NTPC Blast: हादसे के बाद आधे घंटे तक फंसे थे मजदूर, तड़प-तड़प के निकली थी जान
रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली में NTPC के पॉवर प्लांट में हुए हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है, जबकि 150 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घटना के बाद से परत दर परत इसकी इसकी वजहें सामने आ रही हैं। वो चाहे बॉयलर की जांच में अनियमितता रही हो या फिर चैयरमैन की अनुभवहीनता ये सभी खुद में बड़ें कारण हैं। इससे इतर एक और बड़ी कमी सामने आ रही है जिसने कहीं ना कहीं NTPC ब्लास्ट की पृष्ठभूमि लिखने में अहम भूमिका निभाई है।

चिमनी चोक होने की अनदेखी पड़ी भारी
श्रमिकों के बार-बार कहने पर भी टेक्निकल प्रॉब्लम्स की गई अनदेखी की गई। जिसके परिणाम स्वरूप ये भयंकर हादसा हुआ और सैकड़ो निर्दोष मजदूरों की जिंदगी बर्बाद कर हो गई। प्रत्यक्षदर्शी राकेश जो कि बॉयलर हादसे की जगह से मात्र कुछ दूरी पर ही मौजूद से उन्होंने बताया कि बॉयलर में हादसे के वक़्त वहां हजारो लोग उपस्थित थे, लेकिन उनकी निकासी की कोई भी व्यवस्था नहीं थी। ब्लास्ट के बाद वे सभी यहां फंस कर रह गए और कइयों ने तो वही तड़प-तड़प के दम तोड़ दिया। उसने ये भी बताया कि, हादसे के आधे घंटे बीत जाने के बाद ही NTPC और जिला प्रशासन ने हरकत दिखाई।
बिना सेलो के दिया था बॉयलर को अप्रूवल
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक NTPC में दो महीनें पहले ही इंस्पेक्टर जांच के लिए आया था। इंस्पेक्टर ने सेलो (राख निकासी की जगह ) के बिना ही फिटनेस सर्टिफिकेट दे दिया था। यहां पर सुरक्षा मानकों की जमकर अनदेखी की गई और कर्मचारियों की सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया। बॉयलर को बिना निरीक्षण के ही पास कर दिया गया था।
वहीं केंद्रीय मंत्री आर के सिन्हा के मुताबिक जांच समिति का गठन एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर मिस्टर राय की अध्यक्षता में कर दिया गया है, जो २० दिन में अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे।












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