Mukhtar Ansari: मुख्‍तार अंसारी की मूंछो पर ताव देकर बेटे उमर ने दी अब्बा को अंतिम विदाई, देखें फोटो

Mukhtar Ansari last rituals: गैंगस्‍टर से नेता बने मुख्‍तार अंसारी की 28 मार्च को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। मुख्‍तार अंसारी के शव को गाजीपुर में उनके पुश्‍तैनी कालीबाग कब्रिस्‍तान में दफनाया गया हैं। बड़ी-बड़ी मूंछों और दबंग दिखने वाला अतीक अहमद जो कभी अपराध ही नहीं राजनीति की दुनिया का डॉन था वो आज हमेशा के लिए कब्र में दफ्न हो गया।

mukhtar ansari death

मुख्‍तार अंसारी के सुपुर्द-ए-खाक से पहले की कुछ तस्‍वीर समाने आई है जिनमें एक तस्‍वीर जिसने सबका ध्‍यान खींचा है। इस फोटो में मुख्‍तार अंसारी का छोटा बेटा उमर अपने अब्बा की मूंछों पर आखिरी बार ताव देकर उन्‍हें अलविदा करता नजर आ रहा है।

मुख्‍तार अंसारी का जनाज़ा जब उनके पैतृक निवास पहुंचा तो बड़ी संख्‍या में लोगों की भीड़ जुटी लेकिन मुख्‍तार का बड़ा बेटा अब्बास जो जेल में सजा काट रहा है वो नहीं पहुंचा क्‍योंकि उसे हाईकोर्ट से पिता के अंतिम संस्‍कार में जाने की परमीशन नहीं मिली। मुख्‍तार के अंतिम संस्‍कार में उसकी फरार पत्‍नी अफशां अंसारी भी शामिल नहीं हुई।

छोटे बेटे ने अब्बू अतीक के जनाजे़ को दिया कंधा

प्रशासन ने कब्रिस्‍तान में केवल परिवार के लोगों को ही जाने की परमीशन दी थी इसलिए मुख्‍तार के छोटे बेटे उमर ने अपने अब्बा अतीक के जनाज़े को कंधों पर उठाकर नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

मुख्‍तार अंसारी की दिल का दौरा पड़ने के बाद हुई मौत

गौरतलब है कि माफिया डॉन जिसने जेल में रहते हुए राजनीति और लगातार जीतता रहा उस मुख्तार अंसारी की गुरुवार रात बांदा में दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई।

मुख्‍तार की पत्‍नी अफशां की पुलिस कर रही तलाश

बता दें माफिया मुख्‍तार अंसारी की पत्‍नी अफशां अंसारी कथित तौर पर अपने पित के साथ कई अपराधो में शामिल रहीं। यूपी पुलिस फरार चल रही अफशां को लंबे समय से तलाश रही है। उस पर 75 हजार रुपय का पुलिस ने इनाम घोषित किया है।

बड़ा बेटा है विधायक, काट रहा जेल की सजा

वहीं मुख्‍तार अंसारी का बड़ा बेटा अब्बास अंसारी जो गैंगस्‍टर है वो यूपी की सुहेलदेव भारतीय समा पार्टी से मऊ जिले से विधायक है। वहीं मुख्‍तार अंसारी का दूसरा बेटा उमर अंसारी जो 24 साल का है उस पर हेटस्‍पीच का मामला दर्ज है।

मुख्‍तार अंसारी सलाखों के पीछे रहते हुए करता रहा राजनीति

2005 से उत्‍तर प्रदेश और पंजाब में सलाखों के पीछे होने के बावजूद, अंसारी राजनीति से दूर नहीं हुआ क्योंकि उनके परिवार ने हमेशा उनका समर्थन किया और राज्य में उनके राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाया। अतीक का परिवार ही था जिसने उनकी राजनीतिक छवि को कायम रखा। अपने भाइयों और बेटे की मदद से वह जेल से ही अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी करते रह और हर बार जीतता रहा।

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