शिक्षक दिवस विशेष: इस शिक्षक को अपने मां-बाप से भी ज्यादा प्यार करती हैं छात्राएं, जानें क्यों
बरेली। उत्तर प्रदेश में भले ही शिक्षा का स्तर गिर रहा हो लेकिन आज भी ऐसे कई शिक्षक हैं जिनको समाज में एक उदाहरण के तौर पर देखा जाता है। ऐसी ही एक टीचर हैं डी के गर्ल्स इंटर कॉलेज की रिटायर्ड स्पॉट टीचर जयंती बनर्जी। जयंती बनर्जी को स्कूल स्टाफ और बच्चों के बीच उनके नाम से कम दीदी के नाम से ज्यादा जाना जाता है। जयंती के बारे में कहा जाता है कि जयंती बच्चों के बीच कॉउंसलिंग के तौर पर काम करती हैं।

यही वजह है कि छात्राओं की मां जब अपने बच्चियों को कोई बात नहीं समझा पाती हैं तो वे दीदी के पास आती हैं और बच्चों को समझाने के लिए कहती हैं। जयंती हमेशा बच्चों और पेरेंट्स के बीच कड़ी का काम करती हैं। जयंती दीदी से जुड़े लोग बताते हैं कि जयंती हमेशा बच्चों की मदद करने के लिए तैयार रहती हैं। जब स्कूल की गरीब लड़कियां स्कूल फीस नहीं दे पाती थीं, तब जयंती ने पांच निर्धन बच्चियों की फीस खुद अपने पास से जमा किया था। जयंती दीदी के कुछ छात्राएं बताती हैं कि जयंती दीदी से उनका संबंध एक दिन का नहीं है। दीदी आज भी उन्हें अपनी बेटी की तरह प्यार करती हैं। दीदी उनके साथ-साथ उनके पति को भी बराबर सम्मान देती हैं जैसे एक दामाद को अपने सुसराल में सम्मान मिलता है।
जयंती दीदी की कई छात्राएं नेशनल और स्टेट लेवल पर खेलने के साथ मेडल भी जीत चुकी हैं। जयंती दीदी की कुछ लोकप्रियता ऐसी है कि छात्राएं उनकी छड़ी से पिटाई होने को अपना सौभाग्य मानती हैं। जयंती कहती हैं कि उन्होंने हमेशा अपने स्टूडेंट को अपने परिवार का हिस्सा माना है। जब भी उनके स्टूडेंट को जैसी भी जरूरत होती है वह उसके लिए तैयार रहती हैं। सबसे पहले उन्होंने ही निर्धन कन्याओं की मदद करने की परंपरा शुरू की थी। वहीं दीदी ने स्कूल में गरीब छात्राओं के लिए जूता बैंक भी बनवाया है। जयंती को द्रौपदी इंटर कॉलेज से रिटायर हुए तीन साल से ज्यादा का समय गुजर चुका है लेकिन वह पहले की तरह सप्ताह में कॉलेज के लिए दो तीन दिन का समय निकाल ही लेती है। जयंती दीदी संगीत पर भी पकड़ रखती हैं। यही वजह है कि वह बच्चों को लोकसंगीत में रुचि लेने का सुझाव देती हैं। कॉलेज से रिटायर्ड होने के बावजूद जयंती दीदी का समर्पण तमाम टीचरों के लिए एक मिसाल है।












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