Sambhal: संभल हिंसा पर बोले सांसद चंद्रशेखर आजाद, कहा-'EVM धांधली और अडानी विवाद से ध्यान भटकाने की कोशिश'
Sambhal Violence: आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने संभल हिंसा पर गहरी चिंता जताते हुए पुलिस, प्रशासन और सरकार की विफलता को कठघरे में खड़ा किया है। चंद्रशेखर ने इस हिंसा को ईवीएम में छेड़छाड़, चुनावी धांधली और अडानी विवाद जैसे अहम मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया है।
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देश की एकता को तोड़ने का प्रयास
चंद्रशेखर आजाद ने धार्मिक स्थलों को लेकर बढ़ते विवादों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं देश की एकता को तोड़ने और नफरत का जहर फैलाने का काम करती हैं। उन्होंने धार्मिक नारेबाजी और भड़काऊ गतिविधियों को सीधे तौर पर हिंसा का कारण बताते हुए कहा कि यह राष्ट्र के ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही हैं।

संभल हिंसा की गहन जांच की मांग
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने संभल हिंसा के दौरान चार लोगों की मौत और संपत्ति के नुकसान पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने हिंसा के पीछे छिपे कारणों की गहन जांच की मांग की और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने का आह्वान किया।
संसद के शीतकालीन सत्र में उठाएंगे मुद्दा
सांसद ने यह भी कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हेरफेर और आलोचनात्मक आवाजों के दमन की ओर इशारा करती हैं। उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान इस मुद्दे को उठाने का वादा किया और संविधान के दायरे में शांतिपूर्ण संवाद और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की।
संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की जरूरत पर जोर
चंद्रशेखर आजाद ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हिंसा और नफरत भड़काने के लिए किए जा रहे इन प्रयासों की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने सरकार पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अक्षमता का आरोप लगाया और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की सख्त जरूरत पर जोर दिया।
हिंसा कभी भी समाधान नहीं हो सकती
उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंसा कभी समाधान नहीं हो सकती है। उन्होंने भारतीय लोकतंत्र के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा करने और संघर्षों को सुलझाने के लिए सुनने और संवाद को सबसे प्रभावी तरीका बताया।
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने संभल हिंसा के व्यापक संदर्भों जैसे चुनावी प्रक्रियाओं में धांधली, आर्थिक विवादों और संविधान की अनदेखी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उनका बयान भारत के सामने मौजूद चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए एक मजबूत आह्वान हैं।












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