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UP में अब सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन करना माना जाएगा 'क्राइम', अंत्योष्टि के लिए सरकार ने बनाईं गाइडलाइंस

UP में अब सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन करना माना जाएगा 'क्राइम', अंत्योष्टि के लिए सरकार ने बनाईं गाइडलाइंस

लखनऊ, 25 सितंबर: सड़क या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर शव रखकर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में अब सख्त नियम बनाए गए हैं। इन नियमों के मुताबिक, सार्वजनिक स्थान पर शव रखकर प्रदर्शन करना अब से यूपी में दंडनीय अपराध माना जाएगा। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट में शव के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश अनुपालन में गृह विभाग ने एक एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार की है।

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    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस एसओपी के तहत परिवारीजनों द्वारा स्वयं या भीड़ जुटाकर रास्ते या सार्वजनिक स्थान पर शव रखकर प्रदर्शन किया तो इसे शव का अपमान मानते हुए उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यूपी सरकार द्वारा बनाई गई एसओपी के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम के बाद परिवार को शव सौंपते वक्त लिखित सहमति ली जाएगी कि वे शव को पोस्टमार्टम हाउस से सीधे अपने घर ले जाएंगे। साथ ही, धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार अंत्येष्टि स्थल पर ले जाकर अंतिम संस्कार करेंगे।

    इस दौरान वो बीच रास्ते में कहीं भी शव रखकर भीड़ एकत्र करने, जाम लगाने अथवा किसी दल या संगठन के सहयोग से धरना-प्रदर्शन नहीं करेंगे। अगर वो ऐसा करते है तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। इसी तरह अगर कोई समूह या संगठन शव के साथ प्रदर्शन करता है और कानून व्यवस्था के खिलाफ कार्य करता है तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

    रात में अंतिम संस्कार के लिए ये होगी नई व्यवस्था
    एसओपी के मुताबिक, रात में अगर किसी शव का अंतिम संस्कार किया जाना है तो उसके लिए पहले परिजनों की अनुमति लेनी होगी। इतना ही नहीं, पूरी प्रक्रिया की शुरू से लेकर आखिर तक वीडियोग्राफी भी की जाएगी। इसके साथ ही इस दौरान जिला प्रशासन और परिजनों के बीच हुए संवाद व संदेशों का डाटा भी एक साल तक सुरक्षित रखना होगा।

    अज्ञात शवों के लिए भी नियम तय
    एसओपी में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि अंतिम संस्कार परिजनों द्वारा ही किया जाएगा। अगर किन्हीं परिस्थितियों में परिवारीजन द्वारा शव लेने से मना करने, या किसी अन्य कारण से शव के खराब होने की स्थिति में पहले तो प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा परिवार को मनाने की कोशिश की जाएगी। अगर परिवार वाले बात नहीं मानते है तो पांच स्थानीय लोगों का समूह बनाकर शव का पंचनामा तैयार किया जाएगा। इसके बाद डीएम के निर्देशानुसार अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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