Sanjay Singh: यूपी की सड़कों पर उतरे संजय सिंह, रामपुर से अमरोहा तक 'वोट बचाओ, संविधान बचाओ' यात्रा
Sanjay Singh: उत्तर प्रदेश की कड़ाके की ठंड और सुबह के घने कोहरे के बीच आज रामपुर की सड़कों पर एक अलग ही राजनीतिक गर्मी देखने को मिली। आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक बार फिर संसद की आलीशान कुर्सियों को छोड़ जनता के बीच सड़कों का रास्ता चुना है। मौका है उनकी दूसरी बड़ी पदयात्रा का, जिसे नाम दिया गया है- "वोट बचाओ, संविधान बचाओ"।
सैकड़ों समर्थकों के जोश के बीच शुरू हुई यह यात्रा केवल एक पैदल मार्च नहीं है, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी मिजाज को बदलने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है। 21 दिसंबर की इस सर्द सुबह से शुरू होकर यह सफर अगले छह दिनों तक जारी रहेगा। संजय सिंह का यह संकल्प रामपुर से शुरू होकर मुरादाबाद की सीमाओं को पार करेगा और 26 दिसंबर को अमरोहा में जाकर संपन्न होगा।

इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि यह 'वोट की चोट' और 'संविधान की गरिमा' जैसे बुनियादी मुद्दों पर आधारित है। संजय सिंह ने पदयात्रा के पहले ही दिन यह साफ कर दिया कि जब लोकतंत्र की बुनियाद यानी जनता के 'वोट' पर ही खतरा मंडराने लगे, तो सड़कों पर उतरना मजबूरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी बन जाता है। इस विस्तृत अभियान के माध्यम से वे गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों को यह समझाना चाहते हैं कि उनका एक वोट न केवल सरकार चुनता है, बल्कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए उनके अधिकारों की रक्षा भी करता है।
6 दिनों में तय होगा रामपुर से अमरोहा का सफर
यह पदयात्रा आज यानी 21 दिसंबर से शुरू होकर 26 दिसंबर तक चलेगी। अगले छह दिनों तक संजय सिंह पैदल चलकर जनता से सीधा संवाद करेंगे। यह सफर रामपुर से शुरू होकर मुरादाबाद के रास्तों से गुजरते हुए अमरोहा में जाकर समाप्त होगा। रास्ते में कई छोटी-बड़ी सभाएं भी होंगी, जहां वे लोगों को उनके अधिकारों के बारे में बताएंगे।
पदयात्रा का कार्यक्रम: 21 से 26 दिसंबर तक।
मुख्य पड़ाव: रामपुर, मुरादाबाद और अमरोहा।
जन-संवाद: रास्ते में छोटी सभाओं और चौपालों के जरिए लोगों से सीधी बातचीत।
आखिर क्यों पड़ी इस यात्रा की जरूरत?
संजय सिंह का गंभीर आरोप है कि आज मतदाता सूची (Voter List) के साथ छेड़छाड़ हो रही है। उनका कहना है कि विपक्ष को कमजोर करने के लिए आम लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब किए जा रहे हैं, जिसे उन्होंने 'वोट की डकैती' का नाम दिया है। इसी 'डकैती' को रोकने और लोगों को जागरूक करने के लिए वे पश्चिमी यूपी के इस अहम बेल्ट में पदयात्रा कर रहे हैं।












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