किसान आंदोलन से पश्चिमी यूपी में RLD को मिली संजीवनी, BSP-BJP के असंतुष्ट नेताओं का ठिकाना बन रही पार्टी
किसान आंदोलन के चलते पश्चिमी यूपी की सियासत ने एक बार फिर से नया मोड़ ले लिया है।
लखनऊ, 25 अगस्त: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में सात महीने ही बचे हैं लेकिन सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं। पश्चिमी यूपी में राकेश टिकैत के किसान आंदोलन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हवा खराब कर रखी है। राकेश टिकैत के पश्चिमी यूपी में सक्रिय होने का लाभ राष्ट्रीय लोकदल को मिलता दिखायी दे रहा है। पश्चिमी यूपी में भाजपा की हालत खराब देखते हुए अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के असंतुष्ट नेता रालोद का रुख कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि किसान आंदोलन की वजह से रालोद की पावर पॉलिटिक्स में इजाफा हुआ है। अब वह अन्य दलों से बारगेनिंग करने की स्थिति में आ गई है।

बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय कृषि कानून को लेकर रालोद के चीफ ने पश्चिमी यूपी के कई जिलों में छोटी छोटी पंचायतें बुलाकर काफी बैठकें की थी। इससे पश्चिमी यूपी में उनको लेकर एक सकारात्क संदेश गया है और पार्टी को लगता है कि अब उसे चुनाव से पहले संजीवनी मिल गई है। पश्चिमी यूपी में जयंत चौधरी अपने इलाकों में भाईचारा सम्मेलनों के जरिए मुस्लिमों और जाटों को एकजुट करने में लगे हुए हैं। रालोद के नेताओं को लगता है कि चुनाव से पहले किसान आंदोलन ने रालोद को एक नई ऊर्जा दी है और इसी का सहारा लेकर वह चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में अपनी बिगड़ी छवि को दोबारा सही कर सकती है।
आरएलडी बनी असंतुष्ट नेताओं का ठिकाना
पश्चिमी उप्र में किसान आंदोलन के चलते आरएलडी की मजबूत होती स्थिति को देखते हुए अब अन्य दलों के नेताओं का भी उनकी तरफ झुकाव होने लगा है। किसान आंदोलन के बाद से ही अब तक लगभग दो दर्जन नेता रालोद में शामिल हो चुके हैं और आने वाले दिनों में अभी और नेताओं के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि कई नेता पंचायत चुनाव में आरएलडी का दामन थामकर चुनाव जीतने में सफल हुए हैं। इसके अलावा पूर्व राज्यसभा सांसद शाहिद सिद्दीकी, बीएसपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव चौधरी मोहम्मद इस्लाम, बसपा के पूर्व विधायक मौलाना जमील और पूर्व सांसद राशिद मसूद के बेटे नोमान मसूद भी रालोद में शामिल हो चुके हैं।

रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी ने वन इंडिया डॉट काम को बताया, 'पार्टी की तरफ से भाईचारा सम्मेलनों का अयोजन किया जा रहा है और साथ ही बीजेपी की नीतियों का पर्दाफाश भी किया जा रहा है। अब तक पार्टी में 12 पूर्व विधायक और पूर्व सांसद शामिल हो चुके हैं। लोग भाजपा की नीतियों से काफी नाराज हैं। पश्चिमी यूपी में इस बार रालोद उनको सबक सिखाएगी। किसानों के साथ जो छल कर रहे हैं उनका भी हिसाब चुकाया जाएगा।'
बीजेपी नेताओं का ठिकाना बनी आरएलडी
किसान आंदोलन से भाजपा की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए कई नेता रालोद में शामिल हो चुके हैं। पार्टी में शामिल होने वालो में बीजेपी प्रदेश युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष रामाशीष राय, बीजेपी नेता डॉ यशवीर सिंह, पश्चिमी यूपी में बीजेपी के क्षेत्रीय अध्यक्ष रहे राजकुमार त्यागी, पूर्व विधायक वीरेंद्र ठाकुर, पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह और आगरा से पूर्व विधायक कालीचरण सुमन ने रालोद का दामन थाम लिया है। इन नेताओं को लगता है कि आने वाले चुनाव में बीजेपी की बजाए आरएलडी ही उनके लिए मुफीद साबित हो सकती है।
रालोद की बारगेनिंग पावर बढ़ेगी
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार किसान आंदोलन ने पश्चिमी यूपी में भाजपा को नई मुसीबत में डाल दिया है। किसान बहुत नाराज हैं उपर से भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के कार्यक्रमों ने भाजपा की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। पश्चिमी उप्र की सियासी राजनीति को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अवनीश त्यागी ने कहा कि,
'आरएलडी का अपना भविष्य ही तय नहीं है। वो अपना ठिकाना हमेशा बदलते रहते हैं इसलिए इन पर नेताओं का भरोसा होगा यह कहना कठिन है। अभी जो नेता शामिल हो रहे हैं वो हमारी समझ से थके हुए लोग हैं। इनका कितना असर पड़ेगा यह तो समय ही बताएगा। जयंत के लिए भी यह परीक्षा की घड़ी है क्योंकि पहली बार वह अपने चेहरे पर मैदान में उतरेंगे।'












Click it and Unblock the Notifications