भव्य होगा अयोध्या श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, रामलला को विशेष भोग, मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास बताई कैसी है तैयारी?
श्री कृष्ण जन्माष्टमी सनातन धर्म में त्योहारों में से एक है। जो कि भगवान विष्णु के आठवें अवतार कृष्ण के जन्म का जश्न मनाता है। यह हिंदू महीने भाद्रव की अष्टमी तिथि को मानाया जाता है। आमतौर पर ये पर्व ग्रगोरियन कैलेंडर के मुताबिक अगस्त महीने में पड़ता है।
इस बार यह पर्व दो दिन मनाया जाएगा। इसको लेकर मथुरा में ही नहीं बल्कि काशी और अयोध्या में भी भव्य तैयारियां की जा रही हैं। भगवान के इस दिन विशेष भोग लगाया जाएगा। रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने भगवान की विशेष पूजा की जानकारी दी है।

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने कहा, "इस बार जन्माष्टमी 2 दिन, 26 और 27 अगस्त को मनाई जाएगी...जन्माष्टमी बड़े भव्य और दिव्य रूप से मनाई जाती है...5 प्रकार की पंजीरी, विभिन्न प्रकार के फल और मिष्ठान का भोग लगता है और पूरे विधि-विधान से पूजा की जाएगी...।"
सनातन धर्म में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस तिथि पर भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था।
बता दें कि कृष्ण जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी. इस दिन घरों में झाकियां सजाई जाती है, भजन-कीर्तन किए जाते हैं. कृष्ण भक्त व्रत कर, बाल गोपाल का भव्य श्रृंगार करते है, रात्रि में 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में कान्हा का जन्म कराया जाता है।
स्वर्गद्वार मंदिर अयोध्या के पंडित कल्कि राम के मुताबिक माखन और मिश्री का भोग लगाना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि प्रभु को माखन मिश्री का भोग अर्पित करने से साधक का जीवन खुशियों से भरा रहता है. इसके अलावा भोग में धनिया की पंजीरी को भी शामिल करना चाहिए। मान्यता है कि धनिया की पंजीरी अर्पित करने से भगवान विष्णु अवतार में प्रसंन्न होते हैं और कृपा करते हैं।












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