डैमेज कंट्रोल के लिए संगठन और सरकार को बहाना पड़ेगा पसीना, MP-MLA को विवादित बयानों से दूर रहने की नसीहत
लखनऊ, 05 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले किसान आंदोलन की सियासत एक बार फिर नया मोड़ लेती जा रही है। लखीमपुर खीरी में हुए बवाल के बाद अब सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या राजनीतिक दलों को चुनाव से पहले ऑक्सीजन मिल गई है। राजनीतिक विश्लेषक की मानें तो यूपी में दम तोड़ते विपक्ष को नई संजीवनी जरूर मिल गई है क्योंकि अब वो इसके सहारे पैर पसारने में जुट गए हैं। बीजेपी के सूत्रों का दावा है कि भाजपा की यूपी ईकाई और आरएसएस ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। स्पष्टीकरण आने के बाद पार्टी उनके खिलाफ कड़ा कदम उठा सकती है। यह भी आश्चर्य नहीं की मोदी कैबिनेट से उनकी जगह भी छिन जाए।

लखीमपुर की घटना के बाद भाजपा भले ही अपने आप को सामान्य दिखाने की कोशिश कर रही है लेकिन लखीमपुर खीरी कांड में बीजेपी की चिंता और चुनौती दोनों को बढ़ा दिया है। सरकार ने इस मामले में भले ही तत्परता दिखाते हुए पीड़ितों को मुआवजे का एलान कर दिया है लेकिन लखीमपुर के घटना ने समूचे विपक्ष को बैठे बिठाए एक मुद्दा ज़रूर दे दिया है।
बीजेपी के एक प्रदेश महासचिव कहते हैं कि,
''लखीमपुर खीरी की घटना ने संगठन और सरकार दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। बाहर से तो सब सामान्य दिखाई दे रहा है लेकिन अंदर खाने इस घटना को लेकर संगठन काफी गंभीर बना हुआ है। घटना का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश अध्यक्ष ने खुद भी इस मामले को लेकर अजय मिश्रा से बात की है और पूरा मामला समझने का प्रयास किया है। साथ ही उन्हें भविष्य में इस तरह की चूक न दोहराने की हिदायत दी गई है।''

बीजेपी को डर है की आंदोलन सेंट्रल यूपी तक न पहुंच जाए
भाजपा के सूत्रों का दावा है कि इस घटना को लेकर संगठन के साथ ही संघ भी बहुत नाराज है। बताया जा रहा है की संघ पिछले कई महीने से इस कोशिश में लगा है की महामारी के दौरान सरकार की ओर से बरती गई लापरवाही के बाद जनता के मन में सरकार को लेकर काफी गुस्सा था। इसको कम करने के लिए संगठन और सरकार के स्तर पर काफी काम हो रहा है। लेकिन नेताओं की चूक और बड़बोलापन सरकार पर भारी पड़ रहा है। इसको लेकर संघ की तरफ से पार्टी के नेताओं को शख्त हिस्यत दी गई है की इस तरह की लापरवाही बिलकुल बर्दास्त नही की जाएगी।

अजय मिश्रा से स्पष्टीकरण मांगेगी पार्टी, हो सकती है कार्रवाई
बीजेपी सूत्रों की माने तो लखीमपुर कांड के बाद से ही बीजेपी के साथ ही साफ भी मिश्र से काफी नाराज है। लखीमपुर कांड की रिपोर्ट पार्टी जल्द ही बीजेपी आला कमान को भेजेगी और उसके बाद अजय मिश्रा के खिलाफ कदम उठाया जाएगा। हालांकि अजय मिश्र अपनी तरफ से लगातार सफाई दे रहे हैं कि घटना में उनकी और उनके बेटे की संलिप्तता नहीं है लेकिन उनकी एक चूक की वजह से पार्टी की परेशानियां बढ़ गई है।
सभी सांसदों और विधायकों को पत्र जारी करेगी बीजेपी
बीजेपी सूत्रों की माने तो लखीमपुर खीरी कांड के बाद से ही संगठन भी हरकत में आ गया है। अगले साल होने वाले चुनाव से पहले उसने सभी सांसदों और विधायकों को हिदायत दी जाएगी कि किसी भी तरह से छोटे-छोटे मामलों में लापरवाही न बरतें और इस तरह के कोई इनपुट मिलते हों तो वह सरकार और संगठन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करें। विवादित बयानों और विवादत वीडियो से दूर रहने की हिदायत दी जाएगी ताकि उनकी तरफ से कोई ऐसी चूक न हो जिसका लाभ विपक्ष को मिले। चुनाव के लिहाज से पार्टी ये चेतावनी सभी जिलाध्यक्षों के माध्यम से सांसदों एवं विधायकों के पास भेजेगी।

रूहेलखंड की क्या है बीजेपी के लिए अहमियत
लखीमपुर खीरी रोहेलखंड क्षेत्र का हिस्सा है और इस प्रकार विरोध के एक पूर्व की ओर आंदोलन का प्रतिनिधित्व करता है। यह राज्य का सबसे बड़ा जिला है जो लगभग 7,700 वर्ग किमी में फैला हुआ है। यह नेपाल सीमा से सटा हुआ है और तराई क्षेत्र का हिस्सा है, जो हिमालय की तलहटी में है। इस जिले में नौ चीनी मिलें हैं, यही वजह है कि इसे राज्य का "चीनी का कटोरा" कहा जाता है (यहाँ के 80 प्रतिशत किसान गन्ना उगाते हैं)। सिख जिले की आबादी का लगभग 2.6 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी को रूहेलखंड इलाके की सभी दस लोकसभा सीटों पर जीत मिली थी।
लेकिन भाजपा नेता अभी भी घटना से हुए नुकसान को लेकर चिंतित हैं। पीलीभीत से बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने योगी को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वरूण गांधी ने कहा है कि,
"हमारे किसान भाइयों को बेरहमी से कुचलने की दिल दहला देने वाली घटना से पूरे देश के नागरिकों में दर्द और गुस्सा है। अगर किसान भाई अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए पीड़ित और विरोध कर रहे हैं, तो हमें उनके साथ बहुत संयम और धैर्य से पेश आना चाहिए।"

दिग्गज नेताओं का लखीमपुर दौरा खड़ी करेगा बीजेपी के लिए मुश्किलें
दरअसल लखीमपुर खीरी में हुए कांड के बाद अब आने वाले दिनों में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के शिवपाल यादव, राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी, भीम आर्मी के चंद्रशेखर, टीएमसी सांसदों का 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री सहित कई दिग्गज नेताओं के जिले का दौरा करने की उम्मीद है। यूपी में कांग्रेस पार्टी के पर्यवेक्षक भूपेश बघेल, बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा और पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी लखीमपुर खीरी आने वाले दिनों में लखीमपुर खीरी का दौरा कर सकते हैं।












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