कानपुर में 19 दिसंबर को तीन साल पुरानी कुर्सी पर ही क्यों बैठेंगे मोदी?
आगामी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा की कानपुर इकाई, पीएम मोदी के कुर्सी का भाग्य आजमाने की ओर है।
कानपुर। यूं तो लोकतंत्र में नेता और पार्टी को जनता के वोट का भरोसा होता है लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 'कुर्सी भाग्य' भी आजमाएगी।
ये भाग्य भी भाजपा के स्टार प्रचारक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा हुआ है।
बता दें कि पीएम मोदी 19 दिसंबर को प्रदेश स्थित कानपुर में चुनावी रैली करने वाले हैं। इस दौरान पीएम मोदी की भाग्यशाली कुर्सी तैयार कर ली गई है।

3 साल पुरानी इस कुर्सी को ग्लास चेंबर से निकाल कर, साफ-सफाई कराई गई और कुर्सी को फिर से पॉलिश किया गया है।
लड्डू का डिब्बा भी है ग्लार चेंबर में
भाजपा कार्यकर्ता चाहते हैं कि पीएम मोदी कानपुर की रैली के दौरान उसी कुर्सी पर बैठें जिस पर वो साल 2014 में आम चुनाव में एक रैली के वक्त बैठे थे।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार भाजपा कार्यकर्ताओं ने बताया कि साल 2013 में 19 अक्टूबर को पीएम मोदी ने विजय शंखनाद रैली कानपुर में की थी।
साथ ही कानपुर में हुई वो रैली बतौर पीएम कैंडिडेट मोदी की पहली रैली थी। गौरतलब है कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 71 सीटें जीती थी।
इसी के बाद कानपुर में कार्यकर्ताओं ने उस कुर्सी को ग्लास चेंबर बनवा कर रखा दिया। कार्यकर्ताओं ने उस गिलास को भी संभाल कर रखा हुआ है जिसमें पीएम मोदी ने पानी पिया था।
इतना ही ग्लास नहीं चेंबर में एक डिब्बा रखा है, जिसमें पीएम को दिए ठग्गू के लड्डू रखे थे।
तब लकी मानने लगे कार्यकर्ता
बताया गया कि जब 80 में से 71 सीटें भाजपा की झोली में आईं, तभी कानपुर के कार्यकर्ता इसे 'लकी' मानने लगे। जिलाध्यक्ष, सुरेंद्र मैथानी के अनुसार पीएम बनने के बाद वो पहली बार कानपुर आ रहे हैं।
कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह कुर्सी पीए मोदी के लिए सौभाग्यशाली है। जब इस कुर्सी पर 2013 में मोदी बैठे थे और प्रदेश में विजय शंखनाद की शुरूआत की थी को भाजपा को बड़ी जीत हासिल हुई थी।
कहा कि हमारा मानना है कि पीएम मोदी अगर इस बार भी इसी कुर्सी पर बैठेंगे तो 2017 के चुनाव में हमें सबसे ज्यादा सीट मिलेगी।












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