Hathras Tragedy: यौन शोषण का आरोपी है 121 की मौतों का जिम्मेदार बाबा सूरज पाल, अखिलेश से निकला कनेक्शन?
Hathras Tragedy: उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में मंगलवार को आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ में मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 121 हो गई। सिकंदराराऊ थाने की पुलिस ने आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, जिसमें उन पर सबूत छिपाने और शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया।
खास बात यह है कि 'सत्संग' के पीछे के व्यक्ति सूरज पाल उर्फ बाबा साकार हरि उर्फ भोले बाबा का नाम एफआईआर में नहीं है। हादसे के बाद से बाबा फरार है। पुलिस उनकी तलाश में उनके ठिकानों की तलाशी ले रही है। इसी बीच, यौन शोषण समेत पांच अन्य गंभीर मुकदमों का आरोपी सूरज पाल उर्फ बाबा साकार हरि का पुराना सियासी कनेक्शन भी सामने आ चुका है। जिसमें अखिलेश यादव भी नजर आ रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है अखिलेश से बाबा का कनेक्शन?

सत्संग में अखिलेश: बात तीन जनवरी 2023 की है। जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव सूरज पाल उर्फ बाबा साकार हरि के सत्संग में पहुंचे थे। सत्संग की फोटो अखिलेश यादव ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी पोस्ट की थी। साथ ही लिखा था कि नारायण साकार हरि की सम्पूर्ण ब्रह्मांड में सदा - सदा के लिए जय जयकार हो। बाबा के सत्संग में हुई त्रासदी के बाद अखिलेश यादव की पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
इटावा से जुड़ाव: सपा प्रमुख अखिलेश यादव का जन्म इटावा जिले के सैफई गांव में हुआ था। सैफई गांव यादव परिवार का पैतृक गांव है। यहां पर समाजवादी पार्टी की राजनीति का एक मजबूत आधार है। उधर, सूरज पाल के करियर की शुरुआत 'इटावा' से ही हुई। 28 साल पहले इटावा में यूपी पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर पाल तैनात था। लेकिन, रेप का मुकदमा लिखे जाने के बाद सूरज पाल को पुलिस विभाग से बर्खास्त किया गया था। जेल से छूटने के बाद वह अपना नाम और पहचान बदलकर बाबा बन गया था।
बाबा पर यौन उत्पीड़न समेत कई मामले दर्ज
आपको बता दें कि सूरज पाल उर्फ भोले बाबा अपने 'सत्संग' को लेकर कई बार विवादास्पद रह चुके हैं। इनके खिलाफ, यौन उत्पीड़न समेत कई मामले अलग-अलग शहरों में दर्ज हैं। जिसमें आगरा, इटावा, कासगंज, फर्रुखाबाद समेत अन्य शामिल हैं।
हादसे के वक्त कहां थे सूरज पाल उर्फ भोले बाबा?
बाबा नारायण हरि, जिन्हें साकार विश्व हरि भोले बाबा के नाम से भी जाना जाता है, 'सत्संग' आयोजित करने वाले उपदेशक कहां थे? यह सवाल बना हुआ था क्योंकि वे लापता थे और पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी थी। जबकि राज्य पुलिस ने आयोजकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की, उनका नाम आरोपियों की सूची में नहीं है, हालांकि शिकायत में उनका नाम है।
हाथरस में मरने वालों में 7 बच्चे, 1 पुरुष और सभी महिलाएं
राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार, घायलों की संख्या 28 है। 121 शवों में से केवल चार की पहचान होनी बाकी है। मंगलवार को मरने वाले 116 लोगों में से सात बच्चों और एक पुरुष को छोड़कर सभी महिलाएं थीं। घटनास्थल पर चप्पलों का ढेर इस त्रासदी की मूक गवाही दे रहा था, जो इतने सारे लोगों पर आई थी।
भक्तों की वास्तविक संख्या छिपाई गई
घटना का विवरण देते हुए एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि आयोजकों ने अनुमति लेते समय सत्संग में आने वाले भक्तों की वास्तविक संख्या छिपाई, यातायात प्रबंधन में सहयोग नहीं किया और घटना के बाद सबूत छिपाए। एफआईआर ने स्पष्ट रूप से पुलिस और प्रशासन को क्लीन चिट दे दी और कहा कि उन्होंने उपलब्ध संसाधनों से जो संभव था, वह किया।
इन धाराओं पर मुकदमा दर्ज
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंगलवार देर रात सिकंदराराऊ थाने में दर्ज प्राथमिकी में 'मुख्य सेवादार' देवप्रकाश मधुकर और अन्य आयोजकों के नाम हैं। अधिकारी ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 105 (गैर इरादतन हत्या), 110 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), 126 (2) (गलत तरीके से रोकना), 223 (लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवज्ञा), 238 (साक्ष्य मिटाना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। आयोजकों ने करीब 80,000 लोगों की अनुमति मांगी थी, जिसके लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यवस्था की थी। हालांकि, 2.5 लाख से अधिक लोग एकत्र हुए, ऐसा कहा गया है।












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