मायावती ने फिर संभाली बसपा राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी , क्या सता रहा कोई डर या है मजबूरी?
Mayawati BSP national president: उत्तर प्रदेश की पूूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमों मायावती को सर्वसम्मति से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। यह निर्णय बसपा की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति (सीईसी) और राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारियों, राज्य पार्टी इकाइयों और देश भर के प्रतिनिधियों की एक विशेष बैठक के दौरान लिया गया।
आइए जानते हैं आखिर क्या वजह है कि मायावती ने एक बार फिर बसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की कुर्सी संभालने का निर्णय लिया। क्या ये मयावती की मजबूरी है या मायावती को कोई डर सता रहा है?

68 वर्षीय मायावती इससे पहले चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा को बसपा के संस्थापक कांशीराम ने महत्वपूर्ण रूप से आकार दिया, जिन्होंने दो दशक पहले उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था।
मायावती ने आकाश आनंद को बनाया था अपना उत्ताधिकारी
बता दें लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बसपा सुप्रीमों मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को अपने उत्तराधिकारी के रूप में आगे किेया। रैलियों में अपने आक्रामक अंदाज के कारण आकाश आनंद का बसपा के चमकते तारे के तौर पर उभर रहे थे। यहां तक की रैलियों में आकाश आनंद की मायावती से अधिक डिमांड होने लगी थी।
अपरिपक्क बता कर कर दिया था साइड लाइन
कुछ ही समय में आकाश मायावती को ओवरसैडो करने लगे थे। मायावती के पक्ष के नेताओं को ये बात बर्दास्त नहीं हो रही थी। जिसके बाद मायावती ने आकाश आनंद को अपरिपक्क बताते हुए नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से हटाते हुए सक्रिय राजनीति से अगल कर दिया था।
खुद संभाली अध्यक्ष की कुर्सी, आकाश को दी ये अहम जिम्मेदारी
हालांकि, अब यूपी की 10 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले मायावती ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी संभालने के साथ आकाश आनंद को अन्य चार राज्यों में होने वाले चुनावों की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसा करके जहां मायावती जहां अपना राजनीति भविष्य सुरक्षित करते हुए, अपने उत्तराधिकारी चेहरे को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना चाहती हैं। वहीं दूसरी ओर आकाश के आक्रामक अंदाज से मायावती चार राज्यों में बसपा के पक्ष में फिजा बनाकर लाभ लेना चाहती हैं। यानी एक तीर से दो निशाना माायावती ने साधा है।
संन्यास लेने की अटकलों से क्या डर गई मायावती?
गौरतलब है कि एक दिन पहले ये अटकलें जब लगाई जा रही थी कि 27 अगस्त को होने वाले वाली बैठक में किसी नए चेहरे को पार्टी की कमान मिल सकती है। ये सुनते ही मायावती भड़क उठी थी और सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर साफ किया था सक्रिय राजनीति से मेरा संन्यास लेने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है।
राष्ट्रपति बनाए जाने की अफवाह से डरी मायावती?
इसके साथ ही मायावती ने ये भी कहा था कि जबसे पार्टी ने आकाश आनंद को मेरे अस्वस्थ रहने और मेरी अनुपस्थिति मे बसपा का उत्तराधिकारी के रूप में आगे किया था तब से जातिवादी मीडिया फेक न्यूज छाप रहे थे जिससे लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने कहा मुझे राष्ट्रपति बनाने की अफवाह उड़ाई गई थी।
कांशीराम के पद चिन्हों पर चल रही मायावती
मायावती ने दिवंगत काशीराम का जिक्र करते हुए कहा जबकि मान्यवर कांशीराम ने ऐसे एक प्रस्ताव को ये कह कर ठुकरा दिया था कि राष्ट्रपति बनने का मतबल है सक्रिय राजनीति से संन्यास लेना है। जों पार्टी हित में मान्यवर कांशीराम जी को गंवारा नहीं था, तो फिर शिष्या के लिए ये स्वीकारना कैसे संभव है?












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