कबाड़ से लाखों रुपए का कारोबार खड़ा कर चुकी हैं मोदी की यह दीवानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फैन शिखा शाह ने वाराणसी में कबाड़ से बड़ा कारोबार खड़ा किया है। वह लोगों को ट्रेनिंग देकर रोजगार भी दे रही हैं।
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया का असर अब उनके संसदीय क्षेत्र काशी में भी दिखने लगा है। वाराणसी की एक ग्रेजुएट छात्रा शिखा शाह, नगर निगम के कबाड़ से काशी के हर घर को संवारने की कोशिश कर रही हैं। यही नहीं कबाड़ से बनी खूबसूरत और उपयोगी चीजों को शहर से लेकर सात समंदर पार तक फेसबुक, स्नैपडील जैसी साइटों के जरिए बेच रही हैं।

मोदी की दीवानी है शिखा
शिखा पीएम मोदी के आइडियाज की दीवानी है। उनका कहना है कि मोदी के स्टार्टअप इंडिया के विजन ने भारत के शहर से लेकर गांव में रहने वालें लोगों की सोच को बदल कर रख दिया है। शिखा ने मोटी सैलरी की नौकरी को लात मारकर शहर के कबाड़ से अपना और अपनी मां के साथ ही तमाम बेरोजगारों का जीवन सवांरने की कोशिश कर रही हैं।

कैसे कचरे से करती हैं व्यवसाय?
शिखा बताती हैं कि उन्होंने सबसे पहले अपने घर के कबाड़ से इस मिशन को शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने नगर निगम में आने वाले कबाड़ को लेना शुरू किया और उसको छांटकर उससे इतनी खूबसूरत चीजें तैयार करने लगीं जिसे देख कर किसी को भरोसा ही नहीं होता है कि कबाड़ से भी इतनी खूबसूरत और उपयोगी चीज बनाई जा सकती है। मोदी के स्टार्टअप की शुरुआत करने से शिखा के हौसले को जैसे चार चांद लग गया है। शिखा का व्यापार अब बढ़ने लगा है। अब शिखा अपने वर्कशाप के लिए बड़ी जगह तलाश रही हैं। शिखा की योजना है कि कबाड़ से बनी चीजों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए शहर में तमाम स्थानों पर अपना आउटलेट खोलेंगी।

शिखा ये हुनर दूसरों को सैलरी देकर सिखाती हैं
शिखा अपने सपने और समाज को संदेश देने के इरादे में काफी हद तक सफल भी हो चुकी हैं। शिखा दो साल पहले बिना किसी की मदद के ही नगर निगम के बेकार पड़े कबाड़ को बीस हजार में खरीदकर शिखा अपने सपने और काशी को सवांरने के साथ ही स्वच्छता का संदेश देने की राह पर अकेले ही निकल पड़ी थी। आज शिखा के पीछा कारवां सा बनता जा रहा है और उन्होंने अपनी प्रतिभा, लगन और मेहनत से आधा दर्जन से ज्यादा बेरोजगार हुनरमंद को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया है। शिखा अब ये हुनर और भी कारीगरों को सिखा रही हैं और बकायदा 15 से 20 हजार रुपये की सैलरी भी दे रही हैं। साथ में काम करने वाले कारीगर भी काफी खुश हैं। उनका कहना है कि यहाँ रोज काम मिल जाता है। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना अब आसान हो गया हैं।

चलाती हैं स्क्रैप शाला
शहर में बना स्क्रैप शाला आज उनलोगों के लिए आश्चर्य का विषय बना हुआ है जो अपने घर के कबाड़ को या बेच दिया करते थे या सड़क पर फेंक दिया करते थे क्योंकि उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि इस कबाड़ से भी लाखों का व्यवसाय किया जा सकता हैं। बहरहाल समाज में शिखा जैसे युवाओं की जरूरत है जो अपने भविष्य को चमकाने के साथ-साथ समाज को बेहतर बनाने के रास्ते तलाशती हैं।












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