44 साल बाद पूरी हुई 25 लाख किसानों की आस, जानिए मोदी ने कैसे साधा 9 जिलों का समीकरण

लखनऊ, 11 दिसंबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होना है और बीजेपी और पीएम मोदी का हर कार्यक्रम चुनावी लिहाज से ही लगाया जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि शनिवार को बोदी ने शनिवार को बलरापुर से सरयू नहर परियोजना का शुभारंभ कर एक साथ 9 जिलों का समीकरण साधने का प्रयास किया। मोदी ने एक तीर से कई निशाने साधे। उन्होंने इस परियोजना के तहत जहां पूर्व सरकारों पर हमला बोला वहीं किसानों की नाराजगी भी दूर करने का प्रयास किया। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक मोदी का यह दौरा सरयू नहर के जरिये पूर्वांचल के नौ जिलों बहराईच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीर नगर, गोरखपुर और महराजगंज के लाखों किसानों को एक बड़ी सौगात देकर साधने की रही।

बीजेपी के दावा- योगी के समय में हुआ 80 फीसदी काम

बीजेपी के दावा- योगी के समय में हुआ 80 फीसदी काम

बीजेपी का दावा है कि यह परियोजना 44 सालों बाद पूरी हो रही है। इसका 80 फीसद से अधिक काम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यकाल के दौरान हुआ। इससे पूर्वांचल के संबंधित जिलों के करीब 50 लाख किसानों को लाभ होगा। भरपूर पानी मिलने और बाढ़ की समस्या का हल होने से जिन क्षेत्रों में एक फसल होती थी वहां दो फसलें होंगी। अक्टूबर-2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 500 करोड़ से ऊपर की जिन परियोजनाओं की समीक्षा की थी, उसमें सरयू नहर भी शामिल थी। तब मुख्यमंत्री ने हर सप्ताह काम के प्रगति की निगरानी करने का निर्देश अधिकारियों को दिया था। गत तीन जून को मुख्य सचिव आरके तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी सरयू नहर को लेकर चर्चा हुई थी।

पूर्वांचल के नौ जिलों को मिलेगा लाभ

पूर्वांचल के नौ जिलों को मिलेगा लाभ

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद अग्निहोत्री कहते हैं कि इस नहर के पूरा होने से प्रदेश के अपेक्षाकृत पिछड़े पूर्वाचल के नौ जिलों को लाभ होगा। करीब 14.04 लाख हेक्टेयर रकबे की सिंचाई के साथ ही बाढ़ की समस्या का भी स्थाई समाधान निकलेगा। इसमें घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा और रोहिन नदी पर गिरिजा, सरयू, राप्ती, और वाणगंगा के नाम से बैराज बनाकर इससे मुख्य और सहायक नहरें निकाली गई हैं। वर्ष 1978 में बहराइच और गोंडा जिले में सिंचन क्षमता में विस्तार कर वहां के किसानों के हित के मद्देनजर घाघरा कैनाल (लेफ्ट बैंक) के नाम से यह परियोजना शुरू हुई।

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    1982 में परियोजना के विस्तार के साथ नाम भी बदला

    1982 में परियोजना के विस्तार के साथ नाम भी बदला

    1982-83 में इसका विस्तार पूर्वांचल के ट्रांस घाघरा-राप्ती-रोहिणी क्षेत्र में करते हुए नौ और जिलों को भी इसमें शामिल किया गया। तभी भारत सरकार ने इसका नाम बदलकर सरयू परियोजना रख दिया। तय हुआ कि इसमें घाघरा के साथ राप्ती, रोहिन को भी नहर प्रणाली से जोड़ा जाएगा। परियोजना की महत्ता एवं उपयोगिता के मद्देनजर केंद्र ने 2012 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर दिया। इसके तहत पूर्वांचल के नौ जिलों में 14.04 लाख हेक्टेयर रकबे में सिंचन क्षमता का विस्तार कर वहां के लाखों किसानों को लाभान्वित किया जाना है। इस बावत सरयू मुख्य नहर, राप्ती मुख्य नहर एवं गोला पंप कैनाल, डुमरियागंज पंप कैनाल अयोध्या पंप कैनाल एवं उतरौला पंप कैनाल के कुल 6590 किमी लंबाई में नहर प्रणाली का विस्तार किया गया है।

    पहले की सरकारों ने की उपेक्षा

    पहले की सरकारों ने की उपेक्षा

    पूर्वांचल के नौ जिलों के लाखों किसानों की तकदीर और खेतीबाड़ी के कायाकल्प में सक्षम इस परियोजना की पूर्व वर्षों में पहले की सरकारों ने उपेक्षा की। समय से पर्याप्त धन उपलब्ध न होने के कारण इसकी प्रगति बेहद धीमी रही। 2017 में आई योगी सरकार ने सरयू नहर परियोजना को पूर्ण किए जाने के संकल्प के साथ परियोजना पर पर्याप्त धन उपलब्ध कराया। नहरों के अवशेष कार्यों को पूर्ण करने के लिए उच्च स्तर से निर्गत आदेशों के क्रम में स्थानीय प्रशासन के सहयोग से विशेष अभियान चलाकर भूमि क्रय की गई। इसके साथ ही नहरों को पूर्ण करने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। परियोजना की नहरों के अवशेष गैप्स को पूरा करने के साथ-साथ राप्ती मुख्य नहर व कैंपियरगंज शाखा एवं इसकी वितरण प्रणालियों के कार्य तेजी से कराए गए।

    ये है सरयू नहर परियोजना की खासियत

    ये है सरयू नहर परियोजना की खासियत

    बहराइच में घाघरा नदी पर निर्मित गिरजापुरी बैराज के बाएं से बैंक से 360 क्यूसेक क्षमता की सरयू योजक नहर (17.035 किमी) निकाली गई है। इससे सरयू नदी पर निर्मित सरयू बैराज के अपस्ट्रीम दाएं किनारे में पानी लाया जाएगा। सरयू बैराज के बाएं बैक से 360 क्यूसेक क्षमता की 63.15 किमी की सरयू नहर निकाली गई है। सरयू मुख्य नहर के किमी 21.4 दाएं बैक से इमामगंज शाखा प्रणाली निकाली गयी है। सरयू मुख्य नहर के किमी 34.70 के बाएं किनारे से राप्ती योजक नहर 21.4 किमी लम्बाई में निर्मित कराई गई है। यह राप्ती नदी पर निर्मित राप्ती बैराज के अपस्ट्रीम में राप्ती नदी को पानी उपलब्ध कराएगी। इसका उपयोग 125.682 किमी लम्बी राप्ती मुख्य नहर के लिए किया जाएगा। सरयू मुख्य नहर के किमी 63.150 से दो शाखा प्रणाली बस्ती व गोंडा निकाली गई है। बस्ती शाखा से 4.20 लाख हेक्टेयर एवं गोंडा शाखा से 3.96 लाख हेक्टेयर सिंचाई होगी। राप्ती के मुख्य नहर के टेल से कैम्पियरगंज शाखा राप्ती मुख्य नहर प्रणाली से 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा प्रदान की जाएगी। इसी क्रम में श्रावस्ती में लक्ष्मनपुर कोठी के निकट निर्मित राप्ती बैराज के बाएं तट से राप्ती मुख्य नहर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसकी कुल लंबाई 125.682 किमी है। उक्त नहर के दोनों किनारों पर आठ 8-8 मीटर चौड़ा सेवा मार्ग बनेगा। यह श्रावस्ती बलरामपुर सिद्धार्थनगर को जाएगी। बाद में इसे बॉर्डर रोड के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

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