केंद्रीय मंत्री की भांजी की इलाज के दौरान मौत, बंद कराया अस्पताल
अनुप्रिया पटेल की भांजी की इलाज के दौरान मौत हो गई जिसके बाद उसे एडमिट करने से इनकार करने वाले हर्ष हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई की है।
इलाहाबाद। यूपी के इलाहाबाद में एक बार फिर चिकित्सीय लापरवाही से मरीज की मौत का मामला सामने आया है। लेकिन इस बार मामला हाई-प्रोफाइल होने के कारण अस्पताल पर गाज गिरी है। तत्काल प्रभाव से एक निजी अस्पताल को बंद करा दिया गया है जबकि सरकारी अस्पताल के विरुद्ध जांच तक नहीं हुई। हलांकि पूरा मामला उलझा हुआ है। मामला केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल से जुड़ा हुआ है। अनुप्रिया पटेल की भांजी गरिमा पटेल की इलाज के दौरान मौत हुई है जिस पर इलाहाबाद के हर्ष हास्पिटल पर कार्रवाई की गयी है।

बाथरूम में गिरकर गरिमा हुई बेहोश
मंत्री अनुप्रिया पटेल की भांजी गरिमा कानपुर में बीटेक की पढ़ाई कर रही थी। वह अपने मामा के घर यानी अनुप्रिया के घर इलाहाबाद आयी थी। यहां शादी समारोह में गरिमा शरीक हुई थी। 2 जून की शाम वो अचानक बाथरूम में बेहोश हो गई। परिजन उसे तुरंत शहर के हर्ष प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए जहां गरिमा को देखने के बाद उसे उसे एडमिट करने से इनकार कर दिया गया। वेंटिलेटर की सुविधा न होने की बात कहकर हर्ष हास्पिटल से गरिमा को एसआरएन ले जाने की सलाह दी गयी। एसआरएन में गरिमा को भर्ती करा दिया गया। लेकिन स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में भी इलाज के नाम पर खानापूर्ति हुई। 24 घंटे बाद भी जब गरिमा के स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ तो उसे लखनऊ पीजीआई ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान 5 जून को गरिमा ने दम तोड़ दिया।

अनुप्रिया पटेल के पति ने जताई नाराजगी
इलाहाबाद आये मंत्री अनुप्रिया पटेल के पति व अपना दल एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष कुमार ने बताया कि उनकी भांजी गरिमा (21) को अगर हर्ष हॉस्पिटल में समय पर एडमिट कर उसके ब्रेन में खून पम्प कर दिया जाता तो शायद उसकी जान बच जाती लेकिन हास्पिटल में गरिमा को भर्ती करने तक से इन्कार कर दिया जो बेहद संवेदनहीन है और डाक्टरी पेशे के खिलाफ है। गैरजिम्मेदाराना व्यवहार और कार्य के चलते गरिमा की जान गयी है इसलिये हर्ष हॉस्पिटल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। आशीष ने कहा कि हम गरिमा को लेकर जहां भी गये चिकित्सीय व्यवस्था बेहद ही लचर रही।

बंद कराया हर्ष अस्पताल
मामले की शिकायत सीएमओ आलोक वर्मा से की गई तो सीएमओ ने हर्ष हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया। सीएमओ ने ओपीडी छोड़कर अस्पताल की सभी सेवाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। सीएमओ ने बताया कि व्यापक जांच रिपोर्ट आने तक हर्ष हॉस्पिटल के डॉ. के मुकुल पाण्डेय के अस्पताल पर रोक लगा दी गई है।
क्या बोले डॉ मुकुल पाण्डेय
मामले में हर्ष हॉस्पिटल के एमडी डॉ मुकुल पाण्डेय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह बेवजह की कार्रवाई है। जब गरिमा हमारे हॉस्पिटल के अंदर आई ही नहीं। हमने उसे भर्ती ही नहीं किया, हमने इलाज भी नहीं किया तो गरिमा की मौत के जिम्मेदार हम कैसे हो सकते हैं ?
डा. पाण्डेय ने बताया कि 2 जून की शाम गरिमा को कार में लादकर परिजन आये थे। उस वक्त ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टर ने पेशेंट की हालत देखी तो तत्काल उसे एसआरएन अस्पताल ले जाने की सलाह दी। अब सही सलाह देने पर उल्टा कार्रवाई हो रही है। हमारे पास वेंटिलेटर की दुरुस्त व्यवस्था नहीं है। अगर हम पेशेंट को भर्ती भी कर लेते तो उसके इलाज की समुचित व्यवस्था कैसे होती?

एसआरएन अस्पताल का क्या कहना है
इलाहाबाद के जिस एसआरएन हॉस्पिटल में गरिमा को भर्ती कराया गया यह वही अस्पताल के जहां सीएम योगी आदित्यनाथ ने दौरा किया था। उनके दौरे से पहले किराये के कूलर लाये और हटाये गये थे। मामले में एसआरएन अस्पताल के डॉ संतोष से बातचीत की गयी तो उन्होंने कहा कि - एसआरएन हॉस्पिटल आते ही गरिमा को तत्काल वेंटिलेटर में रख दिया गया था। उसे ब्रेन अटैक हुआ था। दो न्यूरो सर्जन और एचओडी की निगरानी में उसका इलाज हो रहा था। लेकिन गरिमा के परिजन उसे लखनऊ ले जाने पर तुले थे। उनके अनुसार लखनऊ में ही सही इलाज मिलता। आखिरकार गरिमा को बिना रेफर करवाये उसे लखनऊ ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। यह परिजनों की अपनी मर्ज़ी थी। इसमें अस्पताल य चिकित्सीय लापरवाही का सवाल ही नहीं उठता।
संगम में विसर्जित हुई अस्थि
गरिमा के अंतिम संस्कार के बाद संगम में उसकी अस्थियां विसर्जित की गयी। इस दौरान बीजेपी के सहयोगी दल अपना दल एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल ने मीडिया से वार्ता करते हुये हर्ष हास्पिटल, एसआरएन व सूबे की बदहाल चिकित्सीय व्यवस्था पर सवाल उठाये।












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