़े हादसे को थाम लिया।

पुलिस के हाथ-पांव फूले

पुलिस के हाथ-पांव फूले

शुक्रवार को जयसिंहपुर कोतवाली के सेमरी चौकी अन्तर्गत दलित बाहुल्य गांव में दलित रामजीत के परिवार दबंगों का जो कहर बरपा हुआ था उसमें रामजीत के अस्पताल ले जाते हुए मौत हो गई थी। पत्नी, बेटे और गर्भवती बहू बुरी तरह लहूलुहान हुए थे और ठीक दूसरे दिन गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में शिकायत जरूर दर्ज कर ली लेकिन अगले 24 घंटे तक कोई कार्रवाई नहीं की। गांव में शनिवार देर शाम दलित रामजीत की लाश पहुंचते ही मामला गरमा उठा। परिजन और ग्रामीण लाश के दह संस्कार करने से उस वक़्त तक के लिए इंकार कर दिया के जब तक पुलिस मुकदमें में धाराओं को बढ़ाकर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करती, मृतक के परिवार को मुआवजा नहीं मिलता तब तक वो लाश रखकर बैठे रहेंगे। इसके बाद तो पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर पहुंचे जिला पंचायत सदस्य धर्मेंद्र सिंह ने अधिकारियों के साथ मिलकर परिजनों से लेकर ग्रामीणों तक को बहुत समझाया-बुझाया। तब जाकर दह संस्कार हो सका।

ये है इस गांव की कहानी

ये है इस गांव की कहानी

गौरतलब रहे कि कुल 1700 की आबादी वाले इस गांव में तक़रीबन 40 घर निषाद, 25 घर ब्राहमण, 15 घर यादव, 7 घर क्षत्रिय और सबसे अधिक लगभग 50 घर दलित समुदाय के हैं। डेढ़ दशक पूर्व प्रधानी के चुनाव में लल्ली देवी ने चुनाव में दावेदारी कर दिया था, जिसे देख दूसरी जाति के कुछेक को ये बात अखर गई। फिर क्या था चुनाव से पहले लल्ली के परिवार के साथ मारपीट की गईॉ और पुलिस ने यहीं चूक किया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसके बाद से तो उच्च जाति बनाम छोटी जाति की आग सुलगती रही। पुलिस कभी मुकदमा दर्ज ही नहीं करती और अगर भूल से दर्ज भी कर लेती तो कार्यवाई के नाम पर सुस्त रहती, जो तिल का ताड़ बनता गया।

ऐसे हुई घटना

ऐसे हुई घटना

परिजनों और ग्रामीणों की मानें तो शुक्रवार को हुए इस तांडव की शुरुआत 9 जुलाई को तब शुरु हुई जब मृतक रामजीत का पुत्र मनजीत डीजल लेने के लिए मार्केट निकला था। जहां रास्ते में राकेश उपाध्याय आदि ने उससे मारपीट कर रुपए लूटे थे। घटना के बाद पीडित सेमरी चौकी पहुंचा तो उसे कोतवाली भेज दिया गया। अभी नए-नए कोतवाली इंचार्ज बने निर्भय सिंह ने पीडित को न्याय देने के बजाए फटकार लगाकर भगा दिया। यहां से आरोपियों के हौंसले बुलंद हो गए, ठीक 3 दिन बाद आरोपी रामनाथ पुर की दलित बस्ती में पहुंचे। आरोप है कि यहां राकेश उपाध्याय आदि ने एक दलित महिला से छेड़छाड़ किया। इस घटना की शिकायत लेकर जब पीडित कोतवाली पहुंचे तो पुलिस ने सुना अनसुना कर दिया। पुलिस द्वारा एफआईआर न दर्ज करने से आक्रोशित दलित समुदाय ने उसी दिन शाम राकेश उपाध्याय को पिटाई की। इस घटना के बाद शुक्रवार को आरोपी गिरोह के साथ रामजीत के घर पर आ धमके। लाठी-डंडों से लैस इन आरोपियों ने गर्भवती महिला तक को नहीं बख्शा। रामजीत के साथ गर्भस्थ शिशु की भी जान चली गई।

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