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बड़े नेताओं के बेटों को टिकट नहीं देगी बीजेपी ?, अपर्णा की बीजेपी में एंट्री मनपसंद सीट की गारंटी नहीं

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लखनऊ, 17 जनवरी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां अपने पूरे चरम पर हैं। टिकटों की घोषणाएं भी हो रही हैं। किसी को टिकट मिल रहा है तो किसी का टिकट कट रहा है। इस बीच बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक आलाकमान ने तय किया है कि पार्टी यूपी में किसी सांसद को या या एक ही परिवार के कई लोगों को टिकट नहीं देगी। हालांकि पार्टी का मानना है कि वह योग्यता और प्रदर्शन के अपने आधार पर टिकट देने के फार्मूले पर टिकी रहेगी। हालांकि बीजेपी में ऐसे नेताओं की लंबी फेहरिस्त है जो अपने बेटों के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं।

अपर्णा यादव

यह घोषणा उन खबरों के बीच हुई है जिनमें सांसदों और विधायकों सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उत्तर प्रदेश समेत मणिपुर, गोवा, उत्तराखंड और पंजाब में अगले महीने होने वाले चुनावों में अपने बच्चों के लिए टिकट मांगा है। उदाहरण के लिए यूपी में सांसद कौशल किशोर, सांसद रीता बहुगुणा जोशी, सांसद कौशल किशोर, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत कई बड़े नाम शामिल हैं अपनों के लिए टिकट की आस लगाए हुए हैं। यूपी में यह फेहरिस्त हालांकि और लंबी है लेकिन पार्टी ने साफ तौर पर कहा है कि एक ही परिवार के कई लोगों को टिकट नहीं दिया जाएगा।

भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 10 से 14 फरवरी के बीच होने वाले विधानसभा चुनाव के दो चरणों के लिए 107 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची पहले ही जारी कर दी है। उस सूची में 20 मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया गया है। लेकिन इसमें कई नए चेहरे भी शामिल हैं जिन्हें विनेबिलिटी के लिहाज से टिकट दिया गया है। वहीं दूसरी ओर यूपी में एक चर्चा यह भी है कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव के यूपी में आगामी चुनाव लड़ने के लिए भाजपा में शामिल हो सकती हैं।

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    अपर्णा के बीजेपी में शामिल होने की संभावनाओं के बारे में बीजेपी के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ने कहा कि,

    ''अपर्णा यादव का शामिल होना उनकी पसंद की सीट पाने पर निर्भर नहीं है। यदि वह शामिल होती हैं, तो निर्वाचन क्षेत्र सहित उनकी उम्मीदवारी पर निर्णय पार्टी नेतृत्व का विशेषाधिकार होगा। टिकट पार्टी तय करेगी कि उन्हें कहां से लड़ना है। पहले से यदि कोई ये दावा लेकर आएगा कि हमें इसी सीट से टिकट चाहिए तो ऐसा संभव नहीं है।''

    बीजेपी नेता ने कहा कि बीजेपी इस बार भी 403 सदस्यीय यूपी विधानसभा में 300 सीटों को पार कर जाएगी। पार्टी का प्रदर्शन हालिया दलबदल से प्रभावित नहीं होगा। तीन ओबीसी नेताओं और विधायकों के एक समूह ने हाल ही में यह आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी कि बीजेपी ने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की बेहतरी के लिए पर्याप्त काम नहीं किया है। हालांकि नेता ने कहा कि इन नेताओं के दावों के विपरीत, भाजपा इन समुदायों में पैर जमाने में कामयाब रही है और उनके बाहर निकलने से पार्टी के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नेता ने यूपी में बाबू सिंह कुशवाहा की पार्टी के साथ गठबंधन से भी इनकार किया।

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