100 किलो मसूर की दाल से बनाई गई मां दुर्गा की मूर्ति, दूर-दूर से देखने आ रहे हैं लोग
गोरखपुर। शारदीय नवरात्र अपने अंतिम चरण में है। इस दौरान मां दुर्गा की अलग-अलग तरीकों से बनीं मूर्तियां लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। इन्हीं में से एक मूर्ति है जो गोरखपुर के साहबगंज में लगाई गई है। इस मूर्ति की खासियत है कि यह मसूर की दाल से बनी हुई है। कारीगरों का कहना है कि नवरात्र में मां दुर्गा की मूर्तियों को इको फ्रेंडली बनाने की मुहिम के तहत ऐसा किया गया है। वहीं इस बार कारीगर केमिकल कलर की तुलना में हर्बल पेंट चार गुना अधिक खर्च कर रहे हैं।

गोरखपुर के साहबगंज किराना मंडी में नवरात्रों में मां की प्रतिमा को मसूर की दाल से बनाया गया है। ये इको फ्रेंडली मूर्ति सभी के आकर्षण का केंद्र बनी है। इसे देखने लोगों में जबरदस्त क्रेज है। प्रत्येक मूर्ति को बनाने में करीब सौ किलो दाल खर्च हुई है। इसे गोरखपुर के कलाकार प्रवीण विश्वास ने बनाया है। 63 साल के प्रवीण विश्वास पश्चिम बंगाल के नवदीप धाम के रहने वाले हैं। वे 48 साल से गोरखपुर में प्रतिमाएं बना रहे हैं।
कलाकार प्रवीर विश्वास बताते हैं कि मूर्ति बनाने में करीब 100 किलो मसूर की दाल की खपत हो रही है। चूहा, बत्तख, सॉप से लेकर राक्षस तक के बनाने में मसूर की दाल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस मूर्ति में भी बांस, मिट्टी व पुआल का पूरा प्रयोग किया जाएगा जाएगा। मूर्ति के ऊपरी सतह पर मसूर की दाल लगने से प्रतिमा काफी आकर्षक दिख रही है। गोरखपुर में प्रवीण को लगभग 55 इको फ्रेंडली मूर्तियों का आर्डर मिला है जिसमें लगभग हर मूर्ति में 100 किलो दाल का प्रयोग हो रहा है। साथ ही मूर्ति बनाने में हर्बल पेंट का ही इस्तेमाल होता है। प्रवीण की एक मूर्ति की कीमत 40 हजार रुपये है।












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