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प्रदर्शनकारी महिला के साथ अभद्रता पर यूपी पुलिस की सफाई, कहा- पहनावे की वजह से समझ लिया था लड़का

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस की वजह से बेरोजगारी काफी बढ़ गई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार ने अब सरकारी नौकरी की जगह संविदा पर कर्मियों को रखने का ऐलान किया है। जिसको लेकर गुरुवार को युवाओं ने मोर्चा खोल दिया और प्रधानमंत्री के जन्मदिन को राष्ट्रीय बेरोजगारी दिवस के रूप में मनाया, लेकिन इसी दौरान लखनऊ में ऐसा वाक्या हुआ, जिसके लिए यूपी पुलिस को माफी मांगनी पड़ी।

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दरअसल समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता लखनऊ में बेरोजगारी और संविदा नौकरी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर एक पर प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल से बाहर होता देखा पुलिस ने भी मोर्चा संभाला। इस दौरान एक युवती को यूपी पुलिस के दरोगा ने जबरन पकड़कर किनारे कर दिया। जिसकी फोटो देखते ही देखते वायरल हो गई। इस घटना के बाद से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यूपी पुलिस की जमकर आलोचन हो रही है।

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विवाद बढ़ता देख यूपी पुलिस ने भी मामले में सफाई जारी की है। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के मुताबिक कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को हटाना जरूरी था। इसके साथ ही वहां पर भीड़ भी ज्यादा थी, जिस वजह से महिला-पुरुष के पहनावे का अंतर करना मुश्किल हो गया। इसी दौरान पुलिसकर्मी ने भूलवश महिला को पुरुष समझकर हटा दिया। जिस पर वो खेद व्यक्त करते हैं। प्रदर्शनकारी महिला के मुताबिक पुलिस ने उनके गेटअप की वजह से उन्हें पकड़ लिया था। बाद में जैसे ही उनको ये एहसास हुआ, पुलिस टीम ने महिला से माफी मांगी।

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English summary
lucknow Police clarification on indecency with protesting women
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