हारकर भी कैसे जीत गए केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा की कैसे हो गई मंत्रिमंडल से विदाई, जानिए

लखनऊ, 26 मार्च; उत्तर प्रदेश में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार दूसरी बार बनी है। सरकार बनने के बाद जिस तरह से चुनाव हारने के बाद केशव मंत्रिमंडल में आने में कामयाब रहे वहीं दूसरी तरफ दिनेश शर्मा लाख प्रयास के बावजूद मंत्रिमंडल में नहीं आ सके। बताया जा रहा है की दिनेश शर्मा की कार्यकर्ताओं के बीच निष्क्रियता ले डूबी। हालांकि दिनेश शर्मा को करीब से जानने वाले लोगों का मानना है कि दिनेश शर्मा अभी चुके नहीं हैं। कहीं न कहीं संगठन ने विश्वास में लेकर ही ये कदम उठाया है। जल्द ही उनको संगठन में बड़ा पद दिया जाएगा।

बीजेपी

कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे

दरअसल दिनेश शर्मा को एक ब्राह्मण चेहरे के तौर पर पिछली योगी सरकार में शामिल किया गया था लेकिन वो न तो कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर खरा उतरे न ही अपने आपको ब्राह्मण चेहरा बनाने में कामयाब रहे। दिनेश शर्मा का काम करने का अंदाज भी कार्यकर्ताओं को पसंद नही आया और इसका फीडबैक संगठन के पास लगातार पहुंच रहा था। अंत में जब डिप्टी सीएम चुनने की बारी आई तो यही बाते दिनेश शर्मा पर भरी पड़ गई।

योगी से नजदीकी और साफ्ट रवैया भी उल्टा पड़ा

बीजेपी के सूत्रों की माने तो दिनेश शर्मा को योगी का करीबी माना जाता था। योगी से करीबी के मामले की वजह से ही वो कभी विरोध करने की सथिति में नहीं पहुंच पाते थे लेकिन ब्रजेश पाठक ने कोरोना के समय भी अपने आपको कार्यकर्ताओं से जोड़े रखा। एक बार तो ब्रजेश पाठक ने कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए योगी सरकार के खिलाफ पत्र लिख दिया था। जिसका कार्यकर्ताओं में एक अच्छा संदेश गया था जिसका लाभ ब्रजेश पाठक को मिल गया। दिनेश शर्मा सीएम योगी के करीबी होने की वजह से कई मुद्दों पर चुप्पी साध गए।

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    ब्रजेश पाठक की तरह केशव भी योगी के खिलाफ मुखर रह गए

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे चौकाने वाला चेहरा केशव मौर्य का रहा जिसने चुनाव में हार के बावजूद डिप्टी सीएम बनने में कामयाब रहे। केशव के हारकर भी जितने के पीछे कई कारण हैं। पहला बीजेपी के पास मौर्य की तरह कोई बड़ा ओबीसी चेहरा नहीं है। बीजेपी को 2024 में आम चुनाव जाना है इसलिए उसे केशव की जरूरत है। दूसरा ये कि केशव के रहने से योगी सरकार में एक बैलेंस बना रहेगा। क्योंकि मौर्य हमेशा ही योगी के खिलाफ उखड़ रहे।

    कार्यकर्ताओं का विश्वास जीतने में कामयाब

    केशव प्रसाद मौर्य की सफलत की सबसे बड़ी यूएसपी केशव का कार्यकर्ताओं के प्रति लगाव है। दूसरी बार डिप्टी सीएम बनने के बाद भी प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। केशव हमेशा कार्यकर्ताओं को लेकर मुखर रहे हैं। कई बार अपनी बैठकों में भी केशव कार्यकर्ताओं को लेकर झगड़ चुके हैं। कार्यकर्ताओं के प्रति इसी इसी लगाव की वजह से वो हारने के बाद भी डिप्टी सीएम बनने में कामयाब रहे।

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