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कमौरी महादेव: अदृश्य फूलों की सुगंध के लिये मशहूर है औघड़ साधु द्वारा स्थापित 400 साल पुराना मंदिर

By Prashant Srivastava
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    इलाहाबाद। यज्ञ भूमि प्रयाग में हठ योगी और औघड़ साधुओं का खूब बोल बाला रहा है। औघड़ साधुओं की साधना के लिए तो यहां विशेष शिवलिंग ही स्थापित किया गया था। जिसे औघड़ साधना सिद्ध स्थल के रूप में ख्याति प्राप्त है और यहां स्थापित शिवलिंग को कमौरी महादेव के नाम से जाना जाता है। कमोरी महादेव की स्थापना को लेकर मान्यता है कि 400 साल से भी पहले कैलाश पर्वत पर तपस्या करने वाले औघड़ साधू का शिव आदेशानुसार प्रयाग आना हुआ था और उन्होंने ही घनघोर जंगल रहे प्रयाग में ( मौजूदा निरंजन सिनेमा के पास) मिट्टी का शिवलिंग स्थापित किया था जो औघड़ के तप से पत्थर में परिवर्तित होकर सदैव को लिये शिव स्वरूप में विद्यमान हो गया।

    शिवलिंग स्थापना को लेकर मान्यता

    शिवलिंग स्थापना को लेकर मान्यता

    सैकड़ों वर्ष पहले जब प्रयाग पूरी तरह से घनघोर जंगल व वनस्पतियों का केंद्र था। तब तीनों ओर नदियों से घिरा व गंगा, यमुना, सरस्वती का यह मिलन क्षेत्र व आध्यात्मिक स्थल हमेशा से देवताओं व साधु-संतों को अपनी ओर आकर्षित करता रहता था। मान्यता है कि 400 साल से अधिक समय पहले एक औघड़ साधु शिव की आज्ञा अनुसार प्रयाग आए। घनघोर जंगल के बीच उन्होंने मिट्टी से ही शिवलिंग स्थापित किया और वहीं पर अपनी धूनी जमा दी। जंगल के बीच से स्थानीय लोग पगडंडियों के सहारे संगम स्नान के लिए टोलियों में निकलते थे, 1 दिन लोगों ने घनघोर जंगल के बीच औघड़ साधु को शिवलिंग के सामने धूनी जमाए देखा तो इस दिव्य स्थल के बारे में प्रयाग वासियों को जानकारी हो सकी।

    रात में आज भी औघड़ का विश्राम

    रात में आज भी औघड़ का विश्राम

    मान्यता है कि जब लोगों का इस निर्जन वन क्षेत्र में आने जाने का क्रम बढ़ गया और लोग इस दिव्य स्थल पर दर्शन करने के लिए आने लगे तो अचानक रहस्यमय तरीके से वह औघड़ साधु गायब हो गए। औघड़ साधु के बारे में सिर्फ लोगों को इतना पता था कि वह कैलाश पर्वत से आए थे और उसके बाद लोगों ने उन्हें कभी नहीं देखा। जनश्रुति है कि हर रात्रि में औघड़ साधु यहां विश्राम करते हैं और सुबह शिवलिंग के आसपास साफ सफाई और भगवान का सर्वप्रथम पूजन करते हैं । सुबह मंदिर जाने वाले इस बात का हमेशा से दावा करते हैं, लेकिन अब खुली आंखों से कोई भी उस औघड साधु को नहीं देख पाता है।

    बिना फूलों के आती हैं सुगंध

    बिना फूलों के आती हैं सुगंध

    इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को उसी औघड़ साधु के नाम पर कमौरी महादेव के रूप में प्रसिद्धि मिली है। अब इस जगह पर एक सुंदर मंदिर बन चुका हैं। बेहद ही शांत वातावरण में आश्चर्यजनक तरीके से यहां विभिन्न फूलों की सुगंध की अनुभूति होती है। लेकिन, यहां न फूलों का स्रोत कहां है, आज तक कोई नहीं जान पाया है। यहां आसपास न फूलों की बाग है ना कुछ ऐसा जिसे फूलों की महक का कारण बताया जा सके। लोग इसे चमत्कार मानते हैं और यह इसकी ख्याति को चार चांद लगाता है। कमौरी महादेव के दर्शन के लिए देश विदेश से लोग आते हैं। प्रत्येक वर्ष में कई कार्यक्रम कमौरी महादेव परिसर में मनाए जाते हैं।

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    English summary
    sawan special know all about kamauri mahadev temple in allahabad

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