सिस्टम की चक्की में पिस गई 16 साल की रेप पीड़िता, पढ़िए दर्दभरी दास्तां

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बरेली 16 साल की रेप पीड़िता अबॉर्शन करवाना चाहती है लेकिन लचर सिस्टम की वजह से एक तरफ समय उसके हाथों से निकल गया और दूसरी तरफ अब उम्मीद भी वह खोती जा रही है।

बरेली कोर्ट से लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट तक चक्कर लगाते-लगाते पीड़िता की प्रेग्नेंसी अवधि बढ़ती गई लेकिन अबॉर्शन करवाने की उसकी याचिका खारिज होती रही। अब पीड़िता अगली याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट से पूछने वाली है कि उनके होने वाले बच्चे को आखिर कौन पालेगा?

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इलाहाबाद हाईकोर्ट से भी नहीं मिली अनुमति

बरेली के लोअर कोर्ट और फास्ट ट्रैक कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट में की गई अपील में पीड़िता को निराशा हाथ लगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देश पर मेडिकल पैनल ने यह रिपोर्ट दी कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत 33 महीने के भ्रूण का गर्भपात नहीं कराया जा सकता।

मेडिकल रिपोर्ट के बाद अब युवती इलाहाबाद हाई कोर्ट में फिर से याचिका डालने वाली हैं जिसमें वह पूछेगी कि होने वाले बच्चे का भविष्य क्या होगा?प

प्रेग्नेंसी: 20 सप्ताह से 33 सप्ताह तक खिंच गया मामला

पीड़िता ने 7 जून 2016 को इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। मेडिकल जांच से पता चला कि वह 19 महीने और छह दिन से प्रेग्नेंट थी। मामला बरेली के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पहुंचा। पीड़िता ने कहा कि खराब आर्थिक स्थिति की वजह से बच्चा पालने की स्थित में वह नहीं है और वह बच्चा उसे हमेशा दुखद घटना की याद दिलाता रहेगा, इस वजह से वह अबॉर्शन कराना चाहती है।

26 जुलाई को जब कोर्ट ने अबॉर्शन के खिलाफ फैसला सुनाया। जज का कहना था कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत 12 सप्ताह से ज्यादा की प्रेग्रनेंसी का अबॉर्शन नहीं हो सकता। हालांकि सुप्रीम कोर्ट से 24 सप्ताह से ज्यादा समय के भ्रूण के गर्भपात को मंजूरी मिलने के फैसले के बारे में पीड़िता के वकील ने कोर्ट को बताया लेकिन कोर्ट ने उस दलील को खारिज कर दिया।

फास्ट ट्रैक कोर्ट और हाई कोर्ट भी अबॉर्शन के खिलाफ

पीड़िता ने लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील की। सेशन कोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के पास केस ट्रांसफर कर दिया। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने भी 16 अगस्त को अबॉर्शन के खिलाफ फैसला दिया। तब तक पीड़िता की प्रेग्नेंसी 30 सप्ताह की हो चुकी थी।

इसके बाद पीड़िता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अबॉर्शन के लिए अपील की। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले को मेडिकल पैनल को सौंपा। मेडिकल पैनल ने जांच रिपोर्ट देने में एक सप्ताह का समय लगा दिया।

मेडिकल पैनल ने भी मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट का हवाला देते हुए अबॉर्शन को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। अब पीड़िता की प्रेग्नेंसी 33 सप्ताह से ज्यादा खिंच चुकी है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में फिर पीड़िता की याचिका

पीड़िता अब फिर से शुक्रवार को इलाहबाद में याचिका डालकर बच्चे के भविष्य पर कोर्ट से सवाल करने वाली है। पीड़िता के वकील का कहना है, 'हम कोर्ट से पूछेंगे कि अबॉर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद अब बच्चे का भविष्य क्या होगा? हम कोर्ट से बच्चे का भविष्य सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की अपील करेंगे। कोर्ट से इस बारे में फैसला देने को कहेंगे कि कौन उस बच्चे को पालेगा और उसका खर्च उठाएगा।'

पीड़िता ने कहा, सिस्टम ने मेरा दर्द नहीं समझा

पीड़िता का कहना है कि देश के सिस्टम ने उसके दर्द को नहीं समझा और न ही उसके लिए कोई सहानुभूति दिखाई। वह अपने गांव बेहरामपुर से बरेली के बीच 50 किलोमीटर का सफर तय कर रोज कोर्ट आती जाती रही।

उसके पास पैसे नहीं थे कि कार भाड़े पर ले सकती इसलिए वह चिलचिलाती धूप में चार बार गाड़ियां बदल-बदल कर जाती रही लेकिन किसी ने उसका दर्द नहीं समझा।

पीड़िता का कहना है, 'आरोपी और उसके परिवार ने बच्चे को अपनाने से इंकार कर दिया है इसलिए बच्चे को पिता का नाम नहीं मिलेगा। अगर बच्चा जन्म लेता है तो वह मुझे हमेशा इस यंत्रणा की याद दिलाता रहेगा। सभी कह रहे हैं कि अबॉर्शन मत कराओ लेकिन कोई मेरे बारे में नहीं सोच रहा। मेरी जिंदगी का क्या होगा? मैं कोर्ट और सरकार से अपील करती हूं कि बच्चे को किसी को सौंप दिया जाय।'

'कौन करेगा मेरी बच्ची से शादी'

पीड़िता के मजदूर पिता ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उनकी बेटी अभी खुद बच्ची है। वह बच्चे को कैसे पालेगी। भविष्य में उससे कौन शादी करेगा? पूरा गांव इस बच्चे के होने के खिलाफ है। हमें धमकी मिल रही है कि अगर बच्चा पैदा हुआ तो हमें गांव छोड़ना होगा।

क्या है मामला

दर्ज एफआईआर के अनुसार, बेहरामपुर गांव की 16 साल की पीड़िता, आसिफ उर्फ मझले के यहां काम करने जाती थी। आसिफ ने शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार रेप किया।

पीड़िता के गर्भवती होने की जानकारी मिली तो परिवार के लोग जाकर आसिफ और उसके रिश्तेदारों से मिले। वहां आसिफ ने रिश्तेदारों के साथ मिलकर पीड़िता के परिवार के लोगों पर हमला किया। इसके बाद पीड़िता के पिता ने शेरगढ़ थाने में एफआईआर दर्ज कराई।

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English summary
The minor rape survivor from Bareily denied abortion by court and now she is going to move high court.
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