यूपी चुनाव: बाहुबलियों की बहू को भाजपा का टिकट, प्रशासन ने की बड़ी कार्रवाई
अपनी हनक और रसूख से इलाहाबाद की नैनी सेंट्रल जेल में हुकूमत चला रहे करवरिया बंधुओं को आखिरकार यहां से हटा दिया गया। केंद्रीय कारागार नैनी में बंद इन दोनों अपराधियों को मिर्जापुर शिफ्ट किया गया है।
इलाहाबाद। नैनी सेंट्रल जेल के लिए दो महीने पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने एलर्ट जारी किया था। लेकिन दो दिन पहले जब नैनी सेंट्रल जेल में प्रशासनिक छापेमारी हुई तो प्रशासन और खुफिया तंत्र के भी होश उड़ गए। जेल में सुरक्षा व्यवस्था ताक पर रखकर जैमर तक बंद कर दिया गया था। OneIndia ने इस मामले में अपनी एक्सक्लूसिव खबर से प्रशासन को सचेत भी किया था। जिसके दो दिन बाद अब जेल के हालात पर काबू पाने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

गोपनीय ढंग से किया गया दोनों को शिफ्ट
अपनी हनक और रसूख से इलाहाबाद की नैनी सेंट्रल जेल में हुकूमत चला रहे करवरिया बंधुओं को आखिरकार यहां से हटा दिया गया। केंद्रीय कारागार नैनी में बंद पूर्व बसपा सांसद कपिलमुनि करवरिया, उनके भाई और पूर्व भाजपा विधायक उदयभान, एमएलसी सूरजभान को मिर्जापुर जेल में शिफ्ट किया गया है। जेल प्रशासन ने जारी अपने एक बयान में इसकी पुष्टि की है।
करवरिया बंधुओं की हनक पूरे इलाहाबाद समेत राजनीतिक महकमे में है और जनता का बहुत बड़ा सपोर्ट इनके साथ है। जिसे देखते हुए प्रशासन ने बहुत ही गोपनीय ढंग से तीनों को पुलिस अभिरक्षा में मिर्जापुर जेल भेजा है। करवरिया बंधु के अलावा अभी कई और रसूखदार हैं, जिन्हें दूसरे जेलों में स्थानांतरित किए जाने की तैयारी चल रही है। जबकि कुछ कुख्यात अपराधियों को बांदा और पश्चिम यूपी की जेलों में भेजा जा सकता है।

मंगलवार को डीएम के दौरे पर सामने आई थी लापरवाही
मालूम हो कि मंगलवार को डीएम संजय कुमार और एसएसपी शलभ माथुर ने पुलिस, पीएससी, प्रशासनिक अधिकारियों और क्राइम ब्रांच की टीम के साथ नैनी जेल में छापेमारी की थी। अचानक डीएम के पहुंचने से हड़कंप मच गया। आधे घंटे तक तो जेल का गेट ही नहीं खोला गया। जेल के अंदर जांच हुई तो उदयभान बैरक के बाहर टहलते हुए मिले। जबकि उदय के बैरक में म्युजिक सिस्टम, टीवी मिला। इतना ही नहीं दूसरे कई कैदियों के बैरकों के बाहर से गैस लाइटर, सिगरेट का पैकेट, उस्तरा आदि भी बरामद हुआ। सबसे आश्चर्य की बात थी मोबाइल काम कर रहे थे और जैमर बंद था। डीएम ने जेल अधिकारियों को फटकार लगाते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी है।

करवरिया बंधुओं को शिफ्ट करने के पीछे राजनीतिक वजह शामिल
करवरिया बंधुओ को मिर्जापुर की जेल में शिफ्ट करने के पीछे राजनीतिक वजह भी शामिल है। चूंकि तीनो बंधुओं का राजनीतिक कैरियर लगभग खत्म हो रहा है। ऐसे में इनकी साख बचाने के लिए करवरिया बहू नीलम करवरिया मेजा विधानसभा से चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा ने नीलम को अपना प्रत्याशी बनाया है। जगजाहिर है कि इलाहाबाद की जेल में बंद होने के बावजूद भी करवरिया बंधुओं का दबदबा कायम है। जो नीलम को चुनाव जिताने के लिए काफी है। चुनाव प्रभावित न हो इस वजह से भी करवरिया बंधुओं पर सबसे पहले कार्यवाही हुई है। जबकि इस जेल में अंडरवर्ल्ड डॉन समेत बड़े-बड़े अपराधी बंद हैं। जिन पर अभी तक प्रशासन की नजर टेढ़ी नहीं हुई है।












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