पड़ोसी राज्यों में हो रही बारिश के बाद UP में हाई अलर्ट, जानिए बाढ़ की आशंका से क्यों डरी सरकार

लखनऊ, 23 जुलाई: उत्तर प्रदेश में कम बारिश ने जहां यूपी के 48 जिलों में सूखे जैसे हालात पैदा कर दिए हैं वहीं दूसरी ओर यूपी के पड़ोसी राज्यों में हो रही बारिश सरकार के लिए चिंता का सबब बन रहा है। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश की वजह से अब यूपी के कई जिलों में बाढ़ की आंशका को लेकर सरकार अलर्ट हो गई है। प्रदेश के कुछ हिस्सों में फिर से हुई मानसूनी बारिश ने प्रशासन को 'हाई अलर्ट' पर कर दिया है। अधिकारियों की माने तो कुछ पड़ोसी राज्यों में अत्यधिक बारिश की सूचना मिली है जिसके बाद से ही यूपी किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।

बारिश

अधिकारियों की माने तो कुछ पड़ोसी राज्यों में अत्यधिक बारिश की सूचना मिली है। यह सूचना मिलने के बाद यूपी किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है, चाहे सूखा हो या बाढ़। राज्य में अभी तक बारिश के कारण जलजमाव या बाढ़ का कोई मामला सामने नहीं आया है। जलजमाव की स्थिति में लोगों और मवेशियों के लिए भोजन की व्यवस्था के साथ शिविर लगाए जाएंगे। इसके अलावा, महिलाओं के लिए एक 'डिग्निटी किट' उपलब्ध कराई जाएगी जिसमें सैनिटरी नैपकिन, कंघी और अन्य चीजें शामिल होंगी।"

अधिकारी ने कहा कि सरकार बंद नालियों को ट्रैक करने और जलभराव के मामलों की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है। मानसून के दौरान बंद नालियों की पहचान करने के लिए, सरकार उन स्थलों की पहचान करने के लिए ड्रोन का उपयोग कर रही है जहाँ नालियों की सफाई या रखरखाव की आवश्यकता है। प्रमुख, मध्यम और छोटे नालों की सफाई सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है।

प्रमुख सचिव (राजस्व) सुधीर गर्ग ने कहा कि,

''राज्य के किसी भी हिस्से से अब तक जलभराव या बाढ़ का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि सरकार उन क्षेत्रों में शिविर लगाने के लिए तैयार है, जहां बाढ़ आने की संभावना है। हम अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं।''

दरअसल इससे पहले यूपी में कम बारिश की वजह से सूखे के संकट को लेकर सरकार अलर्ट हो गई थी। 18 जुलाई को सूबे के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इसको लेकर एक अहम बैठक भी थी। यूपी में सरकार ने जुलाई के पहले सप्ताह में अधिकतम संभव किसानों को बीमा योजना के तहत कवर करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया था। हालांकि उम्मीद से कम बारिश के अनुमान के बाद अब सूखे की चिंता सताने लगी है। अधिकारियों ने सूखे के लिहाज से अपनी तैयारियों को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है।

कृषि विभाग के सूत्रों ने कहा कि बारिश में कमी के बाद 48 जिले पहले से ही "तनाव" में हैं। पिछले साल धान का उत्पादन एक साल पहले के 25.7 मिलियन टन से लगभग 10 लाख टन बढ़ा था। यह धान की खेती के तहत 2020-21 और 2021-22 के बीच 58.9 से बढ़कर 60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र तक पहुंच गई थी। अनुकूल मौसम की स्थिति, बेहतर वर्षा और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए उपायों ने राज्य में कृषि विकास को बढ़ावा देने में योगदान दिया।

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