पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले Shubham Dwivedi की पत्नी से मिले PM मोदी, 8 मिनट में क्या-कुछ हुई बात?
PM Modi Meet Shubham Dwivedi Family: 22 अप्रैल 2025 को जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की वादियों में आतंकी गोलियों की बौछार कर रहे थे, तब कानपुर का लाल शुभम द्विवेदी उन 26 जिंदगियों में से एक था, जो इस हमले में खत्म हो गईं। लेकिन शायद उसकी कहानी वहीं खत्म नहीं हुई... उसकी अंतिम चीखें, उसकी पत्नी ऐशान्या की बेहोशी, और उस खामोशी की गूंज आज भी उसके परिवार की रूह कंपा देती है।
और अब... 47,573 करोड़ की योजनाओं से भरे कानपुर दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब चकेरी एयरपोर्ट पर शुभम के परिवार से मुलाकात की, तो वो पल किसी भी राजनीतिक एजेंडे से परे रहा, जो इंसानियत, संवेदनशीलता और राष्ट्रीय कर्तव्य का उदाहरण बन गया। आइए जानते हैं इन 8 मिनट की मुलाकात में क्या कुछ हुई PM मोदी और शुभम के परिवार के बीच बातचीत...

8 मिनट - आंखों में आंसू, होठों पर संकल्प
- चकेरी एयरपोर्ट के VIP लाउंज में माहौल कुछ अलग था। प्रोटोकॉल के बीच जब प्रधानमंत्री मोदी भीतर आए, तो सामने शुभम की पत्नी ऐशान्या, मां सीमा और पिता संजय द्विवेदी खड़े थे। कोई औपचारिक अभिवादन नहीं... कोई राजनीतिक संवाद नहीं... सिर्फ आंखें नम थीं, और हाथ जोड़कर बस एक ही सवाल - 'शुभम की कुर्बानी का क्या मोल मिलेगा?'
- शुभम के चाचा मनोज द्विवेदी ने बताया कि पीएम मोदी बेहद भावुक हो गए। जब ऐशान्या और शुभम के पिता की आंखों से आंसू निकले, तो पीएम ने उन्हें ढांढस बंधाया। पीएम मोदी ने शुभम के पिता के कंधे पर हाथ रखा, और कहा कि आतंक के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' अब भी जारी है - 'ये रुका नहीं है, और हम रुकने वाले नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि वो भविष्य में भी परिवार से मिलते रहेंगे और उनका ख्याल रखा जाएगा। उधर, शुभम की मां सीमा के कांपते होंठ कुछ कह नहीं सके।
- शुभम की पत्नी ऐशान्या ने बाद में बताया कि पीएम खुद इस हमले से बहुत दुखी हैं और उन्होंने परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। उस पल ऐशान्या की आंखों से आंसू गिर पड़े। शुभम की पत्नी ऐशान्या ने बताया कि उन्होंने पीएम से कहा- 'मुझे ऐसा लगता है कि हिंदू-मुस्लिम को अलग करना चाहते थे। इसीलिए आतंकियों ने धर्म पूछकर मारा। हो सकता है कि कश्मीर में चीजें सुधर रही थी, शायद इसलिए आए थे। ऐशान्या ने बताया कि पीएम मोदी ने मरी बातों को सुना और समझा। पीएम ने मुझसे जवाब में कहा कि हमें भी यही लगता है कि हमले के पीछे यही वजहें थीं। '
Who is Eshanya: कौन है ऐशान्या? वो जिसकी मांग का सिंदूर आतंकियों ने छीन लिया
12 फरवरी 2025 - शुभम और ऐशान्या की शादी हुई थी। नई जिंदगी के सपने संजोकर दोनों पहलगाम घूमने निकले थे। लेकिन 22 अप्रैल को ऐशान्या की आंखों के सामने उसका सुहाग उजड़ गया। आतंकियों ने शुभम के सिर में गोली मार दी। दोनों अपने हनीमून पर कश्मीर की बैसरन वैली में गए थे। वो हाथ जोड़कर आतंकियों से अपने पति की जान की भीख मांगती रही, लेकिन वो दहशतगर्द नहीं पसीजे। शुभम की मौत के बाद ऐशान्या वहीं बेहोश हो गई थी।
Who was Shubham Dwivedi:कौन थे शुभम द्विवेदी?
शुभम कानपुर के श्याम नगर स्थित ड्रीमलैंड अपार्टमेंट में रहते थे। वह अपने परिवार का इकलौता बेटा और सीमेंट बिजनेस की तीसरी पीढ़ी से थे। पढ़ाई के बाद उन्होंने एमबीए किया और अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। 12 फरवरी 2025 को ही उनकी शादी यशोदा नगर की ऐशान्या से हुई थी।
'ऑपरेशन सिंदूर' सिर्फ जवाब नहीं, अब इरादा है...
प्रधानमंत्री ने शुभम के परिवार से जाते-जाते दो बातें कही -
1. 'ऑपरेशन सिंदूर अभी रुका नहीं है, आगे बढ़ेगा।'
2. 'मैं आपका दर्द भूलने नहीं दूंगा, देश को भी नहीं भूलने दूंगा।'
ये 8 मिनट सिर्फ मुलाकात नहीं थे... ये राष्ट्र के जख्म पर एक मरहम थे।
शुभम जैसे लाखों जवानों और लोगों की कहानियां अक्सर आंकड़ों में खो जाती हैं। लेकिन, जब प्रधानमंत्री खुद उनके परिवार के सामने खड़े होकर आंखों में आंसू लिए कहें - 'मैं तुम्हारे बेटे को नहीं भूला हूं', तो शायद ये भरोसा फिर से लौट आता है - कि देश को अपने सपूतों की क़द्र है। शुभम अब केवल एक नाम नहीं... एक प्रतीक है - उस सच्चे भारतवासी का, जो अपनी नई दुल्हन के साथ नहीं, अपने वतन के लिए मर मिटा।












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