राजभाषा सम्मेलन: अमित शाह बोले- मुझे गुजराती से ज्यादा हिंदी पसंद, इस भाषा पर अब कोई विवाद नहीं
नई दिल्ली, 13 नवंबर: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शनिवार को वाराणसी में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने दुनिया भर में हिंदी भाषा को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। गृहमंत्री के मुताबिक लोकतंत्र तभी सफल हो सकता है जब प्रशासन की भाषा स्वभाषा हो। इस विशेष कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे।

अपने संबोधन में शाह ने कहा कि मैं गुजरात से आता हूं, मेरी जुबानी भाषा गुजराती है। वैसे मुझे गुजराती बोलने से परहेज नहीं है, लेकिन मुझे गुजराती से ज्यादा हिंदी पसंद है। इस वक्त देशभर में हिंदी और अन्य स्थानीय भाषाओं के बीच कोई संघर्ष नहीं है। स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के तहत मैं देश के सभी लोगों से एक लक्ष्य को याद करने का आह्वान करना चाहता हूं, वो है स्वभाषा और इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। शाह ने आगे कहा कि हिंदी भाषा को लेकर विवाद पैदा करने की कोशिश की गई थी, लेकिन वो वक्त अब खत्म हो गया है। उन्होंने दुनियाभर में हमारी भाषाओं का प्रचार करने के लिए गर्व के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी श्रेय दिया।
गृहमंत्री के मुताबिक अगर वीर सावरकर नहीं होते, तो आज हम लोग अंग्रेजी पढ़ रहे होते। उन्होंने ही हिंदी शब्दकोश बनाया था। अंग्रेजों ने हम पर अंग्रेजी थोपने की कोशिश की। अब वक्त आ गया है कि जब हमें शब्दकोश पर काम करके इसे और ज्यादा मजबूत बनाना है। शाह ने कहा कि हमने 2019 में ये फैसला लिया था कि अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को राष्ट्रीय राजधानी से बाहर ले जाया जाएगा, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इसमें दिक्कत आ गई। आज मुझे खुशी है कि आजादी के अमृत महोत्सव में ये नई शुभ शुरुआत होने जा रही है।












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