नक़ल मुक्त अभियान का यूपी में दिख रहा बड़ा असर, जानिए योगी सरकार ने कैसे तोड़ी नकल रैकेट की कमर

आंकड़ो के अनुसार 2017 में गोवा, असम, बिहार, मणिपुर, पंजाब, हरियाणा, ओडिशा, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, केरल, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर, आंध्र प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों के छात्र पंजीकृत थे।

योगी आदित्यनाथ

UP Board Exam: उत्तर प्रदेश में इस समय यूपी बोर्ड की 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाएं चल रही हैं। इन परीक्षाओं में अन्य राज्यों और शैक्षिक बोर्डों के छात्र बड़ी संख्या में शामिल होते थे लेकिन अबकी बार इनकी संख्या में अनुचित साधनों का उपयोग करके उन्हें पास करने के इरादे से कक्षा 10 यूपी बोर्ड परीक्षा में शामिल होने की संख्या में उल्लेखनीय कमी देखी गई है, पिछले कुछ दिनों में सख्त नकल विरोधी उपायों और नकल माफिया पर कार्रवाई के कारण साल।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के आंकड़ों के अनुसार, जैसा कि प्रयागराज स्थित यूपी बोर्ड को औपचारिक रूप से कहा जाता है, यूपी बोर्ड की 2017 की हाई स्कूल परीक्षा में यूपी के बाहर के 1,19,123 निजी छात्रों ने पंजीकरण कराया था। इसके विपरीत इस बार अन्य राज्यों और शैक्षिक बोर्डों के मात्र 5,135 परीक्षार्थी 16 फरवरी से शुरू हुई हाई स्कूल परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।

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    यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ला ने कहा,

    यूपी बोर्ड अपनी परीक्षाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए पिछले वर्षों में बोर्ड और सरकार के स्तर पर लगातार प्रयास किए गए हैं। इनमें से कुछ चरणों में पारदर्शी तरीके से परीक्षा केंद्रों का आवंटन करना और इस संबंध में खराब ट्रैक रिकॉर्ड रखने वालों को काली सूची में डालना शामिल है।

    अधिकारियों की माने तो प्रश्नपत्रों के मुद्रण, परिवहन और भंडारण में अतिरिक्त सुरक्षा के साथ ही नकल माफियाओं पर नकेल कसने से भी नकल मुक्त परीक्षा सुनिश्चित करने में काफी मदद मिली है। यूपी बोर्ड के रिकॉर्ड बताते हैं कि अतीत में देश का शायद ही कोई ऐसा राज्य बचा हो जहां के छात्रों ने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में शामिल होने के लिए फॉर्म नहीं भरा हो।

    यूपी की शरण लेते थे परीक्षार्थी

    इनमें ऐसे छात्र शामिल थे जिन्होंने अन्य राज्यों से कक्षा 9 पास करने के बाद यूपी बोर्ड के 10वीं कक्षा के फॉर्म भरे थे, साथ ही हजारों उम्मीदवार जिन्होंने पहले प्रयास में अपने ही राज्यों और शैक्षिक बोर्ड, राज्य माध्यमिक शिक्षा विभाग से 10वीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण करने में असफल होने के बाद ऐसा किया था।

    बोर्ड की खामियों का लाभ उठाते थे बाहर के लोग

    एक अधिकारी ने बताया कि, चूंकि केवल हाई स्कूल सर्टिफिकेट पर लिखी गई जन्मतिथि को न केवल उच्च अध्ययन बल्कि विभिन्न नौकरियों के लिए भी मान्य माना जाता है, इसलिए कई राज्य के बाहर के छात्र भी अपनी जन्मतिथि में हेरफेर करने के लिए कक्षा 10 की परीक्षा दे रहे थे। लेकिन धीरे-धीरे बोर्ड ने इस तरह की खामियों के खिलाफ सख्त उपायों के साथ अपनी छवि में सुधार किया है और इसके परिणामस्वरूप 2023 की हाईस्कूल परीक्षा में बाहरी परीक्षार्थियों की संख्या घटकर 5,135 रह गई है।

    योगी सरकार में यूपी में टूटा नकल रैकेट

    यूपी बोर्ड के रिकॉर्ड बताते हैं कि पहले देश के लगभग हर राज्य से छात्र यूपी बोर्ड से हाईस्कूल का सर्टिफिकेट लेने आते थे। संगठित नकल रैकेट की मदद से इन्हें पास कराने के नाम पर नकल माफिया हर साल करोड़ों की कमाई करते थे। आंकड़ो के अनुसार 2017 में, गोवा, असम, बिहार, मणिपुर, पंजाब, हरियाणा, ओडिशा, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, केरल, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर, आंध्र प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, मणिपुर और त्रिपुरा आदि के छात्रों ने यूपी बोर्ड की हाई स्कूल परीक्षा के लिए पंजीकृत थे।

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