आजमगढ़ में सुहेलदेव विश्वविद्यालय से अखिलेश-राजभर गठबंधन को कितना काउंटर कर पाएगी BJP?

लखनऊ, 16 नवंबर: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के बीच सियासी घमासान जमकर होने वाला है। पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन से हो रहे नुकसान की भरपाई करने के लिए पूर्वांचल में बीजेपी हर जतन कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का फोकस पूरी तरह से पूर्वांचल पर है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो किसान आंदोलन के अलावा पूर्वांचल में अखिलेश-राजभर के गठबंधन से होने वाले संभावित नुकसान से बीजेपी डरी हुई है। यही कारण है कि संगठन और सरकार ने पूरा जोर पूर्वांचल पर लगाया है। हालांकि सुभासपा का दावा है कि बीजेपी केवल नाम की सियासत करना चाहती है। बीजेपी असल मुद्दों पर आज भी फोकस नहीं कर रही है। यह राजभर समाज को धोखा देने का काम कर रहे हैं।

बीजेपी

दरअसल, 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में, भाजपा प्रचंड जीत के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन सपा और बसपा क्रमशः अपने गढ़ आजमगढ़ और अंबेडकर नगर में भगवा ब्रिगेड की जांच करने में सक्षम थे। ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के साथ इस बार सपा गठबंधन, जिसका गाजीपुर, मऊ और सुल्तानपुर जिलों में जनाधार है। इसने भाजपा खेमे में चिंता पैदा कर दी है। एसबीएसपी का मुकाबला करने के लिए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 नवंबर को घोषणा की कि आजमगढ़ में एक राज्य विश्वविद्यालय का नाम राजा सुहेलदेव के नाम पर रखा जाएगा।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर ने कहा कि,

'' बीजेपी केवल नाम की सियासत करके वोट बटोरना चाहती है। बीजेपी को लगता है कि महाराजा सुहेलदेव के नाम से विश्वविद्यालय बनाने से राजभर समाज उन्हें वोट दे देगा तो इसके भुलावे में वह न रहे। अगले विधानसभा चुनाव में पूरा राजभर समाज एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ ममतदान करने का काम करेगा। बीजेपी तो नाम में भी सियासत कर रही है। राजा महेंद्र प्रताप सिंह, अवंतीबाई लोधी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम से कोई घोषणा होती है तो उसपर इनका पूरा नाम लिखा जाता है लेकिन बीजेपी साजिश के तहत महाराजा सुहेलदेव के नाम के आगे से राजभर शब्द हटा देती है। ऐसा बहराइच में मेडिकल कालेज बनाते समय भी किया गया। इससे पहले सुहेलदेव पर डाक टिकट जारी करते समय भी राजभर शब्द हटा दिया गया।''

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर, राजनीतिक विश्लेषक कौशल किशोर मिश्रा के मुताबिक, "आजमगढ़ के लोग सत्तर के दशक के मध्य से विश्वविद्यालय की मांग कर रहे हैं जब राम नरेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे। पिछले चार दशकों में यूपी में विभिन्न राजनीतिक दल सत्ता में रहे, लेकिन मांग पूरी नहीं हुई। अब भाजपा सरकार विश्वविद्यालय की नींव रखकर मांग को पूरा करने जा रही है।

योगी

पूर्वांचल में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही बीजेपी

भाजपा पूर्वी यूपी में अधिकतम विधानसभा सीटें हासिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है और इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी यूपी में कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की, जिसमें कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन भी शामिल है। सिद्धार्थनगर में कॉलेज, उनके निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में विकास परियोजनाओं, एक महीने के भीतर। वह इस महीने गोरखपुर में एक एम्स और एक उर्वरक कारखाने और वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना का उद्घाटन कर सकते हैं।

पूर्वी यूपी ही तय करेगा राजनीतिक दलों का भाग्य

एक अन्य राजनीतिक विश्लेषक कमलाकांत सिन्हा ने कहा कि,

"किसान आंदोलन के साथ-साथ समाजवादी पार्टी-राष्ट्रीय लोक दल गठबंधन 2022 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपने चुनावी भाग्य में सेंध लगने के डर से, भाजपा ने पूर्वी पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं। सत्ता बरकरार रखने के लिए यूपी पूर्वी यूपी की लड़ाई आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के भाग्य का फैसला करने में निर्णायक होगी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य की 403 विधानसभा सीटों में से 160 इस क्षेत्र में हैं।''

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