अनोखा काम: दो बेटों के होते हुए भी बेटी और बहूओं ने दिया 90 साल की मां को कंधा
वाराणसी। यूपी में रविवार को एक अजीब तरह की घटना हुई। वाराणसी जिले में 90 साल की एक महिला की मौत पर उसके बेटों ने नहीं बल्कि उसकी बेटी और बहुओं ने कंधा दिया। पुत्र वहां पर मौजूद थे लेकिन एक खास वजह से वे इस बात का विरोध नहीं कर रहे थे।

चिरईगांव थाना के अंतर्गत बरियासनपुर गांव में रूढ़िवादी नियमों को तोड़ते हुए 90 साल की वृद्धा मां को बेटी और बहू ने अंतिम यात्रा में कंधा देकर गांव से बाहर तक पहुंचाया। बेटियों का कहना था कि मेरी मां की अंतिम इच्छा मैंने पूरा कर दिया। दरसअल बरियासनपुर गांव में बुजुर्ग महिला संतला देवी की पति का निधन 20 वर्ष पहले हो चुका था पति के निधन के बाद ही महिला ने बेटी वह बहुओं से यह कह दिया था कि मेरे निधन के बाद मेरी बेटी और बहू ही कंधा देकर मुझे गांव से बाहर करेंगी।
इसकी पीछे कि वजह ये थी कि समाज की बेटों को कन्धा देने की परंपरा टूट सके और ये सन्देश जाए की बेटी भी अर्थी को कंधा दे सकती साथ ही किसी को बेटा ना होने पर है उसे दुखी और मलाल ना रह जाए ऐसा नहीं उसके बेटे नहीं है। मृतक की एक बेटी के साथ ही उसके दो बेटे भी है।
क्या कहता है बेटा
इस पूरे मामले पर मृत संतला देवी के बेटे त्रिभुवन ने बताया की मेरी माँ को ये प्रेरणा मेरे पिता जी से मिली थी। वो भी बेटा और बेटी के बीच मे फर्क को मिटाना चाहते थे। उनकी मौत के बाद मां से हम लोगो को कहा था कि बेटा मेरी अंतिम इच्छा पूरी कर देना और मुझे गांव के बाहर तक बेटी और बहुओं के कंधे तक पहुंचना। जिससे लोगों को सीख मिले की जो काम बेटा कर सकता है वो बेटी क्यो नही कर सकती। और आगे चल कर ये बेटी और बहुएं अंतिम संस्कार और श्राद्ध तक का काम करेगी। आज उठाया हुआ कदम आगे चल कर समाज को नई सिख देगा और समाज मे फैली हुई कुरीतियों पर अंकुश लग सकेगा












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