मोदी ने काशी से एक साथ साधे कई चुनावी समीकरण, जानिए क्यों किया सुहेलदेव और शिवाजी का जिक्र
लखनऊ, 13 दिसंबर: उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मी जोर पकड़ती जा रही है। सभी दल अपने अपने तरकश से तीर निकालने में जुटे हैं। वाराणसी संसदीय सीट से सांसद और पीएम नरेंद्र मोदी का वाराणसी दौरा कई मायने में बेहद अहम है। बनारस को सांस्कृतिक नगरी की पहचान दिलाने और उसका गौरव वापस लौटाने का दावा करने वाली बीजेपी इस कार्यक्रम के बहाने पूरे पूर्वांचल का सियासी समीकरण साधने का प्रयास कर रही है। इसकी झलक उस समय दिखाई दी जब पीएम ने अपने संबोधन में महाराजा सुहेलदेव और शिवाजी को एक साथ याद किया। दरअसल पूरे पूर्वांचल में सुहेलदेव को लेकर जो सियासत हो रही है उसको लेकर पीएम मोदी भी अनभिज्ञ नहीं है। उनका यह तीर जानबूझकर छोड़ा गया था जो कई नेताओं को चुभो गया।

पीएम ने शिवाजी के साथ सुहेलदेव को भी याद किया
प्रधानमंत्री ने कहा कि औरंगजेब के अत्याचार, उसके आतंक का इतिहास साक्षी है। जिसने सभ्यता को तलवार के बल पर बदलने की कोशिश की, जिसने संस्कृति को कट्टरता से कुचलने की कोशिश की, लेकिन इस देश की मिट्टी बाकी दुनिया से कुछ अलग है। यहां अगर औरंगजेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं। अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे हमारी एकता की ताकत का अहसास करा देते हैं। अंग्रेजों के दौर में भी, हेस्टिंग का क्या हश्र काशी के लोगों ने किया था, ये तो काशी के लोग जानते ही हैं।

पीएम ने काशी के गौरव का किया जिक्र
पीएम ने कहा कि काशी शब्दों का विषय नहीं है, संवेदनाओं की सृष्टि है। काशी वो है- जहां जागृति ही जीवन है। काशी वो है-जहां मृत्यु भी मंगल है। काशी वो है- जहां सत्य ही संस्कार है। काशी वो है-जहां प्रेम ही परंपरा है। बनारस वो नगर है जहां से जगद्गुरु शंकराचार्य को श्रीडोम राजा की पवित्रता से प्रेरणा मिली, उन्होंने देश को एकता के सूत्र में बांधने का संकल्प लिया। ये वो जगह है जहां भगवान शंकर की प्रेरणा से गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस जैसी अलौकिक रचना की। यहीं की धरती सारनाथ में भगवान बुद्ध का बोध संसार के लिए प्रकट हुआ। समाज सुधार के लिए कबीरदास जैसे मनीषी यहां प्रकट हुए।

पूर्वांचल यूपी की सियासत में बेहद खास
यूपी के तमाम विरोधी भी पूर्वांचल में अपनी ताकत आजमा रहे हैं। अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी और छोटी पार्टियों के साथ ओवैसी ने भी पूर्वांचल को अपना केंद्र बनाया है। ऐसे में पार्टी ने एक बार फिर मोदी के जरिए पूर्वांचल में खेती करने की कवायद शुरू कर दी है। बीजेपी ने एक बार फिर पूर्वांचल अपना दल के अपने सबसे भरोसेमंद साथी अनुप्रिया पटेल को अपने भरोसे में लिया है और अनुप्रिया पटेल को मंत्री बनाया है. लेकिन पूर्वांचल से ओमप्रकाश राजभर भी भागीदारी मोर्चा के बैनर तले पूर्वांचल को निशाना बना रहे हैं। क्योंकि यहां सबसे ज्यादा ओबीसी और बहुत पिछड़ी जातियां हैं। बीजेपी के खिलाफ बन रहा गठबंधन पूर्वांचल में भी सबसे ताकतवर नजर आ रहा है।

40 से ज्यादा मंदिरों को संरक्षित किया गया
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का क्षेत्रफल पहले 3,000 वर्ग फीट था। लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत से मंदिर के आसपास की 300 से ज्यादा बिल्डिंग को खरीदा गया। इसके बाद 5 लाख वर्ग फीट से ज्यादा जमीन में लगभग 400 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत से निर्माण किया गया। हालांकि निर्माण कार्य अभी जारी है। इसमें प्रमुख रूप से गंगा व्यू गैलरी, मणिकर्णिका, जलासेन और ललिता घाट से धाम आने के लिए प्रवेश द्वार और रास्ता बनाने का काम है। गौरतलब है कि धाम के लिए खरीदे गए भवनों को नष्ट करने के दौरान 40 से अधिक मंदिर मिले। उन्हें विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट के तहत नए सिरे से संरक्षित किया गया है।












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