यूपी: दवा देने के बदले दुकानदार ने रखवाई ज्वेलरी, फिर भी बच नहीं पाई जान
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के शहर प्रयागराज में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल बेहाल है। इसका जीता-जागता उदाहरण मोतीलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज में सामने आया है। यहां प्रसूता को पैसे के अभाव में दवाइयों के लिए मेडिकल स्टोर पर अपनी पायल गिरवी रखनी पड़ी। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते उसके नवजात की जान नहीं बच सकी। फिलहाल प्रसूता की भी हालत नाजुक बनी हुई है।

क्या है घटना
मोतीलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में एक युवक अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर लेकर आया था। अस्पताल में डॉक्टरों ने केस गंभीर बताकर पहले भर्ती करने से इनकार कर दिया और जब महिला आयोग की सदस्य ने दबाव बनाया तो प्रसूता को भर्ती कर लिया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने दवाइयां व अन्य सामान बाहर से लाने के लिए कहा। लेकिन, पति के पास जब पैसे कम पड़ गए तो मजबूरी में पति को अपनी पत्नी की पायल मेडिकल स्टोर पर गिरवी रखकर 1200 रुपए की दवाई खरीदनी पड़ी। इस प्रक्रिया में काफी देर होने के बाद प्रसूता का ऑपरेशन भी देर से हुआ। जिसके चलते उसके बच्चे की मौत हो गई। फिलहाल प्रसूता की भी हालत गंभीर बनी हुई है।

कमीशन होता है तय
इस शर्मनाक वाक्ये के बाद क्या कोई कार्रवाई होगी ? इस पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। क्योंकि यह कोई पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना हुई है। मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में हर दिन कमीशन के नाम पर बाहर से ही दवाएं लिखी जाती है। डॉक्टर और मेडिकल स्टोर संचालक के बीच कमीशन तय होता है। जिसके चलते गरीब मरीजों को अपने गहने तक गिरवी रख कर दवाई खरीदनी पड़ती है।

उठाए सरकार की मंशा पर सवाल
राज्य पिछड़ा आयोग की पूर्व सदस्य निर्मला यादव ने अस्पताल और सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि धिक्कार है ऐसी सरकार पर। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और दलाली की वजह से आज फिर एक बेटी को अपनी जिंदगी गवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार प्रयागराज को नाम देती है स्मार्ट सिटी, बोलते हो बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, लेकिन यह स्वास्थ मंत्री के शहर में एक गरीब महिला डिलीवरी व सस्ते इलाज के लिए सरकारी अस्पताल आती है तो डॉक्टर कमीशन के लिए सारी दवाएं मेडिकल स्टोर से मंगवाते हैं। निर्मला यादव ने बताया कि पैसे के अभाव के कारण दवा व अन्य सामग्री देर से आया तो ऑपरेशन देर से हुआ। बच्ची पैदा तो हुई पर उसकी हालत गम्भीर थी। डॉक्टरो ने बोला दवा और ग्लब्ज देर से लाए इसलिए ऑपरेशन देर से हुआ।

पैसे के अभाव में मौत
नवजात बच्ची की मौत से आहत पिता ने बताया कि बच्ची को ऑक्सीजन की जरूरत थी तो उसे चिल्ड्रन अस्पताल भेज दिया गया लेकिन वहां पर वेंटिलेटर पर कोई जगह खाली नही थी। बच्ची को प्राइवेट अस्पताल ले गए जहां पर एक दिन का खर्चा 18 हजार बताया गया। पैसे थे नहीं तो वापस पैसे का इंतजाम करने लगे। जब तक हम पैसे का इंतजाम करते तब तक बच्ची ने दम तोड़ दिया। अब प्रसूता की भी हालत गंभीर है और अगर उसे भी समय पर दवा नहीं मिली तो उसकी भी जान आफत में आ सकती है।












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