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गुरमेहर कौर: विवाद पर बवाल की जड़ से अब तक की पूरी कहानी

आखिर कैसे दिल्ली विश्वविद्यालय का विवाद देशद्रोह और देशभक्ति की ओर मुड़ गया और इस मुद्दे ने अलग ही रंग ले लिया।

नई दिल्ली। देश की सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में शुमार जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्याल तकरीबन 14 महीने पहले राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बना था, संस्थान के भीतर उमर खालिद, कन्हैया कुमार, अनिर्बान पर देश विरोधी नारे लगाने का आरोप लगा और इसके बाद तमाम बड़े-बड़े नेता पक्ष और विपक्ष में उतर आए, एक धड़ा जहां खुद को देशभक्त बता रहा था और उसे देशद्रोही करार दे रहा था तो दूसरा पक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा बता रहा था, हालांकि इस मुद्दे को बीते एक साल से अधिक हो चुका है, लेकिन एक बार फिर से वही घटनाक्रम दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में दोहराया गया है।

कैसे बढ़ा विवाद

कैसे बढ़ा विवाद

रामजस कॉलेज में विवाद उस वक्त शुरु हुआ जब उमर खालिद को यहां होने वाले सेमिनार में आमंत्रित किया गया, लेकिन एबीवीपी के विरोध के बाद उमर खालिद के आमंत्रण को रद्द कर दिया गया, जिसके बाद तमाम छात्र संगठन उमर खालिद को वापस लाओ के नारे लगाने लगे और प्रदर्शन करने लगे। यह प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक हुआ और इसमें एबीवीपी, आईएसा, एनएसयूआई संगठन कूद पड़े। दोनों ही पक्ष ने एक दूसरे पर हिंसा का आरोप लगाया, सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो सामने आए जिसमें एबीवीपी के नेता हिंसा करते हुए या धमकी देते हुए दिख रहे हैं। लेकिन इस पूरे प्रकरण में एक नया मोड़ तब आया जब दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली गुरमेहर कौर जोकि शहीद सेना के अधिकारी की बेटी हैं ने सोशल मीडिया पर एबीवीपी का विरोध किया। उनके विरोध करने के बाद ही तकरीबन एक साला पुराना उनका वीडियो सामने आया जिसमें वह कहती हैं कि उनके पिता को पाकिस्तान ने नहीं बल्कि युद्ध ने मारा।

गुरमेहर को धमकी मिलने के बाद मामला ने लिया दूसरा मोड़

गुरमेहर को धमकी मिलने के बाद मामला ने लिया दूसरा मोड़

बहरहाल अभी तक जो मुद्दा महज एक विश्वविद्यालय का मुद्दा था वह अब बड़ा मुद्दा बनने की ओर बढ़ चुका था, सोशल मीडिया पर गुरमेहर के वीडियो संदेश की समीक्षा होने लगी। सोशल मीडिया पर लोग रेप और जान से मारने की धमकी देने लगे हैं। लेकिन इन सबके बीच यह सवाल काफी पीछे छूट गया कि क्या कारगिल युद्ध के समय भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ा था, क्या भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया था। सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां तमाम लोग एक दूसरे के लिए अपशब्दों का प्रयोग करते हैं, कई ऐसे तत्व हैं जो अपनी सीमाओं को पार करते हैं, ऐसे में इन लोगों के खिलाफ शिकायत की जा सकती थी और शिकायत के आधार पर पुलिस इनके खिलाफ कार्रवाई करती तो मुमकिन है कि यह मुद्दा वो मोड़ नहीं लेता जो आज ले रहा है। बहरहाल देर से ही सही लेकिन गुरमेहर को मिल रही धमकी के खिलाफ एबीवीपी के नेता ने एफआईआर दर्ज कराई।

तथ्यों को भूल गई गुरमेहर

तथ्यों को भूल गई गुरमेहर

गुरमेहर ने जिस तरह से कारगिल युद्ध पर भावुक अपील एक वर्ष पहले की थी उसमें कई ऐसे तथ्यों को नजरअंदाज किया गया, जैसे उस वक्त पाकिस्तान ने घुसपैठ की जिसका भारत ने जवाब दिया और जो भारतीय सैनिक शहीद हुए थे वह पाकिस्तान की नहीं बल्कि भारत की सीमा थी, ऐसे में तमाम तथ्यों को दरकिनार कर गुरमेहर ने युद्ध ना करने का संदेश दिया, लेकिन वह यह बताना भूल गईं कि यह युद्ध भारत ने कभी शुरु नहीं किया था।

किरण रिजीजू के बयान ने बढ़ाया विवाद

किरण रिजीजू के बयान ने बढ़ाया विवाद

एक तरफ जहां गुरमेहर का वीडियो सामने आया और लोग उनकी समझ पर सवाल उठाने लगे, लेकिन यह मुद्दा उस वक्त बड़ा हो गया जब देश के गृह राज्य मंत्री ने बयान दिया कि गुरमेहर को कोई गुमराह कर रहा है और कोई उनके अंदर जहर घोल रहा है, वह यही नहीं रुके उन्होंने यह तक कह दिया कि उनके पिता की आत्मा रो रही होगी। गुरमेहर का मुद्दा सोशल मीडिया और विश्वविद्यालय संस्थान में बड़ा मुद्दा था, लेकिन किरन रिजीजू के बयान ने इस मुद्दे में घी डालने का काम किया। उन्होंने कहा कि वह एक 20 साल की लड़की है , उसका सोच विचार सीमित है, 20 साल की उम्र में आप कितना दुनिया देखते हैं, वामपंथी और कांग्रेस वाले बच्ची को लेकर उसे इस्तेमाल कर रहे हैं।

उमर खालिद को लेकर विवाद

उमर खालिद को लेकर विवाद

रामजस संस्थान के भीतर विवाद इस बात को लेकर उठा था कि उमर खालिद को यहां होने वाले सेमिनार में न्योता देने के बाद उसे रद्द कर दिया गया। हालांकि उमर खालिद के उपर अभी तक देशद्रोह का मामला साबित नहीं हुआ है, लेकिन उसने जो नारे दिए हैं उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तमाम लोगों के बीच वायरल हुआ था। ऐसी स्थिति में अगर फिर से कोई घटना उमर के संस्थान में आने से होती तो तनाव बढ़ सकता था।

जेएनयू की ही तरह एक बार फिर से दिल्ली विश्वविद्यालय में वही सबकुछ हुआ, लेकिन इस बार भी विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता था अगर सरकारी तंत्र में बैठे लोग और तमाम नेता इस मुद्दे पर गैरजिम्मेदाराना बयान नहीं देते और जिम्मेदार संस्थान अपनी जिम्मेदारियों का वहन करते जिसमें दिल्ली, पुलिस, दिल्ली विश्वविद्यालय संस्थान अहम हैं।

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