JDU ने 25 सीटों पर पेश की दावेदारी: जातीय जनगणना कराने और गन्ने का रेट 400 रुपए करने की मांग
लखनऊ, 15 सितंबर: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में पूरे प्रदेश के सभी जिलों से पदाधिकारी पहुंचे हुए थे। बैठक में पांच प्रस्ताव पास किए गए जिसमें प्रमुख तौर पर यूपी में जातीय जनगणना का प्रस्ताव विधानसभा से पारित कराकर केंद्र सरकार को भेजने के साथ ही गन्ना किसानों के गन्ने का मूल्य 400 रुपए प्रति कुंतल किए जाने की मांग की गई है। जेडीयू के सूत्रों की माने तो उसने बीजेपी के सामने 25 सीटों पर दावेदारी पेश की है जिसमें ज्यादातर पूर्वांचल की सीटें शामिल हैं।

जनता दल युनाइटेड के सूत्रों की माने तो बीजेपी पर दबाव बनाने के लिए अब पार्टी ने अपनी गतिविधियों को और तेज कर दिया है। प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के बाद अब जल्द ही अक्टूबर में राष्ट्रीय कार्य परिषद का आयोजन लखनऊ में कराने का निर्णय लिया गया है जिसमें बिहार के सीएम नीतीश कुमार समेत पार्टी के सभी नेता शिरकत करेंगे। पार्टी के सूत्रों की माने तो जेडीयू ने बीजेपी के सामने 25 सीटों की दावेदारी पेश की है जो ज्यादातर पूर्वांचल एवं मध्य यूपी की है। पार्टी को उम्मीद है कि करीब 20 सीटों पर बीजेपी के साथ उनकी समहति बन जाएगी।
अक्टूबर या नवंबर में लखनऊ आएंगे नीतीश
प्रदेश की कार्यकारिणी में चुनाव से पहले बूथों को भी मजबूत करने पर चर्चा की गई। जेडीयू के सूत्रों की माने तो बीजेपी के साथ यदि सहमित नहीं बनी तो पार्टी अकेले अपने ही दम पर चुनाव लड़ेगी। जनता दल युनाइटेड की बैठक में सभी जिलों से पदाधिकारी पहुंचे हुए थे। सभी मंडलों एवं जिलों के पदाधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट बैठक में रखी। बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष अनूप कुमार पटेल ने कहा कि की राष्ट्रीय कार्य परिषद की बैठक अक्टूबर या नवंबर में लखनऊ में आयोजित की जाएगी जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे।

समझौता नहीं हुआ तो अकेले चुनाव लडे़गी जेडीयू
अनूप पटेल ने कहा कि यह कार्यक्रम आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है। उन्होंने सभी मंडलों के प्रभारियों एवं जिलाध्यक्षों को चुनाव में जुटने की अपील की। कहा कि यदि बीजेपी के साथ हमारा गठबंधन होता है तो इसका स्वागत करेंगे नहीं तो अपने ही दम पर यूपी में चुनाव मैदान में उतरेंगे और ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। इसके लिए सभी जिलाध्यक्षों को तैयारी करने का निर्देश दिया गया है।
जेडीयू के प्रदेश प्रवक्ता और प्रदेश महासचिव के के त्रिपाठी ने कहा कि,
'' बैठक में सभी जिलाध्यक्षों और मंडल प्रभारियों को तैयारियों में जुटने का निर्देश दिया गया है। बीजेपी और जेडीयू के बीच दो दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन अभी सीटों का कुछ तय नहीं हुआ है। हमने अपनी दावेदारी पेश कर दी है। वर्ष 2007 के चुनाव में पार्टी को गठबंधन के तहत 13 सीटें और 2012 के चुनाव में 17 सीटें मिलीं थीं। इस बार भी उम्मीद है कि जो सीटें मांगी गई हैं वो मिल जाएंगी। यदि नहीं मिली तो हम अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे जिस तरह 2017 में 200 से अधिक सीटों पर लड़े थे।''

पूर्वांचल और मध्य यूपी की 25 सीटों पर जेडीयू ने ठोका दावा
यूपी में कुर्मी समुदाय भी लगभग सात फीसदी हैं और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी समाज से आते हैं। यूपी में कुर्मी समुदाय लगभग 50 सीटों पर अच्छी भूमिका निभाता है। इनको लेकर भी राजनीतिक दल रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। बिहार से सटे पूर्वांचल के दर्जनभर जिलों में उनकी अच्छी फैन फालोइंग भी है जिसका फायदा उनकी पार्टी को मिल सकता है। संतकबीरनगर, मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर, बलियां, वाराणसी, उन्नाव, जालौन, फतेहपुर और प्रतापगढ़ समेत दो दर्जन जिले ऐसे हैं जहां यह समुदाय हर सीट पर लगभग 15000 से 20000 तक वोटर हैं जो चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी को ध्यान में रखकर जेडीयू ने 25 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश की है।












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