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ये बकरा भारतीय सेना में कैसे बना 'मुन्ना हवलदार', बेदह रोचक है इसकी इंडियन आर्मी ज्वाइन करने की पूरी कहानी

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लखनऊ। सेना और पुलिस के खोजी दस्‍तें में शामिल खूंखार कुत्‍तों के बारे में आपने कई बार सुना होगा लेकिन आज हम आपको सेना के ऐसे अनोखे बकरे के बारे में बताने जा रहे हैं इंडियन आर्मी में हवलार है। ये कोई आम बकरा नहीं हैं सेना के इस बकरे की एक आर्मी सिपाही की तरह बहुत अहमियत हैं। आइए जानते हैं ये बकरा भारतीय सेना में कैसे पहुंचा और जानते है इसकी इंडियन आर्मी ज्वाइन करने की पूरी कहानी...

मुन्‍ना हवलदार में सैनिकों के साथ करेंगे कदमताल

मुन्‍ना हवलदार में सैनिकों के साथ करेंगे कदमताल

दसअसल, उत्तरप्रदेश के लखनऊ में आर्मी मेडिकल कोर्प सेंटर 30 मार्च को बड़ी धूमधाम से स्‍थापना दिवस मनाने जारहा है। जिसमें ये हलवादार मुन्‍ना हवलदार बकरा शिरकत करते हुए परेड की कमान संभालेगा और परेड ग्राउंड में सैनिकों के साथ कदमताल करता हुआ नजर आएगा। मुन्‍ना हवलदार बकरा कोई आम बकरा नहीं इसका तो अब आपको अंदाजा हो ही गया होगा। ये बकरा एक मारवाड़ी नस्‍ल है ये केवल अपनी नस्‍ल के कारण ही नही बल्कि अपने शरीर की वजह से काफी खास हैं।

जानिए मुन्‍ना हवलदार बकरे की खासियत, जिस कारण बना हवलदार

जानिए मुन्‍ना हवलदार बकरे की खासियत, जिस कारण बना हवलदार

राजस्‍थानी नस्‍ल के इस बकरे की खास बात ये भी है कि इसे काफी शुभ माना जाता है और इसलिए यह मार्ट पास्ट बैंड का नेतृत्व करता है। इसकी और भी खासियत है जिस कारण से इसे सेना में हवलदार की पदवी दी गई है। 30 मार्च को सेना मेडिकल कोर की 257वीं वर्षगांठ पर भी हवलदार मुन्ना परेड में शामिल होगा। इस परेड में मुन्‍ना हवलदार नाम का बकरा सबको आकर्षित करेगा। इसकी कद कठी देखकर आप भी दंग रह जाएंगे। इसकी लंबाई 4 फुट है। सैन्य अफसरों और जवानों के साथ कदमताल करने वाला हवलदार मुन्‍ना बकरा सेना में जूनियर कमीशंड आफिसर का दर्जा प्राप्‍त है।

मुन्‍ना हवलदार की जानें इंडियन आर्मी ज्वाइन करने की पूरी कहानी

मुन्‍ना हवलदार की जानें इंडियन आर्मी ज्वाइन करने की पूरी कहानी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, करीब 70 साल पहले 16 अप्रैल, 1951 में इस बकरे को ग्वालियर के महाराजा ने सेना को दिया था। महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की सेना जब इंडियन आर्मी में विलय हो गई तो ये आर्मी में शामिल हो गया। इस विलय के समय महाराजा के बैंड को भी सेना मेडिकल कोर भी दिया गया था जिसमें इसे शामिल किया गया था।

जानें इस काले रंग के राजस्‍थानी बकरे की खासियत

जानें इस काले रंग के राजस्‍थानी बकरे की खासियत

राजस्‍थान के बाड़मेर में पाया जाने वाला ये मारवाड़ी काले रंग का बकरे की उम्र 12 साल होती है। यही कारण है कि सेना बाड़मेर से दूसरा बकरा लाकर उसे पालती और उसे ट्रेनिंग देती है और हवलदार के पद पर रखकर इसकी देखभाल होती है और इसी रैंक से ये रिटायर होता है। सेना इसकी खानापान समेत सेहत का ख्‍याल रखती है लेकिन वेतन तय नहीं किया गया है। मुन्ना को मल्टीग्रेन, गुड़, फल, घास सब खिलाया जाता है।

इंडियन आर्मी में मिली है मुन्‍ना हवलदार को सेना की ये वर्दी

इंडियन आर्मी में मिली है मुन्‍ना हवलदार को सेना की ये वर्दी

हवलदार मुन्ना एएमसी सैन्य बैंड का एक अहम हिस्सा है उसे मेडिकल कोर के लिए शुभ माना जाता है वह कई परेड का हिस्सा रहता है। मुन्‍ना हवलदार की ड्रेस बड़ी ही सुंदर है और खास वर्दी हैं जिसमें गले में लगी घंटी, मरून दुपट्टा शामिल है। साथ ही इस वर्दी में एएमसी के प्रतीक चिह्न भी लगे हैं। मुन्‍ना हवलदार अपने हैंडलर की सुनता है और समारोह में यह मार्चिंग बैंड की टुकड़ी का नेतृत्व करते हैं। इस बार सेना मेडिकल कोर के समारोह में मुन्‍ना हवलदार बड़े शान से कदमताल करता नजर आएगा।

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English summary
Meet 'Munna Havildar' in the Indian Army, goat that serves as the mascot of Army Medical Corps band, see interesting story
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