यूपी चुनाव: पूर्वांचल में योगी आदित्यनाथ की वजह से बड़ी मुश्किल में भाजपा
भाजपा के फायर ब्रांड नेता, गोरखपुर के सांसद और पूर्वांचल के हिन्दू मतदाताओं के बीच अपनी गहरी पकड़ रखने वाले योगी आदित्यनाथ पार्टी के क्रियाकलापों से ‘नाखुश’ हैं।
गोरखपुर। किसी सवाल का जवाब तो आपने सुना ही होगा, जवाब से निकला अनुपूरक सवाल भी सुना होगा, पर जवाब ही सवाल बन जाए, इस तरह की बातें कम सुनने को मिलती है। यूं कहें कि यह अनूठा है। आसन्न विधानसभा चुनाव के दरम्यान उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल इलाका, जिसे हिन्दुवाद का गढ़ माना जाता है, खुद उस सवाल का जवाब ढूंढ रहा है। कहानी यहां से शुरू होती है- 'मन न रंगाए, रंगाए योगी कपड़ा।' प्रश्न यह पूछा जा रहा है कि मन रंगाएं या कपड़ा? सूचना है कि भाजपा के फायर ब्रांड नेता, गोरखपुर के सांसद और पूर्वांचल के हिन्दू मतदाताओं के बीच अपनी गहरी पकड़ रखने वाले योगी आदित्यनाथ पार्टी के क्रियाकलापों से 'नाखुश' हैं। यह दावा उनके समर्थक कर रहे हैं, वे नहीं। इस स्थिति में समर्थकों के बीच असमंजस का आलम है कि वे भाजपा की सुनें, योगी की सुनें, योगी की अराजनीतिक इकाई हिन्दू युवा वाहिनी की सुनें या विद्रोह कर खुद फैसला लें। मतलब स्पष्ट है कि मन ही मन योगी समर्थक सोच रहे हैं-'मन रंगाएं कि कपड़ा?'

आदित्यनाथ के तेवर धीरे-धीरे बागी हो रहे हैं
योगी के कुछ नजदीकी लोग कह रहे हैं कि पूर्वी यूपी के दिग्गज नेता योगी आदित्यनाथ के तेवर धीरे-धीरे बागी हो रहे हैं। पार्टी हाईकमान के खिलाफ योगी आदित्यनाथ कभी भी अपनी भड़ास निकाल सकते हैं। पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ की संरक्षण वाली हिन्दू युवा वाहिनी (हियुवा), जिसकी स्थापना योगी आदित्यनाथ ने 2002 में की थी, ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में 64 सीटों से चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए कुशीनगर और महाराजगंज जिले के छह उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी है। यह भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल पैदा कर सकता है।

भाजपा ने योगी आदित्यनाथ का ‘अपमान' किया है।
हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह कहते हैं- ‘भाजपा ने योगी आदित्यनाथ का ‘अपमान' किया है। हम और अधिक उम्मीदवारों की सूची जारी करेंगे। हियुवा कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। पूर्वी यूपी के लोग चाहते थे कि योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में घोषित किया जाए लेकिन भाजपा ने उसे नजरंदाज कर दिया। पार्टी ने अपने चुनाव प्रबंधन समिति में भी उन्हें शामिल नहीं किया। योगी ने लगभग 10 उम्मीदवारों की एक सूची दी थी, लेकिन भाजपा ने उनमें से दो को ही टिकट दिया। हम किसी भी सूरत में यह बर्दाश्त नहीं कर सकते। यही कारण है कि हमने अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला लिया। भाजपा ने पिछले साल अपनी परिवर्तन यात्रा के दौरान भी उन्हें नजरंदाज किया था। इस चुनाव में भी हमारे नेता की तस्वीर पोस्टर और यात्रा के बैनर पर नहीं है'।

आदित्यनाथ गोरखपुर के पांच बार से लोकसभा सांसद हैं
बता दें कि योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के पांच बार से लोकसभा सांसद हैं। 2014 के चुनाव में हिंदुओं और मुसलमानों के एक मिश्रित आबादी वाले जिलों में राजग के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने को भाजपा ने उन्हें एक हेलीकॉप्टर दिया था। सवाल यह है कि आखिर योगी आदित्यनाथ के मन में क्या चल रहा है? क्योंकि उन्होंने अभी तक इस संबंध में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। हां, इतना जरूर कहा है कि ‘पार्टी' अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करेगी। फिर वही सवाल कि ‘पार्टी' यानी भाजपा या ‘हियुवा'?

नोटबंदी के कारण यहां भाजपा का ग्राफ पहले से गिरा है
वैसे, राजनीति के ज्ञानी मानते हैं कि यदि हियुवा की कार्यशैली पर योगी आदित्यनाथ की मौन स्वीकृति न भी हो तो भी उनके समर्थक क्या करें? भाजपा के लिए काम करें, हियुवा के लिए काम करें या योगी आदित्यनाथ के लिए। बहरहाल, योगी आदित्यनाथ की वजह से भाजपा का गढ़ माने जाने वाले पूर्वांचल में भाजपा के वोटर खुद को दुविधा में पा रहे हैं। हालांकि नोटबंदी के कारण यहां भाजपा का ग्राफ पहले से गिरा है, लेकिन इस माहौल ने उस गिरे ग्राफ को और नीचे की ओर धकेल दिया है। ये भी पढ़ा:इलाहाबाद: भाजपा-अपना दल में कलह, क्या ये नाराजगी दोनों को ले डूबेगी?












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