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वैष्णो देवी: नहीं रहे कोरोना में देवदूत बने डॉक्टर अरुण, घर के इकलौते चिराग की 30 दिन पहले ही हुई थी शादी

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गोरखपुर, 02 जनवरी। नए साल के पहले दिन ही देश को कई बड़े हादसों का सामना करना पड़ा। न्यू ईयर की रात माता वैष्णो देवी के दरबार में हुई भगदड़ के शनिवार की सुबह शोक की लहर दौड़ पड़ी। इस हादसे में 12 लोगों ने अपनी जान गंवाई जबकि 13 से अधिक लोग घायल हुए। मृतकों में एक गोरखपुर डॉक्टर भी थे जिन्होंने कोरोना वायरस की दूसरी लहर में कई लोगों की मदद कर उन्हें नई जिंदगी दी थी। एक महीना पहले ही उनकी शादी हुई थी, वह अपनी पत्नी और अन्य डॉक्टर दोस्तों के साथ माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए न्यू ईयर (31 दिसंबर-1 जनवरी) की रात मंदिर पहुंचे थे।

30 दिन पहले ही हुई थी शादी

30 दिन पहले ही हुई थी शादी

वैष्णो देवी भवन में भगदड़ में कई लोग अभी भी लापता हैं वहीं मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के रहने वाले डॉक्टर अरुण के घर भी मातम पसरा हुआ है, उनकी आकस्मिक मौत से परिवार वालों को गहरा सदमा पहुंचा है। अरुण ने कोविड संकट के दौरान हजारों लोगों की मदद कर मरीजों की सेवा में दिर-रात एक कर दिया था। उनके निधन से सिर्फ घर में ही नहीं बल्कि पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। निधन से 30 दिन पहले ही अरुण की शादी हुई थी।

पत्नी और दोस्तों के साथ बाई रोड गए थे जम्मू

पत्नी और दोस्तों के साथ बाई रोड गए थे जम्मू

अभी उनकी पत्नी के हाथों की मेहंदी का रंग भी नहीं उतरा था कि वैष्णो देवी भवन में अरुण उनका साथ छोड़ हमेशा के लिए चले गए। अरुण 29 दिसंबर को अपनी पत्नी और दोस्तों के साथ वैष्णो देवी दर्शन के लिए बाई रोड जम्मू गए थे। हादसे की रात अरुण की पत्नी और दोस्त तो गुफा में प्रवेश कर गए लेकिन हाथ में इलेक्‍ट्रॉनिक घड़ी होने की वजह से उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। थोड़ी देर के लिए वह घड़ी को जमा कराने गए ही थे कि वह भगदड़ की चपेट में आ गए।

घड़ी की वजह से गुफा में नहीं जा सके थे अरुण

घड़ी की वजह से गुफा में नहीं जा सके थे अरुण

साल के पहले ही दिन शनिवार को जब अरुण के घर उनके निधन की खबर पहुंची तो पूरे गांव में मातम पसर गया, उनके घर के बाहर शुभचिंतकों की भीड़ लगी है। अरुण के पिता सत्य प्रकाश सिंह उनके बेटे की पत्नी डॉक्टर अर्चना सिंह और उनके दोस्त दर्शनों के लिए गुफा में पहुंच गए थे, लेकिन इलेक्‍ट्रॉनिक घड़ी जमा करने गए अरुण भवन से नीचे लौटते समय हादसे का शिकार हो गए। अरुण और अर्चना की शादी 1 दिसंबर को हुई थी। सत्य प्रकाश ने बताया कि बेटे के निधन की जानकारी उन्हें टीवी से मिली।

गोरखपुर में चलाते थे अस्पताल

गोरखपुर में चलाते थे अस्पताल

बुलंदशहर के खुर्जा के एक कॉलेज से बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) की डिग्री हासिल करने वाले 30 वर्षीय अरुण प्रताप सिंह गोरखपुर में एक अस्पताल चला रहे थे। अरुण के साथ उनके दोस्त अजय कुमार और डॉ अनुग्रह नारायण सिंह भी अपनी पत्नियों के साथ वैष्णो देवी दर्शन के लिए पहुंचे थे। अरुण के पिता ने कहा, सभी ने एक कार किराए पर ली और 29 दिसंबर को वैष्णो देवी के लिए रवाना हो गए, गुरुवार को बात हुई थी तो वे जालंधर पहुंचे थे।

इकलौते बेटे और घर के पहले डॉक्टर थे अरुण

इकलौते बेटे और घर के पहले डॉक्टर थे अरुण

गोरखपुर के चौरी चौरा क्षेत्र के रामपुर भुर्ज गांव के रहने वाले अरुण प्रताप, सत्य प्रकाश सिंह और उनकी पत्नी तारा देवी के इकलौते बेटे और घर के पहले डॉक्टर थे। उनकी छोटी बहन प्रियंका सिंह की शादी हो चुकी है। रामपुर भुर्ज गांव के पूर्व प्रधान और अरुण के पिता सत्य प्रकाश ने कहा, 'अरुण हमारे परिवार में पहले डॉक्टर थे। वह अपने रिश्तेदारों और स्थानीय निवासियों के लिए एक प्रेरणा थे। गांव के सभी लोग उस पर गर्व करते थे। अपने अस्पताल (हिंद अस्पताल) में अरुण कभी भी मरीजों से ज्यादा फीस नहीं लेते थे।

टीवी से मिली बेटे की मौत की खबर

टीवी से मिली बेटे की मौत की खबर

रामपुर भुर्ज गांव में सत्य प्रकाश का परिवार इलाके के संपन्न लोगों में माना जाता है। सत्य प्रकाश ईंट भट्ठा भी चलाते थे लेकिन निजी कारणों से बंद कर दिया। सत्य प्रकाश के अनुसार उन्हें इस घटना के बारे में तब पता चला जब टेलीविजन चैनलों पर यह खबर आई। सत्य प्रकाश ने कहा, 'मिनटों बाद, मीडिया ने मेरे बेटे के नाम सहित अन्य मृतकों के नाम दिखाना शुरू कर दिया।' उन्होंने अरुण को कॉल किया लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी सहित रिश्तेदारों को सूचित किया और उनसे खबर की पुष्टि करने का अनुरोध किया।

आधिकारिक तौर पर कब पता चला?

आधिकारिक तौर पर कब पता चला?

अरुण के पिता ने कहा, 'आधिकारिक तौर पर मुझे बेटी की मौत का पता तब चला जब दो दो सरकारी अधिकारी (लेखपाल) शनिवार सुबह मेरे घर आए और मुझे बेटे के निधन के बारे में जानकारी दी। सरकारी अधिकारी मेरे छोटे भाई को लखनऊ से अरुण का शव लाने के लिए लेकर गए हैं, वह दोपहर वहां पहुंचने वाले थे। बहू अर्चना सिंह और बेटे के साथ यात्रा पर गए अन्य लोग सुरक्षित हैं।' उन्होंने बताया कि अरुण ने कुशनीनगर की अर्चना से 1 दिसंबर, 2021 को शादी की थी।

यह भी पढ़ें: वैष्णो देवी भगदड़: जांच पैनल का गठन, 7 दिनों के भीतर कमेटी देगी रिपोर्ट

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English summary
Vaishno Devi Incident: Doctor Arun, who treated people in Corona, was no more married 30 days ago
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